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विश्वकर्मा जयंती पर पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं, कहा- विकसित भारत में शिल्पकारों का कौशल महत्वपूर्ण | विशेष रिपोर्ट






विश्वकर्मा जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी शुभकामनाएं: विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिल्पकारों और कारीगरों के योगदान को सराहा


राष्ट्रीय समाचार

विश्वकर्मा जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को दी बधाई; कहा- ‘विकसित भारत के निर्माण में शिल्पकारों और कारीगरों का कौशल अत्यंत महत्वपूर्ण’

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर समूचे देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। इस दिव्य अवसर पर प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उन लाखों-करोड़ों कारीगरों, शिल्पकारों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और कुशल कामगारों का अभिनंदन किया, जो दिन-रात अपने परिश्रम और हुनर से राष्ट्र के निर्माण और सृजन में लगे हुए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के बृहद राष्ट्रीय संकल्पों को धरातल पर साकार करने के लिए हमारे पारंपरिक व आधुनिक कामगारों का कौशल, अटूट समर्पण और अनवरत परिश्रम सबसे प्रमुख स्तंभ हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा की स्तुति में प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़ा हुआ एक पवित्र संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि सरकार राष्ट्र-निर्माण की दिशा में देश के प्रत्येक विश्वकर्मा (कारीगर एवं शिल्पकार) के प्रयासों को हर संभव सहयोग, प्रशिक्षण और आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

शाश्वत संस्कृत सुभाषितम् और भगवान विश्वकर्मा की महिमा

प्रधानमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश में जिस सनातन सुभाषितम् का उल्लेख किया, वह देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा के अनत और विश्वव्यापी रूप की महिमा का गुणगान करता है:

“अनादिरप्रमेयश्च अरूपश्च जयाजयः।
लोकरूपो जगन्नाथः विश्वकर्मन्नमो नमः॥”
भावार्थ: जो अनादि हैं (जिसका कोई प्रारंभ नहीं है), जो अप्रमेय हैं (जिन्हें सीमाओं में नापा नहीं जा सकता), जो अरूप हैं (असीम हैं) और जो सभी जय और पराजय से परे हैं; जो संपूर्ण जगत के रूप में स्वयं व्याप्त हैं और जगन्नाथ (सृष्टि के स्वामी) हैं, ऐसे भगवान विश्वकर्मा को हम बारम्बार प्रणाम करते हैं।

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भारतीय संस्कृति और ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रथम वास्तुकार, शिल्पकार और देवशिल्पी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं के अस्त्र-शस्त्र, भव्य नगरों (जैसे सत्ययुग में स्वर्ग लोक, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका और इंद्रप्रस्थ) और दिव्य रथों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। प्रधानमंत्री द्वारा इस सुभाषितम् को साझा करने का मुख्य उद्देश्य भारत की इस महान रचनात्मक परंपरा और श्रम के प्रति आदर भाव को पुनर्जाग्रत करना है।

विकसित और आत्मनिर्भर भारत के मूल आधार: हमारे हुनरमंद साथी

अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब भारत 2047 तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है, तब देश के जमीनी कारीगरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। निर्माण, हस्तशिल्प, धातु विज्ञान, काष्ठ कला, वस्त्र निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विविध क्षेत्रों में कार्य कर रहे हमारे श्रमिक ही देश की वास्तविक ताकत हैं।

“आपका कौशल एवं परिश्रम विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्र के नवनिर्माण की दिशा में आपके प्रयासों को हरसंभव प्रोत्साहन मिलता रहे, इसके लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति केवल आधुनिक तकनीकों या बड़ी फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हाथों के हुनर पर भी टिकी है जो रोज नया सृजन करते हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छैनी, हथौड़ा, सिलाई मशीन, कुम्हार के चाक या आधुनिक उपकरणों से काम करने वाले हर कारीगर का योगदान अतुलनीय है।

पीएम विश्वकर्मा योजना: कारीगरों के सशक्तिकरण का महाअभियान

प्रधानमंत्री के इस शुभकामना संदेश के पीछे केंद्र सरकार की वह दूरगामी सोच भी स्पष्ट झलकती है, जिसके तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ (PM Vishwakarma Scheme) देश के 18 पारंपरिक व्यापारों से जुड़े लोगों के जीवन में परिवर्तन ला रही है।

पीएम विश्वकर्मा योजना के प्रमुख उद्देश्य एवं लाभ:

  • पहचान और सम्मान: योजना के तहत कारीगरों को ‘पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र’ और पहचान पत्र प्रदान किया जाता है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।
  • कौशल विकास (Skill Upgradation): पारंपरिक तरीकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए कारीगरों को बुनियादी और उन्नत (Basic & Advanced) प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान स्टाइपेंड का भी प्रावधान है।
  • आधुनिक टूलकिट प्रोत्साहन: प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक लाभार्थी को आधुनिक औजार खरीदने के लिए ₹15,000 का टूलकिट प्रोत्साहन (Toolkit Incentive) दिया जाता है।
  • बिना गांरटी के रियायती ऋण: व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए कारीगरों को बिना किसी जमा-जमानत (Collateral-free) के ₹3 लाख तक का क्रेडिट सपोर्ट बहुत कम ब्याज दर (5%) पर उपलब्ध कराया जाता है।
  • डिजिटल लेनदेन और मार्केटिंग सपोर्ट: कारीगरों को डिजिटल भुगतान अपनाने पर प्रोत्साहन दिया जाता है तथा उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के लिए ब्रांडिंग व मार्केटिंग सहायता दी जाती है।

यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा और पारिवारिक शिल्प कलाओं को जीवित रखने और उन्हें 21वीं सदी के अनुकूल बनाने का एक एकीकृत प्रयास है।

18 पारंपरिक व्यवसाय जिन्हें मिल रहा है नया जीवन

भगवान विश्वकर्मा जयंती के इस अवसर पर यह जानना भी प्रासंगिक है कि देश के कौन-कौन से वर्ग सरकार की इस कल्याणकारी सोच के केंद्र में हैं। ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ के अंतर्गत निम्नलिखित 18 पारंपरिक क्षेत्रों के शिल्पकारों को सीधे लाभान्वित किया जा रहा है:

  1. कारपेंटर (बढ़ई)
  2. नाव बनाने वाले (Boat Maker)
  3. अस्त्र बनाने वाले (Armourer)
  4. लोहार (Blacksmith)
  5. ताला बनाने वाले (Locksmith)
  6. हथौड़ा और टूलकिट निर्माता
  7. सुनार (Goldsmith)
  8. कुम्हार (Potter)
  9. मूर्तिकार (Sculptor / Stone carver)
  10. मोची (Cobbler / Footwear artisan)
  11. राजमिस्त्री (Mason)
  12. टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले
  13. पारंपरिक गुड़िया और खिलौने बनाने वाले
  14. नाई (Barber)
  15. मालाकार (Washerman / Garland maker)
  16. धोबी (Washerman)
  17. दर्जी (Tailor)
  18. मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले (Fishing net maker)

श्रम की प्रतिष्ठा और आत्मनिर्भरता का संदेश

भारत में प्राचीन काल से ही श्रम को पूजा माना गया है—‘कर्म ही पूजा है’। भगवान विश्वकर्मा की आराधना इसी जीवन-दर्शन का प्रतीक है। आधुनिक भारत के निर्माण में जब अवसंरचना (Infrastructure), एक्सप्रेसवे, नए हवाई अड्डे, डिजिटल नेटवर्क और मेक इन इंडिया पहल का विस्तार हो रहा है, तब इन सभी परियोजनाओं की नींव में देश के कुशल कामगारों का ही पसीना है।

प्रधानमंत्री का यह संदेश देश के करोड़ों असंगठित और संगठित क्षेत्र के श्रमिकों में आत्म-गौरव और स्वाभिमान की भावना जगाता है। सरकार का यह स्पष्ट रुख है कि जब तक देश का अंतिम कारीगर सशक्त और आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक भारत के पूर्ण विकास की कल्पना अधूरी है।

विश्वकर्मा जयंती केवल औजारों और मशीनों की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर छिपी सृजनात्मक ऊर्जा, नवाचार और कर्मठता के सम्मान का उत्सव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन और संस्कृत सुभाषितम् का आह्वान देश के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन और कारीगरों के अटूट समर्पण के बल पर भारत निस्संदेह ‘विकसित भारत @2047’ के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है।


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