ओड़गी में वृहद् जागरूकता शिविर: बाल विवाह रोकथाम, महिला सशक्तिकरण और साइबर सुरक्षा पर ग्रामीणों को किया गया प्रेरित
सूरजपुर / ओड़गी: ग्रामीण अंचलों में सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और राज्य व केंद्र सरकार की विभिन्न शासकीय कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से विकासखंड ओड़गी में एक दिवसीय वृहद् जागरूकता शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को वित्तीय साक्षरता, विधिक अधिकारों और सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूक कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था।
शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, पंचायत प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया और साइबर अपराधों से बचने के लिए सतर्कता बरतने की अपील की।
मुख्य बिंदु: सूरजपुर जिला प्रशासन “स्वस्थ महिला, सशक्त परिवार” और “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान के तहत लगातार अंदरूनी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है, जिसमें ओड़गी का यह शिविर मील का पत्थर साबित होगा।
बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप: फरजाना ने दी कानूनी कानूनी प्रावधानों की जानकारी
वित्तीय साक्षरता एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत शिविर को संबोधित करते हुए विधिक विशेषज्ञ फरजाना ने ग्रामीणों को बाल विवाह न करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह मासूम बच्चियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को पूरी तरह अवरुद्ध कर देता है।
फरजाना ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (Child Marriage Prohibition Act) की विस्तृत जानकारी देते हुए इससे होने वाले कानूनी परिणामों और सजा के प्रावधानों से ग्रामीणों को अवगत कराया। उन्होंने कम उम्र की लड़कियों के साथ होने वाले लैंगिक अपराधों (Sexual Offences) पर चिंता व्यक्त की और समाज से इसे छिपाने के बजाय इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
गुड टच और बैड टच के प्रति बच्चों को करें सजग
ग्रामीण माताओं और पिताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों को ‘गुड टच’ (अच्छा स्पर्श) और ‘बैड टच’ (बुरा स्पर्श) के बीच का अंतर समझाना बेहद जरूरी है। यदि बच्चों को घर में ही सुरक्षित माहौल और सही शिक्षा मिलेगी, तो वे किसी भी प्रकार के शोषण या दुर्व्यवहार के खिलाफ तुरंत माता-पिता को सूचित कर सकेंगे।
संकट के समय मददगार: आपातकालीन टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों का प्रसार
शिविर में ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की आपात स्थिति, घरेलू हिंसा, बाल उत्पीड़न या अपराध की सूचना तत्काल प्रशासनिक अमले को देने के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न टोल-फ्री नंबरों की विस्तृत जानकारी दी गई, जो 24 घंटे निशुल्क सेवा प्रदान करते हैं।
| हेल्पलाइन नंबर | सेवा / विभाग का नाम | उद्देश्य और उपयोगिता |
|---|---|---|
| 1098 | चाइल्डलाइन (Childline) | बाल विवाह रोकने, लावारिस या पीड़ित बच्चों की सहायता हेतु। |
| 181 | महिला हेल्पलाइन (Women Helpline) | घरेलू हिंसा, प्रताड़ना और महिलाओं से संबंधित शिकायतों के लिए। |
| 112 | आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) | पुलिस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल इमरजेंसी की एकीकृत त्वरित सेवा। |
| 1930 | राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन | ऑनलाइन धोखाधड़ी, बैंक फ्रॉड या साइबर अपराध की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए। |
इसके साथ ही, कार्यक्रम में घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम और पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी और परामर्श सहायता उपलब्ध कराने वाले ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ की कार्यप्रणाली और सेवाओं के बारे में विस्तार से समझाया गया।
महिला सशक्तिकरण केंद्र की सक्रिय भागीदारी: योजनाओं की दी गई तकनीकी जानकारी
जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र से पहुंचीं जेंडर विशेषज्ञ सलोनी कुजूर एवं पूनम राजवाड़े ने शिविर में महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने वाली राज्य व केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति और उनके लाभ लेने की प्रक्रियाओं को साझा किया:
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना: इसके तहत समाज में कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम और बालिकाओं को समान अधिकार व लैंगिक समानता (Gender Equality) सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
- महतारी वंदन योजना एवं ई-केवाईसी: विवाहित महिलाओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता योजना के सुचारू संचालन हेतु महतारी वंदन ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की तकनीकी जानकारी दी गई।
- प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY): गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य व पोषण में सुधार हेतु दी जाने वाली किस्तों की पात्रता के बारे में बताया गया।
- सुकन्या समृद्धि योजना: बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य और उच्च शिक्षा के लिए बचत खाते खोलने और उसके फायदों पर प्रकाश डाला गया।
इसके अतिरिक्त, जेंडर विशेषज्ञों ने आज के डिजिटल युग में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड को देखते हुए साइबर अपराध (Cyber Crime) के प्रति ग्रामीणों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक ओटीपी (OTP), आधार नंबर या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। डिजिटल वित्तीय लेन-देन करते समय हमेशा सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें। इस दौरान उपस्थित ग्रामीणों के बीच विभिन्न योजनाओं से संबंधित ब्रोशर (Brochures) और प्रचार सामग्रियों का वितरण भी किया गया।
नशा मुक्ति और बालिकाओं की शिक्षा से ही बदलेगा समाज: आरती राजवाड़े
शिविर में आउटरीच कार्यकर्ता आरती राजवाड़े ने ग्रामीण परिवेश में बढ़ती नशे की लत पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने ग्रामीणों को नशा मुक्ति का संकल्प दिलाते हुए कहा कि नशा न केवल स्वास्थ्य को बर्बाद करता है बल्कि हंसते-खेलते परिवारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से तबाह कर देता है। घरेलू हिंसा के पीछे भी नशा एक बड़ा कारण है।
उन्होंने समाज के विकास में बालिकाओं की शिक्षा को अनिवार्य बताते हुए कहा कि एक बेटी को पढ़ाना पूरे परिवार को शिक्षित करने के समान है। शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने के महत्व पर भी उन्होंने विशेष प्रकाश डाला, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
सरपंच और प्रशासनिक अधिकारियों ने किया शंकाओं का समाधान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं स्थानीय सरपंच राम सकल सिंह सहित शिविर में उपस्थित विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं और शासकीय योजनाओं से जुड़ी जिज्ञासाओं का मौके पर ही त्वरित समाधान किया।
सरपंच राम सकल सिंह ने कहा कि ऐसे जागरूकता शिविरों के माध्यम से अंदरूनी क्षेत्रों के ग्रामीणों को अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी मिलती है। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अपने गांव को बाल विवाह मुक्त, अपराध मुक्त और नशा मुक्त बनाने में प्रशासन का सहयोग करें। अधिकारियों ने सभी उपस्थित लोगों को समाज में होने वाले अपराधों की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाने और एक सजग एवं जागरूक नागरिक बनने की शपथ दिलाई।













