बलरामपुर: विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बस्तियों तक पहुंचीं स्वास्थ्य सेवाएं; सबाग के अखइनकोना में लगा विशेष शिविर, मौके पर ही हुआ मुफ्त इलाज और दवा वितरण
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती और जनजातीय बाहुल्य जिले बलरामपुर में राज्य शासन के मंशानुरूप सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जिले की अत्यंत संवेदनशील और विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति (PVTG) ‘पहाड़ी कोरवा’ परिवारों को उनके घर के समीप ही उन्नत और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सुदूर व दुर्गम क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य जांच व उपचार शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
हालिया अभियान के अंतर्गत विकासखंड सबाग के अंतर्गत आने वाले सुदूर वनांचल ग्राम अखइनकोना में एक विशाल स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य भौगोलिक रूप से कटे हुए और कठिन रास्तों के बीच बसे पहाड़ी कोरवा परिवारों तक सीधे पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन करना, मौसमी बीमारियों से उनका बचाव करना तथा आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श और दवाइयां मौके पर ही निःशुल्क उपलब्ध कराना था।
शिविर का मुख्य आकर्षण: 53 ग्रामीणों की हुई गहन जांच, 35 को मिलीं मुफ्त दवाइयां
अखइनकोना में आयोजित इस विशेष स्वास्थ्य शिविर में सुबह से ही पहाड़ी कोरवा समुदाय के स्त्री, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों का पहुंचना शुरू हो गया था। स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ANM) की टीम ने पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रत्येक ग्रामीण की शारीरिक दिक्कतों को सुना और उनकी आवश्यक पैथोलॉजिकल व क्लिनिकल जांच की।
शिविर के दौरान कुल 53 मरीजों का पंजीयन कर उनकी विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें से अधिकांश मरीजों में मौसमी बुखार, सर्दी-खांसी, त्वचा संबंधी संक्रमण, बदन दर्द और पोषण की कमी के लक्षण पाए गए। चिकित्सकों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्काल 35 मरीजों को रोग के अनुसार आवश्यक एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक, विटामिन्स और अन्य जीवन रक्षक दवाइयों का मौके पर ही वितरण किया गया।
स्वास्थ्य शिविर अखइनकोना – एक नजर में
| विवरण / गतिविधि | आंकड़े / मुख्य बिंदु |
|---|---|
| कुल लाभांवित ग्रामीण मरीज (जांच) | 53 मरीज |
| निःशुल्क दवाइयां प्राप्त करने वाले मरीज | 35 मरीज |
| विशेष ध्यान केंद्रित वर्ग | शिशुवती माताएं, गर्भवती महिलाएं एवं कुपोषित बच्चे |
| मुख्य परामर्श विषय | मौसमी बीमारियां, व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण एवं शिशु स्वास्थ्य |
| संबद्ध प्रशासनिक नेतृत्व | कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी एवं जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर |
शिशुवती माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य की हुई विशेष जांच, दिया गया गंभीर परामर्श
इस जनजातीय स्वास्थ्य शिविर में सबसे ज्यादा ध्यान गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और शिशुवती माताओं के स्वास्थ्य पर केंद्रित किया गया। पहाड़ी कोरवा जनजाति में जागरूकता के अभाव और पारंपरिक रहन-सहन के कारण अक्सर महिलाओं और बच्चों में कुपोषण व एनीमिया (खून की कमी) जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शिविर में आईं सभी माताओं के हीमोग्लोबिन स्तर, वजन और रक्तचाप (बीपी) की जांच की।
स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा शिशुवती माताओं को बच्चों के उचित लालन-पालन, छह माह तक केवल स्तनपान कराने, बच्चों को समय पर अनिवार्य टीकाकरण सुनिश्चित करने और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों जैसे मुनगा (सहजन), हरी पत्तेदार सब्जियां, महुआ और रागी को अपने दैनिक आहार में शामिल करने की विशेष सलाह दी गई। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उनके शारीरिक विकास की मैपिंग की गई और कमजोर बच्चों के लिए विशेष न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स और सिरप प्रदान किए गए।
जागरूकता अभियान: मौसमी बीमारियों, स्वच्छता और पोषण के प्रति ग्रामीणों को किया अलर्ट
इलाज और दवा वितरण के साथ-साथ स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों के बीच एक व्यापक स्वास्थ्य साक्षरता और जागरूकता सत्र का भी संचालन किया। चूंकि वर्तमान समय में मौसमी बदलावों के कारण जलजनित और मच्छर जनित बीमारियों जैसे मलेरिया, डायरिया (दस्त), और टायफाइड का खतरा वनांचल क्षेत्रों में काफी बढ़ जाता है, इसलिए ग्रामीणों को इससे बचाव के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए।
स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा ग्रामीणों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया:
- पानी उबालकर पिएं: वर्षा काल और मौसमी बदलावों के दौरान पेयजल के स्रोतों के दूषित होने की संभावना रहती है, इसलिए ग्रामीणों को हमेशा पानी छानकर या उबालकर पीने की सलाह दी गई।
- आसपास जलजमाव न होने दें: मलेरिया और डेंगू के मच्छरों के पनपने को रोकने के लिए घरों के आसपास गड्ढों में पानी जमा न होने देने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई।
- व्यक्तिगत स्वच्छता है जरूरी: भोजन करने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत विकसित करने पर जोर दिया गया ताकि पेट की बीमारियों से बचा जा सके।
- नियमित स्वास्थ्य जांच: किसी भी प्रकार का बुखार, कमजोरी या बीमारी होने पर झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में समय गंवाने के बजाय तुरंत नजदीकी उप-स्वास्थ्य केंद्र या मितानीन से संपर्क करने को कहा गया।
अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: जिला प्रशासन का संकल्प
उल्लेखनीय है कि बलरामपुर जिले के सुदूर पहाड़ियों और जंगलों में बसे विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय बस्तियों में पहुंच मार्ग कठिन होने के कारण सामान्य दिनों में ग्रामीणों का स्वास्थ्य केंद्रों तक नियमित रूप से आना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसी भौगोलिक समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं ‘चलित स्वास्थ्य टीम’ (Mobile Health Team) के माध्यम से इन बस्तियों के भीतर जाएं।
जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर खुद इन अभियानों की साप्ताहिक समीक्षा कर रही हैं ताकि कोई भी बसाहट स्वास्थ्य लाभ से वंचित न रहे। अखइनकोना में आयोजित इस शिविर की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति सुदृढ़ हो, तो सरकार की कल्याणकारी योजनाएं भौगोलिक बाधाओं को पार कर सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंच सकती हैं। शिविर के समापन पर स्थानीय पहाड़ी कोरवा परिवारों ने जिला प्रशासन और डॉक्टरों की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि घर के पास इलाज मिलने से उनका समय और पैसा दोनों बच रहा है।
Ashish Sinha
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