स्कूल में बिल्डिंग नहीं, फिर कैसा सुशासन? खैरझिटी के बच्चों ने भाजपा सरकार को दिखाया आईना: कांग्रेस
रायपुर, 16 अगस्त 2026: प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड के खैरझिटी गांव के बच्चों और ग्रामीणों ने स्वतंत्रता दिवस पर भाजपा सरकार के शिक्षा व्यवस्था के खोखले दावों की पोल खोल दी है। स्कूल की अपनी बिल्डिंग न होने के कारण बच्चों को स्कूल परिसर के बजाय धमधा विकासखंड कार्यालय के बाहर तिरंगा फहराकर सरकार से स्कूल भवन की मांग करनी पड़ी। यह घटना भाजपा सरकार के तथाकथित सुशासन पर करारा तमाचा है।
- शिक्षा मंत्री के गृह जिले दुर्ग के खैरझिटी में बच्चों के पास नहीं है अपना स्कूल भवन।
- ब्लॉक कार्यालय के बाहर तिरंगा फहराकर स्कूली बच्चों ने की भवन निर्माण की मांग।
- प्रदेश में 8,106 से अधिक स्कूल जर्जर, जिनमें 3,700 से अधिक अति-खतरनाक स्थिति में।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला: 5,415 प्राथमिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे।
शिक्षा मंत्री के गृह जिले में बदहाल शिक्षा व्यवस्था
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि दुर्ग शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह जिला है और साजा विधायक ईश्वर साहू का विधानसभा क्षेत्र है। इसके बावजूद शिक्षा मंत्री के गृह जिले में बच्चों को स्कूल भवन तक नसीब नहीं है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था किस बदहाली के दौर से गुजर रही है।
8 हजार से अधिक स्कूल जर्जर, विज्ञापन में व्यस्त सरकार
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने बताया कि राज्य में 8,106 से अधिक स्कूल जर्जर हैं, जिनमें से 3,700 से अधिक स्कूल अति-जर्जर और खतरनाक स्थिति में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बच्चों की सुरक्षा और भविष्य की चिंता करने के बजाय केवल विज्ञापनों और प्रचार-प्रसार में व्यस्त है। जब स्कूल की छत, दीवारें और शिक्षक पर्याप्त नहीं हैं, तो सरकार किस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा कर रही है?
केंद्रीय रिपोर्ट से खुली पोल: 5 हजार से ज्यादा स्कूल एकल-शिक्षक के भरोसे
उन्होंने कहा कि केंद्र के शिक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट ने भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है। प्रदेश के 30,709 सरकारी प्राथमिक स्कूलों में से 5,415 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक पदस्थ है। वहीं, 14 स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं है और 9,618 स्कूलों में दर्ज संख्या 30 से कम है। प्राथमिक स्तर पर 29.1 प्रतिशत स्कूलों में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात प्रतिकूल है, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर भी 242 स्कूल एकल-शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
कांग्रेस ने पूछे तीखे सवाल
धनंजय सिंह ठाकुर ने सवाल किया कि जिस प्रदेश में हजारों स्कूल एक शिक्षक के भरोसे हों और बच्चों को ध्वजारोहण के लिए भी स्कूल भवन न मिले, वहां सरकार किस मुंह से सुधार के दावे कर रही है? सरकार स्पष्ट करे कि एकल-शिक्षक स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति कब होगी, जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण कब शुरू होगा और बच्चों को अपने हक के लिए आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है?
उन्होंने मांग की कि सरकार विज्ञापनों से बाहर निकलकर धरातल की सच्चाई देखे तथा तत्काल खैरझिटी के बच्चों के लिए भवन और पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करे।










