खरीफ सीजन में उर्वरक संकट से निपटने के लिए कृषि विभाग की खास पहल, डीएपी के कई वैज्ञानिक एवं प्रभावी विकल्प उपलब्ध
खरीफ फसल बुवाई के मौजूदा सीजन के दौरान देश के अन्नदाताओं के लिए कृषि विभाग ने एक बेहद राहत भरी और दूरदर्शी जानकारी साझा की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी क्षेत्र में डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) उर्वरक की उपलब्धता किसी वजह से प्रभावित होती है, तो किसानों को बिल्कुल भी घबराने या परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। किसानों के खेतों की उर्वरता और फसलों के संतुलित पोषण को बनाए रखने के लिए बाजार में कई वैज्ञानिक और अत्यधिक प्रभावी वैकल्पिक उर्वरक पूरी तरह से उपलब्ध हैं।
खरीफ सीजन में खाद्यान्न सुरक्षा और उर्वरक प्रबंधन
खरीफ का सीजन भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। धान, मक्का, सोयाबीन, दलहन और तिलहन जैसी मुख्य फसलों की बंपर पैदावार के लिए शुरुआती चरणों में संतुलित पोषण की सबसे अधिक जरूरत होती है। कृषि विशेषज्ञों और प्रशासनिक तंत्र का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समय पर किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद और बीज सुलभ हो सकें। हालांकि, वैश्विक और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के उतार-चढ़ाव के कारण कई बार डीएपी की स्थानीय स्तर पर किल्लत की खबरें सामने आती हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को वैज्ञानिक विकल्पों की ओर रुख करने की सलाह दी है।
मुख्य बिंदु: किसानों के लिए खास संदेश
- डीएपी की कमी होने पर चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं, कई उन्नत विकल्प मौजूद।
- एनपीके (NPK) ग्रेड और फॉस्फेट आधारित उर्वरक फसलों को देते हैं संपूर्ण पोषण।
- मृदा परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर ही खादों का चयन करें।
- वैज्ञानिक प्रबंधन से न सिर्फ लागत घटेगी, बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी।
डीएपी के बेहतरीन और वैज्ञानिक विकल्प
कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीएपी की अनुपलब्धता की स्थिति में किसान भाई इसके समतुल्य और बेहतर पोषक तत्वों वाले वैकल्पिक उर्वरकों का चयन कर सकते हैं। इन उर्वरकों में वे सभी तत्व मौजूद हैं जो पौधों की शुरुआती जड़ों के विकास और वानस्पतिक वृद्धि के लिए अनिवार्य हैं:
- एनपीके 20:20:0:13: यह उर्वरक नाइट्रोजन, फास्फोरस और विशेष रूप से सल्फर का एक बेहतरीन स्रोत है, जो तिलहन और दलहन फसलों के लिए अमृत समान माना जाता है।
- एनपीके 12:32:16: इसमें फास्फोरस की मात्रा उच्च होती है, जो फसल की जड़ों के विकास और फूलों-फलों के निर्माण में अत्यंत सहायक है।
- एनपीके 10:26:26: यह संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश प्रदान करता है, जिससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP): यह फास्फोरस के साथ-साथ सल्फर और कैल्शियम का भी प्रमुख स्रोत है, जो मिट्टी की भौतिक दशा सुधारता है।
- ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP): इसमें उच्च सांद्रता में फास्फोरस पाया जाता है, जो कम मात्रा में भी अधिक प्रभाव दिखाता है।
उर्वरकों की तुलनात्मक उपयोगिता तालिका
| वैकल्पिक उर्वरक का नाम | प्रमुख पोषक तत्व (%) | फसलों के लिए मुख्य लाभ |
|---|---|---|
| एनपीके 20:20:0:13 | नाइट्रोजन (20), फास्फोरस (20), सल्फर (13) | तिलहन और दलहन फसलों में तेल और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है। |
| एनपीके 12:32:16 | नाइट्रोजन (12), फास्फोरस (32), पोटाश (16) | जड़ों के विकास और दाना भराव में अत्यधिक मददगार। |
| एनपीके 10:26:26 | नाइट्रोजन (10), फास्फोरस (26), पोटाश (26) | फसल को मजबूती देता है और गिरने से बचाता है। |
| एसएसपी (SSP) / टीएसपी (TSP) | फास्फोरस, सल्फर, कैल्शियम | मिट्टी को उपजाऊ बनाता है तथा फास्फोरस की कमी दूर करता है। |
नाइट्रोजन की कमी को इस प्रकार करें पूरा
कृषि विभाग ने विशेष रूप से रेखांकित किया है कि यदि किसान भाई डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) अथवा ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP) का उपयोग करते हैं, तो उन्हें फसल की अनुशंसित नाइट्रोजन आवश्यकता को पूरा करने के लिए यूरिया का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए। एसएसपी और टीएसपी में नाइट्रोजन की मात्रा नहीं या बहुत कम होती है, इसलिए यूरिया के माध्यम से इसकी पूर्ति करने से पौधों को सभी आवश्यक पोषक तत्व सही अनुपात में मिल जाते हैं। इससे फसलों के संतुलित पोषण पर कोई आंच नहीं आती और उत्पादन पूरी तरह सुरक्षित रहता है.
संतुलित उर्वरक प्रबंधन और मिट्टी की सेहत
लगातार एक ही प्रकार के उर्वरक (विशेषकर डीएपी) के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और उसकी रासायनिक संरचना पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को किसी एक ही उर्वरक पर पूरी तरह निर्भर रहने की पुरानी प्रवृत्ति से बाहर निकलना होगा।
विभाग ने किसानों से पुरजोर अपील की है कि वे स्थानीय उर्वरਕ उपलब्धता, अपने खेतों के मृदा परीक्षण (Soil Health Card) की रिपोर्ट और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को प्राथमिकता दें। वैज्ञानिक और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से न केवल चालू खरीफ सीजन में बंपर फसल उत्पादन हासिल होगा, बल्कि लंबी अवधि तक खेत की उपजाऊ शक्ति और मिट्टी की सेहत भी सुरक्षित बनी रहेगी।













