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अम्बिकापुर: नैनो यूरिया-डीएपी से बदल रही खेती की तस्वीर, किसान राम लखन की सफलता से सीखें





नैनो यूरिया और डीएपी: आधुनिक कृषि में क्रांति, सरगुजा के किसान अपना रहे नई तकनीक

नैनो यूरिया और डीएपी: आधुनिक कृषि में क्रांति, सरगुजा के किसान अपना रहे नई तकनीक

अम्बिकापुर, 08 जून 2026

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कृषि के क्षेत्र में एक नई सुबह का उदय हो रहा है। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं, बल्कि बेहतर और उच्च गुणवत्ता वाली पैदावार भी प्राप्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में अम्बिकापुर विकासखण्ड के ग्राम कंचनपुर के प्रगतिशील किसान राम लखन राजवाड़े ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से खेती में एक नई मिसाल पेश की है।

कम लागत, अधिक उत्पादन: राम लखन राजवाड़े का अनुभव

राम लखन राजवाड़े, जो लगभग 10 एकड़ भूमि पर पत्ता गोभी, टमाटर और मक्का जैसी विविध फसलों की खेती करते हैं, ने अपने खेतों में नैनो उर्वरकों का सफल प्रयोग किया है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक डीएपी की एक पूरी बोरी जो परिणाम देती थी, उससे कहीं बेहतर और प्रभावी परिणाम नैनो यूरिया-डीएपी की बहुत कम मात्रा से प्राप्त हो रहे हैं। यह तकनीक न केवल आर्थिक रूप से किफायती है, बल्कि खेती में होने वाले अनावश्यक खर्चों को कम करने में भी सहायक है।

नैनो तकनीक कैसे काम करती है?

नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी विशेषता उनका छिड़काव पद्धति से प्रयोग करना है। नैनो उर्वरक सीधे पौधों की पत्तियों पर स्प्रे किए जाते हैं। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

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  • सीधा पोषक तत्व पोषण: पौधों को पोषक तत्व सीधे पत्तियों के माध्यम से मिलते हैं, जिससे उनका बेहतर उपयोग होता है।
  • पर्यावरण के अनुकूल: यह मिट्टी के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुँचाता है और उर्वरकों के रिसाव (leaching) की समस्या को कम करता है।
  • फसल विकास में वृद्धि: राम लखन ने बताया कि धान की फसल में छिड़काव के बाद धान की बालियाँ लंबी और अधिक विकसित दिखाई दीं, जिससे उत्पादन में स्पष्ट सुधार दिखा।

आधुनिक कृषि की ओर बढ़ते कदम

नैनो उर्वरक न केवल फसल की पैदावार बढ़ाते हैं, बल्कि पौधों में तनाव सहने की क्षमता भी विकसित करते हैं। राम लखन राजवाड़े ने अन्य किसानों को भी इस तकनीक को अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा, “नैनो यूरिया-डीएपी का उपयोग कर स्वयं परिणाम देखें। यह तकनीक आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।”

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की संभावनाएँ

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छोटा आकार (नैनोमीटर स्केल) इन्हें पौधों की कोशिकाओं के अंदर आसानी से प्रवेश करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त:

  • भंडारण में आसानी: बोरी-दर-बोरी ढोने के बजाय, किसान छोटी बोतल में उर्वरक लेकर आसानी से छिड़काव कर सकते हैं।
  • मिट्टी की उर्वरता: पारंपरिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले मृदा प्रदूषण को रोकने में नैनो उर्वरक एक क्रांतिकारी समाधान हैं।

राम लखन राजवाड़े जैसे किसानों की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि यदि भारतीय किसान नई तकनीक और वैज्ञानिक मार्गदर्शन को अपनाएं, तो कृषि को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाया जा सकता है। कंचनपुर गाँव के इस प्रयास ने न केवल स्थानीय स्तर पर बदलाव की बयार लाई है, बल्कि पूरे सरगुजा जिले के किसानों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी बनी है।


रिपोर्टर: प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क


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