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छत्तीसगढ़ के दुर्ग में रिद्धि-सिद्धी बिल्डर्स की जमीन और पार्टनरशिप से जुड़े विवाद में कोर्ट के आदेश पर 3 अगस्त को पुलिस ने भाजपा नेता और राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल बोथरा, भाजपा नेता सजल जैन, विश्वास गुप्ता, मनीष शर्मा और अमृता खंडेलवाल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में रिद्धि-सिद्धी बिल्डर्स की जमीन और पार्टनरशिप से जुड़े विवाद में कोर्ट के आदेश पर 3 अगस्त को पुलिस ने भाजपा नेता और राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल बोथरा, भाजपा नेता सजल जैन, विश्वास गुप्ता, मनीष शर्मा और अमृता खंडेलवाल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि FIR दर्ज हुए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन 13 अगस्त तक पुलिस की कार्रवाई गिरफ्तारी तक नहीं पहुंची है। मामले में अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की जांच के साथ शिकायत में लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।

मामला दुर्ग के कसारीडीह-गंजपारा नाला के पास स्थित करीब 2.98 एकड़ जमीन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता रूपेश जैन भी रिद्धि-सिद्धी बिल्डर्स के पार्टनर हैं। उनका आरोप है कि फर्म की जमीन और संपत्तियों को लेकर अन्य पार्टनर्स ने उनकी जानकारी के बिना कार्रवाई की। बाद में जमीन के बड़े हिस्से का बंटवारा कर दिया गया। शिकायत में दस्तावेजों में गड़बड़ी करने और फर्म की जमीन को अलग-अलग हिस्सों में बांटने के भी आरोप लगाए गए हैं।

2009 में बनी थी पार्टनरशिप फर्म

रूपेश जैन के मुताबिक, साल 2009 में जमीन खरीदकर उस पर मकान और फ्लैट बनाने के लिए रिद्धि-सिद्धी बिल्डर्स नाम से पार्टनरशिप फर्म बनाई गई थी। इसमें रूपेश जैन के अलावा सजल जैन, विश्वास गुप्ता, मनीष शर्मा और अमृता खंडेलवाल पार्टनर थे। फर्म ने अक्टूबर 2009 में करीब 2.98 एकड़ जमीन अपने नाम पर खरीदी थी।

शिकायत के मुताबिक, कांतिलाल बोथरा की मां कमला देवी बोथरा की भी फर्म में हिस्सेदारी थी। उनकी मौत के बाद कांतिलाल बोथरा के फर्म के कामकाज से जुड़े होने का भी शिकायत में जिक्र किया गया है।

जमीन कृषि निकली, फिर अतिरिक्त जमीन खरीदने की योजना

शिकायत के मुताबिक, जमीन खरीदने के बाद पता चला कि उसका रिकॉर्ड कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। इसके बाद वर्ष 2011 के आसपास फर्म से लगी करीब 3.56 एकड़ अतिरिक्त जमीन खरीदने की योजना बनाई गई।

इसके लिए निवेशकों से रकम लेने का प्रस्ताव रखा गया। शिकायत में कहा गया है कि निवेशकों को निर्माण शुरू होने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देने और बाद में उनकी रकम फ्लैट की कीमत में समायोजित करने की बात कही गई थी।

85 प्रतिशत जमीन के बंटवारे पर विवाद

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रूपेश जैन का आरोप है कि बाद में उन्हें फर्म बंद किए जाने की जानकारी दी गई और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद साल 2018 में फर्म की करीब 85 प्रतिशत जमीन को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर आरोपियों और उनके परिवार से जुड़े लोगों के नाम किए जाने का आरोप है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जमीन के बंटवारे से जुड़े कुछ दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे।

रेलवे मुआवजे को लेकर भी आरोप

शिकायत में जमीन के संभावित रेलवे अधिग्रहण और उससे मिलने वाले मुआवजे का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि रेलवे लाइन के प्रस्ताव के बाद जमीन का बंटवारा कर भविष्य में मिलने वाले मुआवजे का लाभ लेने की तैयारी की गई।

हालांकि, पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन का बंटवारा किस आधार पर हुआ और इसका मुआवजे से कोई संबंध था या नहीं।

तहसील रिकॉर्ड और कॉलोनाइजर लाइसेंस पर भी सवाल

शिकायतकर्ता ने जमीन के बंटवारे से जुड़े तहसील रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बंटवारे से संबंधित जरूरी दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं मिले हैं। इसके अलावा रिद्धि-सिद्धी बिल्डर्स के कॉलोनाइजर लाइसेंस को लेकर भी शिकायत में अनियमितता का आरोप लगाया गया है। पुलिस अब संबंधित दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड की जांच करेगी।

फ्लैट बुकिंग की रकम को लेकर भी विवाद

इसी फर्म से जुड़े फ्लैट बुकिंग के मामले में लोगों से रकम लेने और फ्लैट नहीं देने के आरोप भी सामने आए हैं। शिकायत में बताया गया है कि इस मामले में अलग से अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अब जमीन, पार्टनरशिप, दस्तावेजों और रकम के लेन-देन समेत सभी पहलुओं की जांच करेगी।

कोर्ट के आदेश के बाद FIR, 10 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं

रूपेश जैन ने पुलिस और प्रशासन से शिकायत के बाद न्यायालय का रुख किया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग की अदालत ने पुलिस को केस दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया। इसके बाद 3 अगस्त को दुर्ग कोतवाली थाने में धारा 420 और 34 के तहत FIR दर्ज की गई। 13 अगस्त तक FIR दर्ज हुए 10 दिन हो चुके हैं, लेकिन किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि शिकायत में लगाए गए आरोप, जमीन के दस्तावेज और कथित बंटवारे में क्या वास्तविकता है और पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है। मामले में नामजद लोगों पर लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के हैं। इनकी पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

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