बलरामपुर: राजपुर CHC में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; भोजन घोटाले और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच हटाए गए बीएमओ डॉ. रमेश जायसवाल, डॉ. दीपक गुप्ता को मिला प्रभार






बलरामपुर: राजपुर CHC में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; भोजन घोटाले और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच हटाए गए बीएमओ डॉ. रमेश जायसवाल, डॉ. दीपक गुप्ता को मिला प्रभार

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बलरामपुर: राजपुर CHC में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; भोजन घोटाले और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच हटाए गए बीएमओ डॉ. रमेश जायसवाल, डॉ. दीपक गुप्ता को मिला नया प्रभार

विशेष रिपोर्ट: बलरामपुर-रामानुजगंज ब्यूरो | दिनांक: 24 जून 2026 | श्रेणी: छत्तीसगढ़ प्रशासनिक हलचल / स्वास्थ्य विभाग घोटाला
बड़ी खबर: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) राजपुर में वित्तीय अनियमितताओं, भोजन घोटाले और कमीशनखोरी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। कलेक्टर महोदया के अनुमोदन पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने आदेश जारी कर तत्कालीन प्रभारी बीएमओ डॉ. रमेश कुमार जायसवाल को पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर डॉ. दीपक कुमार गुप्ता को राजपुर का नया प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया है।

बलरामपुर-रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य महकमे से इस वक्त की एक बहुत बड़ी प्रशासनिक और खोजी खबर सामने आ रही है। जिला बलरामपुर-रामानुजगंज के अंतर्गत आने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजपुर (CHC Rajpur) में पिछले लंबे समय से चल रहे कथित ‘भोजन घोटाले’, भारी वित्तीय अनियमितताओं और कमीशनखोरी के गंभीर आरोपों के बाद आखिरकार प्रशासन का चाबुक चल गया है। लगातार उठ रहे सवालों और कर्मचारियों द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को सौंपे गए शिकायती पत्र के बाद, राजपुर के प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. रमेश कुमार जायसवाल को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया है।

कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बलरामपुर द्वारा जारी आधिकारिक आदेश क्रमांक क्र./1486/स्थापना/2026 दिनांक 24/06/2026 के अनुसार, प्रशासनिक कारणों को दृष्टिगत रखते हुए व्यवस्था में यह फेरबदल किया गया है। हटाए गए डॉ. रमेश कुमार जायसवाल को उनके मूल पदस्थापना स्थल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) रेवतपुर में कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में ही पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक कुमार गुप्ता को आगामी आदेश तक राजपुर का नया प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) नियुक्त करते हुए उन्हें आहरण-संवितरण (DDO) का अधिकार भी सौंप दिया गया है।


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में भोजन घोटाले का भंडाफोड़: क्या है पूरा मामला?

यह पूरी कार्रवाई महज एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजपुर अस्पताल में पिछले कई महीनों से सुलग रहा असंतोष और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। दरअसल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन, नाश्ते और पथ्य आहार व्यवस्था में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही थीं।

अस्पताल से जुड़े सूत्रों और जागरूक कर्मचारियों द्वारा सीएमएचओ को सौंपे गए गोपनीय शिकायती पत्र में इस बात का बकायदा उल्लेख किया गया था कि मरीजों के नाम पर आने वाले सरकारी फंड का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। कागजों में मरीजों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा था और धरातल पर मरीजों को अत्यंत घटिया और स्तरहीन भोजन परोसा जा रहा था। इस पूरे खेल में ‘कमिशनखोरी’ का एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसमें तत्कालीन प्रबंधन की भूमिका पर सीधे तौर पर उंगली उठाई गई थी।

कर्मचारी के शिकायती पत्र ने खोली पोल, कार्यप्रणाली पर खड़े हुए थे गंभीर सवाल

बताया जा रहा है कि अस्पताल के ही एक जागरूक कर्मचारी ने हिम्मत दिखाते हुए तत्कालीन बीएमओ डॉ. रमेश कुमार जायसवाल की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कर्मचारी ने प्रमाणों के साथ सीएमएचओ बलरामपुर को एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा था। इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि:

  • मरीजों के भोजन बजट में से एक निश्चित हिस्सा (कमीशन) सीधे तौर पर अधिकारियों की जेब में जा रहा था।
  • अस्पताल के स्थानीय क्रय और रखरखाव फंड में भी भारी वित्तीय विसंगतियां थीं।
  • कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और मनमाने ढंग से प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा था, जिससे अस्पताल का कार्य वातावरण पूरी तरह दूषित हो चुका था।
“अस्पताल में भर्ती होने वाले गरीब मरीजों के भोजन की थाली में डाका डाला जा रहा था। डाइट चार्ट के नियमों को ताक पर रखकर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही थी। जब इसकी आवाज उठाने की कोशिश की गई, तो स्थानीय स्तर पर उसे दबाने का प्रयास हुआ, लेकिन अंततः मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंच ही गया।”
– नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के एक स्टाफ ने बताया।

कलेक्टर महोदया की हरी झंडी के बाद CMHO का तत्काल एक्शन

जैसे ही यह मामला बलरामपुर की नवपदस्थ कलेक्टर महोदया के संज्ञान में आया, उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए इस पर त्वरित जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर महोदया के अनुमोदन के बाद, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बलरामपुर ने बिना समय गंवाए 24 जून 2026 को आदेश जारी कर दिया।

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आदेश की मुख्य बातें (Order Highlights):

सीएमएचओ कार्यालय द्वारा जारी आदेश के पृष्ठ क्रमांक पृ.क्र./1487/स्थापना/2026 में स्पष्ट रूप से दो महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं जो इस प्रकार हैं:

1. डॉ. दीपक कुमार गुप्ता की नई जिम्मेदारी: डॉ. दीपक कुमार गुप्ता, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर को प्रशासनिक कारणों से कार्यों के सुचारू संचालन हेतु आगामी आदेश पर्यन्त प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) नियुक्त किया जाता है। साथ ही उन्हें वित्तीय लेन-देन के लिए ‘आहरण संवितरण अधिकारी’ (DDO) घोषित किया जाता है। उन्हें तत्काल प्रभाव से डॉ. रमेश कुमार जायसवाल से समस्त प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है।

2. डॉ. रमेश कुमार जायसवाल को मूल पदस्थापना पर वापसी: तत्कालीन प्रभारी बीएमओ डॉ. रमेश कुमार जायसवाल को निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल खंड चिकित्सा अधिकारी राजपुर का समस्त वित्तीय और प्रशासनिक प्रभार डॉ. दीपक कुमार गुप्ता को सौंपें और अपने मूल पदस्थापना स्थल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतपुर में जाकर अपनी सेवाएं सुनिश्चित करें।


क्या बीएमओ के हटने से थमेगी कमीशनखोरी? क्षेत्र की जनता में कौतूहल

राजपुर क्षेत्र की जनता और मरीजों के परिजनों में इस कार्रवाई के बाद एक नई उम्मीद जागी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र न केवल राजपुर बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के गरीब आदिवासियों के लिए एकमात्र इलाज का सहारा है। ऐसे में भोजन जैसी बुनियादी व्यवस्था में घोटाला होना बेहद शर्मनाक था।

हालांकि, क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का यह भी मानना है कि केवल प्रभार बदल देने से या मूल पदस्थापना स्थल पर भेज देने से भ्रष्टाचार की जड़ें खत्म नहीं होंगी। लोगों की मांग है कि तत्कालीन बीएमओ के कार्यकाल में हुए पूरे भोजन भुगतान, दावों और वेंडरों को किए गए भुगतानों की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष ऑडिट (जांच) होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि कितने लाख रुपये का वारा-न्यारा किया गया है और इसमें कौन-कौन से अन्य लोग शामिल थे।

नए बीएमओ डॉ. दीपक गुप्ता के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां:

पदभार ग्रहण करते ही नए प्रभारी बीएमओ डॉ. दीपक कुमार गुप्ता के कंधों पर कांटों का ताज होगा। उनके सामने निम्नलिखित मुख्य चुनौतियां होंगी:

  • भोजन व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: मरीजों को मैन्यू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण भोजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • कर्मचारियों में विश्वास बहाली: पिछले विवादों के कारण अस्पताल के स्टाफ में जो गुटबाजी और असंतोष का माहौल बना है, उसे ठीक कर स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाना।
  • वित्तीय पारदर्शिता: आहरण संवितरण अधिकारी (DDO) के रूप में अस्पताल के हर एक सरकारी पैसे के खर्च में पारदर्शिता लाना और पूर्व में लगी वित्तीय कालिख को साफ करना।

प्रशासनिक कड़ाई: इन उच्चाधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि

इस मामले की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि इस आदेश की प्रतिलिपि राज्य के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों से लेकर जिला प्रशासन के तमाम जिम्मेदार अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है, ताकि इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखी जा सके:

  1. संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें, स्वास्थ्य भवन, सेक्टर-19 नवा रायपुर अटल नगर (छ.ग.)।
  2. कलेक्टर, बलरामपुर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज (छ.ग.)।
  3. संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवायें, सरगुजा संभाग, अंबिकापुर (छ.ग.)।
  4. जिला कोषालय अधिकारी, बलरामपुर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज (छ.ग.) – ताकि वित्तीय प्रभार और हस्ताक्षरों में तत्काल बदलाव दर्ज किया जा सके।
  5. लेखा शाखा, स्थानीय कार्यालय।

बलरामपुर जिला प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम यह साफ संदेश देता है कि शासकीय योजनाओं और जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या वित्तीय हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजपुर CHC में कर्मचारी के शिकायती पत्र पर हुई यह त्वरित कार्रवाई अन्य विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है। अब देखना यह होगा कि नए प्रभारी बीएमओ डॉ. दीपक गुप्ता के नेतृत्व में राजपुर अस्पताल की साख कितनी जल्दी वापस लौटती है और क्या पूर्व बीएमओ के खिलाफ भोजन घोटाले की विस्तृत दंडात्मक जांच शुरू की जाती है या नहीं।