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छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन की बड़ी पहल: संस्कृति, शिक्षा और स्वास्थ्य के संरक्षण पर भिलाई में वैचारिक मंथन





विशेष समाचार रिपोर्ट: संस्कृति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर भव्य प्रादेशिक संगोष्ठी


विशेष प्रादेशिक महा-संगोष्ठी समीक्षा रिपोर्ट

संस्कृति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के त्रिवेणी संगम पर व्यापक वैचारिक मंथन

आयोजन स्थल: भिलाई निवास, इंडियन कॉफी हाउस, भिलाई (छत्तीसगढ़)
मुख्य आयोजक: छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन

भिलाई। छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन के तत्वावधान में प्रादेशिक स्तर पर एक ऐतिहासिक और वैचारिक महा-संगोष्ठी का भव्य आयोजन भिलाई निवास स्थित इंडियन कॉफी हाउस के सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य समकालीन समाज में ‘संस्कृति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य’ की वर्तमान स्थिति, उनकी चुनौतियाँ तथा उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में उनकी अपरिहार्य भूमिका पर एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना था। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने समाज को नई दिशा देने का महती कार्य किया है।

इस वृहद वैचारिक महा-मंथन की रूपरेखा छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन अधिकारी कर्मचारी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भानु प्रताप यादव, बीएसपी अधिकारी कर्मचारी प्रकोष्ठ भिलाई के अध्यक्ष विजय कुमार रात्रे तथा संगठन के भिलाई जिलाध्यक्ष चंदू लाल मरकाम के संयुक्त, सुनियोजित एवं अथक प्रयासों से तैयार की गई थी। इस त्रिमूर्ति के कुशल रणनीतिक संयोजन के कारण ही छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से प्रबुद्ध जन, सामाजिक चिंतक, नीति निर्माता और प्रख्यात विषय विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्रित होने में सफल रहे। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन ने यह सिद्ध कर दिया कि वैचारिक प्रतिबद्धता और सुदृढ़ संगठनात्मक ढांचा किसी भी सामाजिक चेतना के अभियान को एक नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है।

सत्र की अध्यक्षता एवं विशिष्ट मार्गदर्शन

सत्र के प्रथम चरण की शुरुआत विधिवत गरिमामयी परंपराओं के साथ हुई। इस संगोष्ठी कार्यक्रम की गरिमामयी अध्यक्षता छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष संतकुमार केसकर ने की। उन्होंने अपने गहन सामाजिक अनुभवों और संगठनात्मक सूझबूझ के माध्यम से संपूर्ण सत्र के दौरान वैचारिक विमर्श को एक रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण दिशा प्रदान की। उनके अध्यक्षीय संबोधन ने उपस्थित जनसमूह में वैचारिक चेतना का संचार किया और समाज के सामूहिक दायित्वों को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉक्टर डी0पी0 देशमुख उपस्थित थे। उन्होंने मीडिया, संचार और सामाजिक जागरूकता के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सकारात्मक संदेश पहुंचाने के लिए ऐसे बौद्धिक विमर्शों को जन-आंदोलन का रूप दिया जाना अत्यंत आवश्यक है। वैचारिक चेतना की लौ को घर-घर तक पहुंचाने के लिए आधुनिक और पारंपरिक संचार माध्यमों का संतुलित उपयोग अपरिहार्य है।

मुख्य संगठनात्मक संदेश
“हमारे महापुरुषों और पूर्वजों द्वारा स्थापित किए गए उच्च आदर्श, मानवीय मूल्य और लोक कल्याणकारी आचार-विचार, जिन्हें हम अपनी दैनिक दिनचर्या और सामाजिक व्यवहार में आत्मसात करने लगते हैं, वही कालांतर में समाज के भीतर एक सुदृढ़ और अक्षुण्ण संस्कृति के रूप में स्थापित हो जाते हैं। वास्तविक रूप में संस्कृति हमारी समग्र जीवन शैली, हमारे चिंतन की गहराई और हमारी सामाजिक पहचान को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करती है।”
— संतकुमार केसकर, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष

विषय विशेषज्ञों का प्राधिकृत व्याख्यान एवं मंथन

संगोष्ठी के द्वितीय तकनीकी सत्र में समाज के तीन अत्यंत संवेदनशील और बुनियादी स्तंभों—संस्कृति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य—पर देश और प्रदेश के जाने-माने विषय विशेषज्ञों ने अपनी ज्ञानवर्धक और व्यावहारिक प्रस्तुतियां दीं। इन विशेषज्ञों ने न केवल सैद्धांतिक पक्षों को उजागर किया बल्कि धरातल पर क्रियान्वित की जाने वाली रणनीतियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

१. छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति: पवित्रता, सरलता और शालीनता का जीवंत प्रतीक

प्रख्यात संस्कृतिविद और मुख्य वक्ता डॉक्टर कृष्ण कुमार पाटिल ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मूल आत्मा पर एक अत्यंत प्रभावशाली, मर्मस्पर्शी और तार्किक उद्बोधन दिया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए बताया कि हमारी छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति कितनी पवित्र, सरल, सहज, आडंबरहीन और पारस्परिक सम्मान की भावना से ओत-प्रोत है। यह एक ऐसी माटी है जहां ‘जौहार’ और ‘राम-राम’ केवल शब्द नहीं बल्कि आत्मा का जुड़ाव हैं।

डॉक्टर पाटिल ने आधुनिक दौर में संस्कृति के नाम पर परोसी जा रही विकृतियों के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में आगाह किया कि वर्तमान समय में गीत, संगीत, कला, नृत्य और लोक विधाओं के नाम पर फैल रही फूहड़ता, अश्लीलता और व्यावसायिक अवसरवादिता से हमें अपनी नई पीढ़ी को हर हाल में बचाना होगा। संस्कृति के संरक्षण का अर्थ उसकी मौलिकता और नैतिक गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखना है, न कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में उसके मूल स्वरूप को नष्ट करना।

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२. समकालीन शिक्षा पद्धति: साक्षरता बनाम नैतिक मूल्य और संस्कार

शिक्षाविद डॉक्टर श्रीमती नीतू साहू ने वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य, उपाधियों की होड़ और वास्तविक ज्ञान के अंतर्संबंधों पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने अत्यंत प्रासंगिक और व्यावहारिक विश्लेषण करते हुए कहा कि वर्तमान समाज में हम तकनीकी रूप से शिक्षित तो हो रहे हैं, बड़ी-बड़ी डिग्रियां और बौद्धिक चातुर्य भी प्राप्त कर रहे हैं, परंतु विडंबना यह है कि हम वास्तविक मानवीय मूल्य, सामाजिक संवेदनशीलता और पारंपरिक संस्कार खोते जा रहे हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी शिक्षा जो मनुष्य को संवेदनशील, समाजोपयोगी और चरित्रवान न बना सके, वह अधूरी है। अतः वर्तमान समय की यह महती आवश्यकता है कि हमें आधुनिक तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक उत्तरदायित्वों के समन्वय पर विशेष ध्यान देना होगा। शिक्षा का अंतिम लक्ष्य केवल जीविकोपार्जन नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ और विवेकशील मनुष्य का निर्माण होना चाहिए।

३. आधुनिक स्वास्थ्य प्रबंधन: स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का शाश्वत निवास

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर कामता साहू ने मानव जीवन की सबसे अमूल्य संपदा ‘स्वास्थ्य’ पर अपना समग्र वैज्ञानिक और व्यावहारिक उद्बोधन दिया। उन्होंने प्राचीन सूक्ति को दोहराते हुए कहा कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास करता है, और यदि मन तथा तन दोनों स्वस्थ होंगे तो ही एक स्वस्थ, ऊर्जावान और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव हो सकेगा। बिना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के किसी भी प्रकार की आर्थिक या सामाजिक उन्नति बेमानी है।

डॉक्टर साहू ने दैनिक जीवन शैली में सुधार के लिए अत्यंत सरल किंतु अत्यंत प्रभावशाली उपाय सुझाए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आग्रह किया कि वे अपने व्यस्ततम जीवन से समय निकालकर प्रातःकाल नियमित भ्रमण (टहलना), योगासन, प्राणायाम और ध्यान को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएं। इसके साथ ही उन्होंने आधुनिक युग की सबसे बड़ी समस्या—फास्ट फूड, अत्यधिक तैलीय व प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और अनियमित खानपान की आदतों—से कड़ाई से परहेज करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सामाजिक समरसता एवं एकता की रणनीतिक आवश्यकता

संगोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए प्रादेशिक मीडिया प्रभारी डॉक्टर डी. पी. देशमुख ने अपने सारगर्भित और ऊर्जावान उद्बोधन में इस बात पर गहरा संतोष व्यक्त किया कि इस आयोजन के लिए संस्कृति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे सर्वव्यापी और बुनियादी विषयों को चुना गया। उन्होंने कहा कि ये तीनों विषय किसी एक व्यक्ति, जाति या वर्ग के नहीं हैं, बल्कि ये संपूर्ण मानव समाज के कल्याण और उत्थान से सीधे जुड़े हुए हैं।

उन्होंने रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारा परम लक्ष्य अपने लोगों के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रसार करना, समाज में पूर्ण समानता स्थापित करना, नकारात्मकता को त्यागकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना तथा प्रत्येक स्तर पर सामाजिक न्याय को मजबूती से लागू करना होना चाहिए। हमें संकीर्ण आपसी भेदभावों, जातिगत या क्षेत्रीय संकीर्णताओं को पूरी तरह से त्यागकर सामूहिक रूप से पारस्परिक सहयोग, बंधुत्व और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना को निरंतर विकसित करना होगा। यही छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन का मूल ध्येय होना चाहिए, क्योंकि तभी हम छत्तीसगढ़ियों के बीच एक अटूट, स्वस्थ, प्रगतिशील और सुदृढ़ सामाजिक एकता की स्थापना कर पाने में सफल हो सकेंगे।

जन-भागीदारी एवं जीवंत फीडबैक सत्र

इस महा-संगोष्ठी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लोकतांत्रिक और सहभागी प्रकृति रही। मुख्य व्याख्यानों के समापन के पश्चात सभागार में उपस्थित सुधि श्रोताओं, प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित किया गया। इस जीवंत फीडबैक सत्र में उपस्थित लोगों ने न केवल व्याख्यानों पर अपनी सहमति जताई, बल्कि धरातल पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को भी साझा किया।

श्रोताओं की ओर से कई अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी सुझाव प्राप्त हुए, जिनमें ग्रामीण अंचलों में मोबाइल स्वास्थ्य वैन चलाने, सरकारी स्कूलों में लोक संस्कृति और नैतिक मूल्यों की अनिवार्य कक्षाएं संचालित करने तथा युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए सामुदायिक खेल-कूद गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे बिंदु शामिल थे। संगठन के नेतृत्व ने इन सभी सुझावों को गंभीरता से नोट किया और भविष्य की कार्ययोजना में शामिल करने का आश्वासन दिया।

संगोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्ध जनों एवं गणमान्य नागरिकों की सूची

इस वैचारिक महा-संगोष्ठी में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और संगठन के निष्ठावान पदाधिकारियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों के नाम निम्नलिखित हैं:

संत कुमार केसकर
डॉ डी पी देशमुख
डॉ के के पाटील
डॉ कामता साहू
डॉ नीतू साहू
अनुरूप साहू
अनिल कुमार खेलवार
भानु प्रताप यादव
भोज राम डड़सेना
बेनीराम बघेल
गैंदलाल राय
छत्तर राम साहू
वेद प्रकाश सूर्यवंशी
राकेश कुमार साहू
घनश्याम कुमार देवांगन
चंदूलाल मरकाम
जीवन सिन्हा
प्रेमलाल सिन्हा
तामेश्वर देवांगन
विनोद कुमार खेलवार
मधुर लाल देवांगन
लक्ष्मण सिंह साहू
सी एल जोशी
संत ज्ञानेश्वर गायकवाड
वेद प्रकाश पटेल
कालिदास बघेल
हिवेंद्र कुमार साहू
सुखदेव कुमार साहू
श्रीमती जयंती साहू
हेमंत सिन्हा
डोमेन्द्र सिन्हा
गायत्री सिन्हा
प्रदीप कश्यप

…तथा इनके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन के अन्य सैकड़ों समर्पित सदस्य, प्रबुद्ध नागरिक, महिला शक्ति और युवा प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

सफल संचालन एवं बैकस्टेज प्रबंधन

इस संपूर्ण वृहद कार्यक्रम का अत्यंत कुशल, सुगठित, सारगर्भित और प्रभावी मंच संचालन बीएसपी अधिकारी कर्मचारी प्रकोष्ठ भिलाई के अध्यक्ष विजय कुमार रात्रे द्वारा किया गया। उनकी अनूठी वाकपटुता, गंभीर शायरी और सटीक संदर्भों ने पूरे सत्र के दौरान श्रोताओं को बांधे रखा। इसके साथ ही, पर्दे के पीछे रहकर इस जटिल और बड़े आयोजन की व्यवस्थाओं को त्रुटिहीन बनाने, अतिथियों के सत्कार और व्यवस्था प्रबंधन को सुचारू रूप से संचालित कर कार्यक्रम को पूर्णतः सफल बनाने में अनिल कुमार खेलवार, वेद प्रकाश सूर्यवंशी तथा बेनीराम बघेल ने अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण, सराहनीय एवं अहम भूमिका निभाई।


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