वीर सिपाहियों की कलाई ना रहे सूनी: छत्तीसगढ़ की बहनों ने भेजी रक्षा सूत्र, कांकेर में मने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अनोखी मिसाल
बस्तर की माटी, चॉकलेट और स्नेह से सजी राखियां देश की सरहद पर तैनात सैनिकों के लिए हुईं रवाना
कांकेर: रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है, लेकिन जब बात देश की सरहद की सुरक्षा में दिन-रात एक करने वाले वीर जवानों की आती है, तो यह पर्व देश के प्रति समर्पण और कृतज्ञता का महान उत्सव बन जाता है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक अत्यंत प्रेरणादायक और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कांकेर के पुराने बस स्टैंड में आयोजित इस उत्सव ने पूरे क्षेत्र में देशभक्ति की एक अनूठी मिसाल पेश की, जहाँ बहनों ने अपने घर-परिवार से दूर देश की रक्षा कर रहे फौजियों की कलाई सूनी न रहे, इसके लिए बढ़-चढ़कर रक्षा सूत्र भेजे।
सैनिक पूर्व सेवानिवृत्ति महेंद्र राणा को सौंपा रक्षा सूत्र
इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत बेहद भावुक और गौरवशाली क्षण के साथ हुई। कांकेर जिले की बहनों ने सामूहिक रूप से आगे आते हुए सैनिक पूर्व सेवानिवृत्ति श्री महेंद्र राणा जी को रक्षा सूत्र (राखी) सौंपा और उनका तिलक कर दीर्घायु की कामना की। पुराने बस स्टैंड पर आयोजित इस उत्सव में समाज के हर वर्ग ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पूरे माहौल को देशभक्ति के रंगों से सराबोर कर दिया।
“सीमा पर तैनात हमारे वीर जवान ही हमारा असली परिवार हैं। उनका त्याग ऐसा है जिसके आगे पूरा देश नतमस्तक है। छत्तीसगढ़ की बहनों द्वारा भेजी गई ये राखियां सिर्फ धागा नहीं, बल्कि अंचल की माटी और माताओं-बहनों का अटूट विश्वास और आशीर्वाद हैं।”
बस्तर की माटी और बहनों के प्यार का अनूठा संगम
कांकेर जिले की माताओं और बहनों द्वारा भेजी जा रही ये राखियां सामान्य नहीं हैं, बल्कि इनमें बस्तर की संस्कृति, माटी और अद्वितीय स्नेह समाहित है। इस रक्षाबंधन पर्व पर जब देश के हर कोने से राखियां जवानों के लिए पहुंचेंगी, तब कांकेर जिले की यह राखी इसलिए विशेष होगी क्योंकि इसमें:
- घर-आंगन की पवित्र माटी: सैनिकों के तिलक के लिए विशेष रूप से बस्तर के घरों और आंगनों की मिट्टी भेजी गई है।
- बालिकाओं का दुलार: स्कूली बालिकाओं ने राखियों के साथ चॉकलेट भी भेजी हैं, जिसके जरिए उन्होंने अपना अनूठा प्यार, स्नेह, सम्मान और आभार व्यक्त किया है।
- सामूहिक सहभागिता: इस मुहिम में स्कूल की बालिकाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महतारी वंदन योजना की लाभान्वित बहनों और समर्पित सफाई कर्मी बहनों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी हिस्सेदारी दर्ज कराई।
प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी के निर्देश में ऐतिहासिक सहभागिता
भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती विभा अवस्थी जी के मार्गदर्शन और निर्देशानुसार कांकेर जिले में निवास करने वाली समस्त बहनों के अभूतपूर्व सहयोग से देश के वीर सिपाहियों के लिए रक्षा सूत्र एकत्र किए गए और उन्हें प्रेषित किया गया। इस पूरे अभियान को सफल बनाने में जिले की प्रभारी श्रीमती अर्चना चौबे जी ने प्रमुख भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित गणमान्य व मातृशक्ति
इस कार्यक्रम को सफल बनाने और ऐतिहासिक रूप देने में कांकेर जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्रों से बहनों ने भारी संख्या में शिरकत की। मुख्य रूप से उपस्थित रहने वालों में:
- प्रमुख नेत्रियों व प्रभारीगण: श्रीमती अर्चना चौबे (जिला प्रभारी), रुक्मणी हुइके, विजय लक्ष्मी कौशिक, जैना ताराम, उमा शर्मा, शालिनी राजपूत, सुमित्रा मार्कल, राजेंद्र रंधावा, मीरा सलाम, सरिता कुलदीप, चित्रलेखा जैन, शकुंतला जैन, निधि संचेती, मंजू, आरती, स्मृति कौशिक, अंजू नेगी, तमन्ना लखवानी, गीतावती, सीता गुप्ता, आरोही, दीप्ति शाह, और सुनीता सरकार।
- राजनीतिक व सामाजिक नेतृत्व: इस गरिमामयी आयोजन में भाजपा जिला अध्यक्ष श्री महेश जैन जी, विधायक श्री आसाराम नेताम जी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक जी, श्री दिनेश रजक जी सहित बड़ी संख्या में युवा और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
- शासकीय सेवकों की भागीदारी: कार्यक्रम को सफल बनाने में विभिन्न शासकीय विभागों के कर्मचारियों ने भी अपना अभूतपूर्व योगदान दिया और देश के जवानों के नाम रक्षा सूत्र भेजे।
जय जवान, जय किसान के नारों से गूंजा कांकेर
कार्यक्रम के दौरान पूरा प्रांगण ‘जय जवान, जय किसान’ और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि देश का अन्नदाता किसान और सरहद का वीर जवान ही भारत की रीढ़ हैं। एक तरफ जहां किसान देश का पेट भरता है, वहीं जवान देश की सीमाओं की रक्षा करता है। इन दोनों की बदौलत ही आज पूरा देश सुरक्षित और समृद्ध महसूस करता है।
अंत में, तीनों विधानसभा क्षेत्रों से आई बहनों ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में भी देश के सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण के लिए ऐसे रचनात्मक और देश-प्रेम से परिपूर्ण आयोजनों में पूरी ऊर्जा के साथ जुटी रहेंगी। बस्तर की माटी से जुड़ा यह संदेश अब सरहद पर तैनात जवानों तक पहुंचेगा, जो यकीनन उनके पराक्रम और उत्साह को और अधिक बढ़ाएगा।











