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छत्तीसगढ़ के जल-जंगल संघर्ष पर केंद्रित पुस्तक ‘सत्याग्रह’ का विमोचन, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की शिरकत






छत्तीसगढ़ के जल-जंगल संघर्ष पर केंद्रित पुस्तक ‘सत्याग्रह’ का विमोचन, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की शिरकत


छत्तीसगढ़ के जल-जंगल संघर्ष और ‘सत्याग्रह’ पुस्तक का विमोचन: एक ऐतिहासिक विमर्श

रायपुर, 02 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज शाम शंकर नगर स्थित अपने निवास कार्यालय में ‘सत्याग्रह’ नामक बहुचर्चित पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया। यह भव्य कार्यक्रम हरि ठाकुर स्मारक संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

पुस्तक के लेखक दिवंगत साहित्यकार एवं पत्रकार आशीष सिंह हैं, जिन्होंने अपनी इस कृति के माध्यम से छत्तीसगढ़ के अंचलों में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुए जल और जंगल के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़े गए ऐतिहासिक संघर्षों को जीवंत किया है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में राज्य के कई प्रबुद्ध जन, साहित्यकार और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति

इस विमोचन समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा और साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू के साथ-साथ स्वर्गीय आशीष सिंह के सुपुत्र उपमन्यु सिंह और अभिमन्यु सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे, जिन्होंने अपने पिता की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले इस प्रकाशन पर गर्व व्यक्त किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के मुख्य उद्गार

पुस्तक का विमोचन करने के पश्चात सभा को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यह किताब छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के शताब्दी वर्ष संघर्ष और उनके अदम्य साहस का एक प्रामाणिक दस्तावेज है। उन्होंने कहा:

“यह पुस्तक ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बस्तर से लेकर राजनांदगांव और धमतरी के कंडेल नहर सत्याग्रह तक जल और जंगल के अधिकारों की रक्षा के लिए हुए सुनियोजित संघर्षों को प्रकाश में लाती है। इतिहास के इन पन्नों को युवा पीढ़ी के सामने लाना अत्यंत आवश्यक है।”

डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में यह भी याद किया कि किस प्रकार वर्ष 1920 में बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के विशेष अनुरोध पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को धमतरी आना पड़ा था। उन्होंने राजनांदगांव जिले के बादराटोला के अमर शहीद रामाधीन गोंड के स्वतंत्रता आंदोलन में दिए गए अमूल्य योगदान को याद करते हुए बताया कि उनके नाम पर ही राजनांदगांव शहर में ‘रामाधीन मार्ग’ सुशोभित है। इसके साथ ही उन्होंने त्यागमूर्ति स्वर्गीय प्यारेलाल सिंह और स्वर्गीय हरि ठाकुर के महान कृतित्व एवं योगदान का भी भावपूर्ण स्मरण किया।

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा के विचार

विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जल और जंगल के संघर्षों के शताब्दी वर्ष के परिप्रेक्ष्य में ‘सत्याग्रह’ पुस्तक का प्रकाशन एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है।

उन्होंने रेखांकित किया कि स्वर्गीय आशीष सिंह ने अपनी इस पुस्तक में स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर का अत्यंत सूक्ष्म और विस्तार से वर्णन किया है जब आम जनता अपने जल-जंगल की अस्मिता के लिए संघर्ष कर रही थी। इस पुस्तक में धमतरी के प्रसिद्ध कंडेल नहर सत्याग्रह, नत्थूजी जगताप, नारायणराव मेघावाले के संघर्षों के साथ-साथ राजनांदगांव के शहीद रामाधीन गोंड के सर्वोच्च बलिदान और पंडित सुंदरलाल शर्मा के ओजस्वी योगदान का बहुत ही सजीव चित्रण किया गया है। उन्होंने पुस्तक के सफल प्रकाशन के लिए हरि ठाकुर स्मारक संस्थान को अपनी ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

अन्य वक्ताओं के विचार एवं साहित्यिक दृष्टिकोण

समारोह के दौरान छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्र, साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष शशांक शर्मा और प्रख्यात साहित्यकार विरेन्द बहादुर ने भी अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि यहां के आदिवासियों, किसानों और स्वतंत्रता सेनानियों ने जल, जंगल और जमीन की लड़ाई में जो त्याग और बलिदान दिए हैं, उनका इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक स्वर्णिम अध्याय है। स्वर्गीय आशीष सिंह की यह कृति शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य करेगी।

‘सत्याग्रह’ पुस्तक का ऐतिहासिक और वैचारिक महत्व

यह पुस्तक निम्नलिखित मुख्य ऐतिहासिक आयामों को रेखांकित करती है:

  • कंडेल नहर सत्याग्रह (1920): धमतरी जिले के कंडेल गांव में किसानों पर थोपे गए जबरन सिंचाई कर और अन्यायपूर्ण अनुबंध के खिलाफ हुए इस सत्याग्रह ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। इसी आंदोलन की गूंज थी कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को छत्तीसगढ़ की धरा पर कदम रखना पड़ा।
  • जल-जंगल के अधिकार: ब्रिटिश हुकूमत द्वारा पारंपरिक वन अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों और उसके विरोध में स्थानीय आदिवासियों व जननायकों द्वारा चलाई गई अहिंसक लड़ाइयों का विस्तृत विवरण।
  • गुमनाम नायकों की गाथा: बस्तर से लेकर राजनांदगांव और महासमुंद तक के उन तमाम सेनानियों और शहीदों (जैसे शहीद रामाधीन गोंड) के इतिहास को संकलित करना, जो मुख्यधारा के इतिहास में नेपथ्य में चले गए थे।

हरि ठाकुर स्मारक संस्थान के बैनर तले प्रकाशित और स्वर्गीय आशीष सिंह द्वारा रचित ‘सत्याग्रह’ पुस्तक छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। विमोचन समारोह इस बात का प्रतीक है कि छत्तीसगढ़ सरकार और साहित्यिक संस्थान राज्य के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को सहेजने और उनका ऋणी बने रहने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह पुस्तक आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के इतिहास और शोध अध्ययन का एक अनिवार्य हिस्सा बनेगी।