आज का इतिहास: 24 जून को क्या हुआ था? रानी दुर्गावती का बलिदान और मेस्सी का जन्म






आज का इतिहास (24 जून): रानी दुर्गावती का बलिदान, मेस्सी का जन्म और प्रमुख वैश्विक घटनाएं

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विशेष इतिहास अपडेट

आज का इतिहास: 24 जून की वे महत्वपूर्ण घटनाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया की रफ्तार

प्रकाशित: 24 जून, 2026 | श्रेणी: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय इतिहास

ग्रेगोरी कैलेंडर के अनुसार 24 जून वर्ष का 175वां दिन है (लीप वर्ष होने पर यह 176वां दिन होता है)। इस वर्ष में अब केवल 190 दिन शेष बचे हैं। इतिहास की दृष्टि से 24 जून का दिन भारत और विश्व के नक्शे पर अत्यंत गहरी छाप छोड़ता है। आज ही के दिन जहां भारतीय मिट्टी ने अपनी एक सबसे जांबाज और बहादुर बेटी ‘महारानी दुर्गावती’ को खोया था, वहीं समकालीन खेल जगत में क्रांति लाने वाले जादुई फुटबॉलर लियोनेल मेस्सी का जन्म भी इसी तारीख को हुआ था। आइए, आज के इस महा-बुलेटिन में हम 24 जून के संपूर्ण और विस्तृत इतिहास का बारीकी से विश्लेषण करते हैं।

“इतिहास केवल राजा-रानियों की कहानियां या तारीखों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के निरंतर संघर्ष, उसकी जीतों, उसकी हारों और उसके क्रमिक विकास का एक जीवंत दस्तावेज है। 24 जून का दिन इसी संघर्ष की एक अनुपम बानगी पेश करता है।”

1. भारत का गौरव: वीरांगना महारानी दुर्गावती का बलिदान (1564)

24 जून 1564 को भारतीय इतिहास की एक ऐसी दुखद और गौरवमयी घटना घटी, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति का एक सर्वोच्च पैमाना स्थापित कर दिया। मध्य प्रदेश के गोंडवाना साम्राज्य की शासक महारानी दुर्गावती ने मुगलों की विशाल सेना के सामने घुटने टेकने के बजाय देश और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए प्राणों का उत्सर्ग कर दिया था।

पृष्ठभूमि और साम्राज्य का कुशल संचालन

महारानी दुर्गावती का जन्म प्रसिद्ध चंदेल राजा कीरत राय के परिवार में हुआ था। उनका विवाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा दलपत शाह से हुआ था। असमय ही पति की मृत्यु हो जाने के बाद, उन्होंने अपने छोटे बेटे वीरनारायण को गद्दी पर बैठाया और खुद गोंडवाना की कमान संभाली। उनके कुशल प्रशासन में राज्य ने बहुत तरक्की की और प्रजा बेहद सुखी थी। उनकी संपन्नता को देखकर मुगल सम्राट अकबर की नजरें इस स्वतंत्र राज्य पर टिक गईं।

आसफ खान का आक्रमण और अंतिम युद्ध

अकबर ने अपने सेनापति आसफ खान को एक विशाल तोपखाने और घुड़सवार सेना के साथ गोंडवाना पर कब्जा करने के लिए भेजा। महारानी दुर्गावती की सेना संख्या में काफी कम थी, लेकिन उनकी कूटनीति और वीरता बेजोड़ थी। उन्होंने जबलपुर के पास नर्रई नाले के किनारे मोर्चा संभाला। युद्ध में रानी ने खुद पुरुष वेश धारण किया और डटकर मुकाबला किया।

युद्ध के आखिरी दिन, जब रानी गंभीर रूप से घायल हो गईं—एक तीर उनकी गर्दन में और दूसरा उनकी आंख में लगा—तो उन्हें आभास हो गया कि अब जीतना असंभव है। मुगलों के हाथों बंदी बनने और अपमानित होने से बचने के लिए, इस बहादुर रानी ने अपनी ही कटार अपनी छाती में घोंप ली और वीरगति प्राप्त की। आज का दिन पूरे देश में उनके “बलिदान दिवस” के रूप में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

2. खेल इतिहास की सबसे बड़ी घटनाएं: टेनिस और फुटबॉल का संयोग

24 जून की तारीख खेल प्रेमियों के लिए बेहद अनूठी है। इस दिन दुनिया ने फुटबॉल के एक ‘भगवान’ को जन्म लेते देखा, तो वहीं टेनिस के इतिहास का सबसे लंबा और थका देने वाला ऐतिहासिक मुकाबला भी इसी दिन समाप्त हुआ था।

लियोनेल मेस्सी का जन्म (1987)

24 जून 1987 को अर्जेंटीना के रोसारियो में एक ऐसे बच्चे का जन्म हुआ, जिसके पैरों में मानो फुटबॉल का जादू छिपा था। नाम रखा गया—लियोनेल एंड्रेस मेस्सी। बचपन में मेस्सी ‘ग्रोथ हार्मोन डेफिशिएंसी’ (विकास हार्मोन की कमी) नामक बीमारी से पीड़ित थे, जिसके इलाज का खर्च उनके परिवार के बजट से बाहर था। लेकिन उनकी प्रतिभा को देखकर बार्सिलोना क्लब ने उनके इलाज की जिम्मेदारी उठाई और उन्हें स्पेन ले आए।

इसके बाद जो हुआ, वह खेल जगत का स्वर्णिम इतिहास है। मेस्सी ने रिकॉर्ड आठ बार ‘बैलन डी’ओर’ (Ballon d’Or) का खिताब जीता। उन्होंने बार्सिलोना को दर्जनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय ट्रॉफियां जिताईं और अंततः साल 2022 में कतर में अर्जेंटीना को फीफा विश्व कप दिलाकर फुटबॉल के सर्वकालिक महान खिलाड़ी (GOAT) के रूप में खुद को स्थापित किया।

टेनिस इतिहास का सबसे लंबा मैच (2010)

साल 2010 में विंबलडन के मैदान पर टेनिस के इतिहास का सबसे लंबा मैच 24 जून को ही खत्म हुआ था। अमेरिका के जॉन इसनर और फ्रांस के निकोला मायू के बीच यह मुकाबला कुल 11 घंटे और 5 मिनट तक चला था।

यह मैच इतना लंबा खिंचा कि इसे तीन दिनों में पूरा करना पड़ा। केवल इस मैच का आखिरी सेट (फिफ्थ सेट) ही 8 घंटे और 11 मिनट तक चला था, जिसमें जॉन इसनर ने 70-68 के स्कोर से जीत हासिल की थी। इस मैच ने टेनिस के कई पुराने नियमों को बदलने पर मजबूर कर दिया।

3. भारतीय विमानन क्षेत्र में क्रांति: HF-24 मारुत की पहली उड़ान (1961)

24 जून 1961 को रक्षा के क्षेत्र में भारत ने आत्मनिर्भरता की ओर एक बहुत बड़ी छलांग लगाई थी। आज ही के दिन भारत के पहले स्वदेशी सुपरसोनिक लड़ाकू विमान हिंदुस्तान फाइटर-24 (HF-24) ‘मारुत’ ने अपनी पहली आधिकारिक और सफल उड़ान भरी थी।

इसका डिजाइन प्रसिद्ध जर्मन इंजीनियर कुर्ट टैंक के नेतृत्व में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा तैयार किया गया था। एशिया में निर्मित होने वाला यह पहला जेट लड़ाकू विमान था। इसने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय वायुसेना की तरफ से बेहद सक्रिय भूमिका निभाई थी और लोंगेवाला की प्रसिद्ध लड़ाई में पाकिस्तानी टैंकों को तबाह करने में अहम योगदान दिया था।

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4. विज्ञान और आधुनिक तकनीक: राष्ट्रीय टेलेक्स सेवा और पिकासो की कला

भारत में राष्ट्रीय टेलेक्स सेवा की शुरुआत (1963)

24 जून 1963 को भारत के डाक एवं टेलीग्राफ विभाग ने देश की पहली राष्ट्रीय टेलेक्स सेवा (National Telex Service) की शुरुआत की थी। यह उस दौर में व्यापार और संचार के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति थी। इसके जरिए लिखित संदेशों को तुरंत एक शहर से दूसरे शहर के प्रिंटर पर भेजा जा सकता था। हालांकि आज के इंटरनेट और स्मार्टफोन के युग में यह तकनीक अप्रचलित हो चुकी है, लेकिन 1960 और 70 के दशक में भारतीय उद्योगों को रफ्तार देने में इसका बहुत बड़ा हाथ था।

पाब्लो पिकासो की पहली कला प्रदर्शनी (1901)

कला की दुनिया में 24 जून 1901 का दिन एक नए युग की शुरुआत माना जाता है। 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली और विख्यात कलाकार पाब्लो पिकासो की पेंटिंग्स की पहली प्रदर्शनी आज ही के दिन पेरिस की एक मशहूर गैलरी में लगाई गई थी। उस समय पिकासो की उम्र महज 18-19 साल थी। हालांकि उस समय आलोचकों ने उनकी कला को ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी, लेकिन आगे चलकर पिकासो की ‘क्यूबिज्म’ शैली ने कला की पूरी परिभाषा को ही बदलकर रख दिया।

5. वैश्विक और ऐतिहासिक घटनाओं का कालक्रम (Timeline)

नीचे दी गई तालिका में 24 जून को देश और दुनिया में घटित हुईं अन्य प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का संक्षिप्त और सटीक विवरण दिया गया है:

वर्ष ऐतिहासिक घटना (भारत एवं विश्व)
1206 दिल्ली सल्तनत के पहले सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक की लाहौर (अब पाकिस्तान) में आधिकारिक ताजपोशी हुई।
1314 बैनकबर्न के युद्ध में रॉबर्ट द ब्रूस के नेतृत्व में स्कॉटिश सेना ने इंग्लैंड के राजा एडवर्ड द्वितीय को हराकर स्कॉटलैंड की स्वतंत्रता की नींव रखी।
1497 प्रसिद्ध इतालवी खोजकर्ता जॉन कैबोट ने उत्तरी अमेरिका (न्यूफ़ाउंडलैंड) की खोज की। ब्रिटिश साम्राज्य के लिए यह ऐतिहासिक खोज थी।
1793 फ्रांसीसी क्रांति के दौरान फ्रांस ने अपने इतिहास में पहली बार ‘रिपब्लिकन संविधान’ (गणतांत्रिक संविधान) को अपनाया।
1812 नेपोलियन बोनापार्ट ने अपनी विशाल ‘ग्रैंड आर्मी’ के साथ नेमन नदी को पार कर रूस पर आक्रमण की शुरुआत की, जो आगे चलकर उसकी तबाही का कारण बना।
1844 चार्ल्स गुडइयर को वल्केनाइज्ड रबर (Vulcanized Rubber) के आविष्कार के लिए अमेरिकी पेटेंट मिला, जिसने ऑटोमोबाइल टायर उद्योग को जन्म दिया।
1938 क्रिकेट के इतिहास में पहली बार किसी मैच का टेलीविजन पर सीधा प्रसारण (Live Telecast) बीबीसी द्वारा इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान किया गया।
1947 अमेरिकी व्यवसायी केनेथ अर्नोल्ड ने वाशिंगटन के माउंट रेनियर के पास पहली बार उड़न तश्तरी (UFO) देखने का दावा किया, जिससे दुनिया भर में यूएफओ की चर्चाएं शुरू हुईं।
1948 शीत युद्ध के शुरुआती दौर में सोवियत संघ ने पश्चिमी शक्तियों के खिलाफ ‘बर्लिन की नाकेबंदी’ (Berlin Blockade) शुरू कर दी, जिसके बाद ऐतिहासिक बर्लिन एयरलिफ्ट की शुरुआत हुई।
1974 भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक काला दिन, जब लॉर्ड्स टेस्ट की दूसरी पारी में पूरी भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ मात्र 42 रनों पर सिमट गई थी।
2002 अफ्रीका महाद्वीप के इतिहास की सबसे भीषण रेल दुर्घटना तंजानिया के मसागाली में हुई, जिसमें ब्रेक फेल होने के कारण ट्रेन पीछे लुढ़क गई और 281 लोगों की जान चली गई।
2006 फिलीपींस ने मानवाधिकारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने देश में मौत की सजा (Capital Punishment) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया।

6. 24 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्तित्व

आज की तारीख ने दुनिया को कई ऐसी महान विभूतियां दी हैं, जिन्होंने राजनीति, संगीत, साहित्य और खेल में भारत और विश्व का नाम रोशन किया:

  • 1863: विश्वनाथ काशीनाथ राजवाड़े – भारत के अत्यंत प्रसिद्ध इतिहासकार, लेखक, महान वक्ता और विद्वान, जिन्होंने मराठा इतिहास के संकलन में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
  • 1869: दामोदर हरी चापेकर – भारत के महान क्रांतिकारी अमर शहीदों में से एक (चापेकर बंधुओं में से एक), जिन्होंने अत्याचारी ब्रिटिश प्लेग कमिश्नर रैंड की हत्या कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की मशाल जलाई थी।
  • 1885: मास्टर तारा सिंह – भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और सिख नेता, जिन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और स्वतंत्रता आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाई थी।
  • 1897: पंडित ओंकारनाथ ठाकुर – भारत के विख्यात शिक्षाशास्त्री, संगीतज्ञ और शास्त्रीय गायक, जिन्हें संगीत जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए जाना जाता है।
  • 1937: जगन्नाथ मिश्रा – भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता, जो तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे।
  • 1937: अनीता देसाई – अंग्रेजी साहित्य की प्रख्यात भारतीय लेखिका, जिन्हें कई बार बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया।

7. 24 जून को हुए प्रमुख निधन

आज ही के दिन कई ऐसे महान सितारे और देशभक्त हमसे हमेशा के लिए जुदा हो गए, जिनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता:

  • 1564: रानी दुर्गावती – गोंडवाना की महान शासक और अमर वीरांगना (मुगलों से लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान)।
  • 1881: पंडित श्रद्धाराम शर्मा – भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार और सबसे महत्वपूर्ण बात—दुनिया भर के हिंदू घरों में गाई जाने वाली प्रसिद्ध आरती ‘ओम जय जगदीश हरे’ के मूल रचयिता।
  • 1950: दरबान सिंह नेगी – प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में सेवा करते हुए अदम्य साहस दिखाने वाले शुरुआती भारतीय सैनिकों में से एक, जिन्हें ब्रिटेन का सर्वोच्च युद्ध सम्मान ‘विक्टोरिया क्रॉस’ मिला था।
  • 1980: वी. वी. गिरी (वराहगिरि वेंकट गिरि) – भारत के चौथे राष्ट्रपति। वे एक प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी, श्रमिक नेता और अद्वितीय राजनीतिज्ञ थे, जिन्हें 1975 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया था।

संक्षेप में कहें तो, 24 जून का इतिहास संघर्ष, नवप्रवर्तन, कलात्मक अभिव्यक्ति और अदम्य खेल भावना का एक अनूठा संगम है। जहां एक ओर यह दिन हमें रानी दुर्गावती और दामोदर हरी चापेकर जैसे नायकों के बलिदानों की याद दिलाकर हमारी रगों में देशभक्ति का संचार करता है, वहीं लियोनेल मेस्सी जैसे लिविंग लेजेंड्स की सफलता की कहानी से हमें यह सीख देता है कि शारीरिक और विपरीत परिस्थितियों से लड़कर भी दुनिया के शिखर पर पहुंचा जा सकता है। इतिहास का यही सबक हमें वर्तमान को बेहतर ढंग से जीने और भविष्य को संवारने की प्रेरणा देता है।

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