सुपेबेड़ा जल प्रदाय योजना: 9 गांवों में शुद्ध पेयजल की राह आसान, 5 जुलाई तक पूरा होगा लक्ष्य





सुपेबेड़ा जल प्रदाय योजना: गरियाबंद के लिए विकास की नई संजीवनी

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सुपेबेड़ा जल प्रदाय योजना: गरियाबंद के लिए विकास की नई संजीवनी, 9 गांवों की बदलेगी तस्वीर

गरियाबंद, 08 जून 2026: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड के सुपेबेड़ा और उसके आसपास के गांवों के लिए एक नई सुबह की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और नागरिकों के जीवनस्तर को सुदृढ़ करने के संकल्प को एक और बड़ी उपलब्धि के साथ सिद्ध किया है। सुपेबेड़ा और उसके आसपास के 9 गांवों में अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान मिलने वाला है।

परियोजना का अवलोकन: करोड़ों की स्वीकृति और तीव्र गति

सुपेबेड़ा जल प्रदाय योजना न केवल एक सरकारी परियोजना है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों के लिए एक राहत का माध्यम है जो लंबे समय से शुद्ध पेयजल की बाट जोह रहे थे। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार द्वारा 10 करोड़ 34 लाख 32 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्यों को पूर्ण करने के लिए 5 जुलाई 2026 तक की डेडलाइन तय की गई है। आने वाली 30 जून से योजना की टेस्टिंग प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, जो ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

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परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

  • लाभान्वित क्षेत्र: सुपेबेड़ा, सागुनबाड़ी, मोटरापारा, निष्ठीगुड़ा, सेंधमुड़ा, खोकसरा, खम्हारगुड़ा, परवापाली एवं ठिरलीगुड़ा।
  • लाभार्थी परिवार: कुल 2,074 परिवारों तक घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाएगा।
  • तकनीकी ढांचा: सेंधमुड़ा घाट क्षेत्र में तेल नदी पर इंटेकवेल का निर्माण किया जा रहा है। सुपेबेड़ा में 75 हजार लीटर क्षमता वाले उच्च स्तरीय जलागार का निर्माण पहले ही हो चुका है, जबकि फिल्टर प्लांट का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

मुख्यमंत्री का तोहफा: 7 करोड़ के एनीकट से मिलेगी ‘संजीवनी’

जल प्रदाय योजना को और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक दूरगामी निर्णय लिया है। उन्होंने तेल नदी पर 7 करोड़ रुपये की लागत से एनीकट निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है। यह एनीकट सुपेबेड़ा जल प्रदाय योजना के लिए एक ‘सपोर्ट सिस्टम’ का काम करेगा।

एनीकट के लाभ:

  • स्थायी जल स्रोत: यह इंटेकवेल के आसपास पूरे वर्ष जलभराव सुनिश्चित करेगा, जिससे गर्मी के मौसम में भी पेयजल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहेगी।
  • भू-जल संवर्धन: लगभग 300 मीटर लंबे और 3 मीटर ऊंचे इस एनीकट से क्षेत्र का भू-जल स्तर रिचार्ज होगा।
  • कृषि विकास: यह न केवल पेयजल की स्थिरता सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में रबी और खरीफ फसलों के लिए किसानों को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित होगा।

जन-कल्याण की प्रतिबद्धता

यह योजना न केवल पेयजल की आपूर्ति करेगी, बल्कि क्षेत्र की महिलाओं और बच्चों के श्रम और समय की भी बचत करेगी, जो अब तक जल संग्रहण के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर थे। सुपेबेड़ा जैसे विशेष पिछड़े और संवेदनशील क्षेत्र में स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए, यह योजना संजीवनी के समान है।

मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह कदम ग्रामीण विकास और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। शासन की जनकल्याणकारी सोच से अब सुपेबेड़ा और उसके आसपास के गांवों में स्वच्छ पेयजल का सपना हकीकत में बदल रहा है, जिससे हजारों ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।


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