कांकेर: ऐतिहासिक प्रैक्टिसिंग स्कूल के 100 वर्ष पूर्ण, 4 जुलाई को आयोजित होगा भव्य ‘शताब्दी समागम समारोह’, पालिका सभाकक्ष में पूर्व छात्रों की बैठक संपन्न
कांकेर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। नगर के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थान ‘प्रैक्टिसिंग स्कूल’ ने अपनी स्थापना के गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अवसर को यादगार बनाने के लिए विद्यालय के भूतपूर्व छात्रों द्वारा आगामी 4 जुलाई को एक विशाल और भव्य ‘शताब्दी समागम समारोह’ का आयोजन किया जा रहा है। इस महा-आयोजन को अत्यंत गरिमापूर्ण, व्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाने के उद्देश्य से पूर्व छात्रों की एक महत्वपूर्ण और निर्णायक समीक्षा बैठक नगर पालिका परिषद कांकेर के सभा कक्ष में आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पूर्व छात्र और आयोजन समिति के प्रमुख अरुण कौशिक ने की। इस विशेष बैठक में बड़ी संख्या में विभिन्न दशकों के उत्तीर्ण पूर्व छात्र, प्रबुद्ध नागरिक, नगर के गणमान्य व्यक्ति और शिक्षाविद् उपस्थित रहे। बैठक में काफी लंबे विचार-विमर्श और मंथन के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पिछली बैठकों में लिए गए प्रस्तावों और निर्णयों के अनुसार ही 4 जुलाई को होने वाले मुख्य समारोह की रूपरेखा तय की जाएगी। इसके साथ ही, बचे हुए गिने-चुने दिनों में तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन कर जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
मुख्य बिंदु: नगर पालिका परिषद के सभाकक्ष में वरिष्ठ पूर्व छात्र अरुण कौशिक की अध्यक्षता में संपन्न हुई उच्च स्तरीय बैठक; देश-विदेश में ऊंचे पदों पर आसीन पूर्व छात्रों के आगमन को लेकर रूट मैप तैयार; 4 जुलाई को कांकेर की सड़कों पर दिखेगा यादों का कारवां।
अरुण कौशिक की अध्यक्षता में रणनीति तैयार, पूर्व के निर्णयों पर लगी अंतिम मुहर
नगर पालिका परिषद के सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक का माहौल अत्यंत उत्साहजनक और भावुकता से भरा रहा। बैठक की शुरुआत में अध्यक्ष अरुण कौशिक ने अब तक की तैयारियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि 100 साल की यात्रा किसी भी संस्थान के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। इस स्कूल से पढ़कर निकले छात्रों ने न केवल कांकेर और छत्तीसगढ़, बल्कि देश और दुनिया के कोने-कोने में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ऐसे में हम सभी पूर्व छात्रों का यह नैतिक कर्तव्य है कि हम अपनी मातृसंस्था के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए इस ‘शताब्दी समागम’ को एक महोत्सव के रूप में मनाएं।
बैठक में उपस्थित पूर्व छात्रों ने एक-एक कर अपने विचार रखे और पूर्व में लिए गए निर्णयों की समीक्षा की। सर्वसम्मति से तय हुआ कि 4 जुलाई को आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का फेरबदल नहीं किया जाएगा और पूर्व निर्धारित एजेंडे के अनुसार ही सभी कार्यक्रम क्रमबद्ध तरीके से संचालित होंगे। बैठक में वित्त प्रबंधन, अतिथि सत्कार, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्मृति चिह्न वितरण, प्रचार-प्रसार और भोजन व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए अलग-अलग उप-समितियों की घोषणा की गई, ताकि अंतिम समय में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
प्रैक्टिसिंग स्कूल का 100 वर्षीय गौरवशाली इतिहास: बस्तर में शिक्षा का आलोक
कांकेर का प्रैक्टिसिंग स्कूल महज एक भवन या सरकारी संस्थान नहीं है, बल्कि यह उत्तर बस्तर की ज्ञान परंपरा का उद्गम स्थल है। आज से ठीक एक सदी पहले, जब बस्तर अंचल में शिक्षा के संसाधन बेहद सीमित थे, तब इस स्कूल की स्थापना की गई थी। शुरुआत में यह स्कूल बुनियादी स्तर पर शिक्षकों के प्रशिक्षण (प्रैक्टिस) के लिए एक मॉडल स्कूल के रूप में शुरू हुआ था, जिसके कारण इसका नाम ‘प्रैक्टिसिंग स्कूल’ पड़ा। दशक दर दशक बीतने के साथ यह स्कूल उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र बनता गया।
इस स्कूल की दीवारों में कांकेर के इतिहास की गूंज है। यहाँ से निकले छात्रों ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), राज्य प्रशासनिक सेवा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, राजनीति, साहित्य, कला और खेलकूद के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किए हैं। शताब्दी समागम के माध्यम से स्कूल की इसी गौरवगाथा को वर्तमान पीढ़ी के सामने प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आने वाले बच्चे भी इस समृद्ध विरासत से प्रेरणा ले सकें।
4 जुलाई को होने वाले मुख्य कार्यक्रमों की प्रस्तावित रूपरेखा
बैठक में 4 जुलाई को आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा को सर्वसम्मति से अंतिम रूप दिया गया। आयोजन समिति से मिली जानकारी के अनुसार, शताब्दी समागम समारोह केवल एक दिन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि यह यादों, सम्मान और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक अनूठा संगम होगा। दिनभर चलने वाले आयोजनों की रूपरेखा कुछ इस प्रकार तय की गई है:
- शताब्दी गौरव रैली (सुबह 08:00 बजे): समारोह की शुरुआत सुबह एक भव्य गौरव रैली के साथ होगी। इस रैली में स्कूल के सबसे बुजुर्ग पूर्व छात्रों से लेकर वर्तमान पीढ़ी के छात्र शामिल होंगे। यह रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरेगी, जिसमें कांकेर की पारंपरिक लोक कला और वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन भी शामिल होगा।
- मातृसंस्था वंदन और वृक्षारोपण (सुबह 10:30 बजे): रैली के विद्यालय परिसर पहुंचने के बाद सभी पूर्व छात्र अपनी मातृसंस्था की मिट्टी को नमन करेंगे। इस अवसर पर स्मृति स्वरूप 100 फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया जाएगा, जो विद्यालय के 100 वर्षों के प्रतीक होंगे।
- मुख्य अकादमिक और सम्मान समारोह (दोपहर 12:00 बजे से): मुख्य मंच पर आयोजित होने वाले इस सत्र में उन सेवानिवृत्त शिक्षकों (गुरुजनों) का पाद-प्रक्षालन कर सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इस स्कूल को संवारने में लगा दी। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे पूर्व छात्रों को ‘शताब्दी गौरव सम्मान’ से नवाजा जाएगा।
- स्मृति व्याख्यान और परिचर्चा (दोपहर 03:00 बजे): ‘बस्तर में शिक्षा के 100 वर्ष और प्रैक्टिसिंग स्कूल की भूमिका’ विषय पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ शिक्षाविद् अपने विचार साझा करेंगे।
- सांस्कृतिक संध्या ‘यादों के झरोखे से’ (शाम 06:00 बजे से): शाम को एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें बस्तर की पारंपरिक बस्तरिया संस्कृति, लोक नृत्य (ककसाड़, मांदरी) और पूर्व छात्रों द्वारा तैयार किए गए विशेष नाटक व गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी।
देश-विदेश से जुटेंगे पूर्व छात्र, सोशल मीडिया पर चल रहा महा-अभियान
इस शताब्दी समागम की सबसे खास बात यह है कि इसमें शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता के अलावा विदेशों में रह रहे पूर्व छात्र भी कांकेर पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति ने एक विशेष डिजिटल रजिस्ट्रेशन पोर्टल भी तैयार किया है, जिसके माध्यम से अब तक हजारों पूर्व छात्रों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है। व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ‘प्रैक्टिसिंग स्कूल शताब्दी समागम’ नाम से चलाए जा रहे अभियानों ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया है, जिससे हर दिन नए लोग इस मुहिम से जुड़ रहे हैं।
बैठक के दौरान अरुण कौशिक ने बताया कि कई ऐसे पूर्व छात्र भी आ रहे हैं, जो आज से 50 या 60 साल पहले इस स्कूल से पास आउट हुए थे। उनके स्वागत के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने नगर के सभी नागरिकों और अन्य संगठनों से भी अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन में अतिथि देवो भव: की परंपरा का निर्वहन करते हुए बाहर से आने वाले अतिथियों का स्वागत करें।
स्मारिका ‘शताब्दी दर्पण’ का होगा विमोचन, सहेजा जा रहा है 100 साल का सफर
इस ऐतिहासिक अवसर को चिरस्थायी बनाने के लिए आयोजन समिति द्वारा एक विशेष स्मारिका (स्मृति ग्रंथ) का प्रकाशन किया जा रहा है, जिसका नाम ‘शताब्दी दर्पण’ रखा गया है। इस स्मारिका में स्कूल के 100 वर्षों के इतिहास, पुराने दुर्लभ चित्रों, पूर्व शिक्षकों के संस्मरणों और पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की कहानियों को संकलित किया जा रहा है।
बैठक में स्मारिका समिति के सदस्यों ने बताया कि संकलन का कार्य अंतिम चरण में है। इस स्मारिका में स्कूल के उन ऐतिहासिक फैसलों और दौर का भी जिक्र होगा, जब इस क्षेत्र में परिवहन और संचार के साधन नहीं थे, तब इस स्कूल ने कैसे सुदूर वनांचल के बच्चों को शिक्षित कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा। इस स्मारिका का विमोचन 4 जुलाई को मुख्य समारोह के दौरान अतिथियों के कर-कमलों द्वारा किया जाएगा।
नगर पालिका परिषद सभाकक्ष की बैठक में ये रहे उपस्थित
नगर पालिका परिषद के सभा कक्ष में आयोजित इस अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में कांकेर के प्रबुद्ध जनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बैठक में प्रमुख रूप से वरिष्ठ पूर्व छात्र, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि यह आयोजन किसी एक राजनैतिक दल, जाति या वर्ग का नहीं है, बल्कि यह पूरे कांकेर नगर का गौरव है। इसलिए दलगत राजनीति और निजी व्यस्तताओं से ऊपर उठकर हर व्यक्ति इस आयोजन को सफल बनाने के लिए अपना श्रम और समय दान करेगा।
तैयारियों को लेकर पूर्व छात्रों में अभूतपूर्व उत्साह
जैसे-जैसे 4 जुलाई की तारीख नजदीक आ रही है, कांकेर नगर में उत्साह का माहौल गहराता जा रहा है। प्रैक्टिसिंग स्कूल के वर्तमान भवन को भी आकर्षक ढंग से सजाने की योजना बनाई गई है। पूरे स्कूल परिसर को रोशनी से जगमगाया जाएगा। पूर्व छात्रों का कहना है कि यह समागम सिर्फ एक मुलाकात का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी उस जड़ों की ओर लौटने का सफर है, जिसने हमें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। बैठक के अंत में अध्यक्ष अरुण कौशिक ने सभी उपस्थित पूर्व छात्रों का आभार व्यक्त किया और पूरी ऊर्जा के साथ अगले कुछ दिनों तक तैयारियों में जुट जाने का आह्वान किया।
शताब्दी समागम समारोह 2026: एक नज़र में
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| संस्थान का नाम | प्रैक्टिसिंग स्कूल, कांकेर (उत्तर बस्तर) |
| ऐतिहासिक अवसर | स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण (शताब्दी वर्ष) |
| मुख्य समारोह तिथि | 4 जुलाई 2026 |
| बैठक का स्थान | नगर पालिका परिषद सभाकक्ष, कांकेर |
| आयोजन समिति अध्यक्ष | अरुण कौशिक (वरिष्ठ पूर्व छात्र) |
| मुख्य आकर्षण | गौरव रैली, गुरुजन सम्मान, सांस्कृतिक संध्या, स्मारिका विमोचन |














