Advertisement

मिनरल संशोधन बिल 2026 छत्तीसगढ़ के आर्थिक हितों पर हमला: दीपक बैज






मिनरल संशोधन बिल छत्तीसगढ़ के आर्थिक हितों पर हमला, राज्यों के अधिकार छीन रही केंद्र: दीपक बैज


मिनरल संशोधन बिल छत्तीसगढ़ के आर्थिक हितों पर हमला, राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता छीन रही केंद्र सरकार: दीपक बैज

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने संसद में बिना चर्चा के पारित किए गए ‘मिनरल संशोधन अध्यादेश 2026’ को छत्तीसगढ़ के आर्थिक हितों के खिलाफ लिया गया फैसला करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अपने उद्योगपति मित्रों के मुनाफे के लिए यह कानून बनाया है, जो राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों पर कर या उपकर (Cess) लगाने पर रोक लगाता है और केंद्र को खनिज-युक्त भूमि पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान करता है।

बयान के मुख्य बिंदु:

WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.21.47
  • ‘मिनरल संशोधन बिल 2026’ राज्यों के कर लगाने के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा आघात।
  • सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले को निष्प्रभावी करने का प्रयास, राज्यों के राजस्व में आएगी भारी कमी।
  • छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल जैसे खनिज समृद्ध राज्यों को होगा भारी वित्तीय नुकसान।
  • संवेदनशील विधेयक की गहन समीक्षा के लिए JPC गठित करने की कांग्रेस ने की मांग।

संघीय ढांचे पर कुठाराघात और वित्तीय अधिकारों का हनन

दीपक बैज ने कहा कि MMDR Act 1957 मुख्य खनिजों और गौण खनिजों के बीच स्पष्ट अंतर रखता आया है। ताजा संशोधन का मुख्य उद्देश्य राज्यों के कर लगाने पर रोक लगाना है। अब छत्तीसगढ़ जैसे खनिज समृद्ध राज्य केंद्र की तय सीमाओं के बिना अतिरिक्त कर या लेवी नहीं लगा सकेंगे। केंद्र सरकार का यह दावा कि यह बदलाव खनन उद्योग पर बोझ कम करने के लिए है, पूरी तरह से राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण और संघीय ढांचे (Federalism) के खिलाफ है।

निजी खनन कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार पहले भी पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत मिले अधिकारों को छीनने का काम करती रही है। नंदराज पर्वत, हसदेव, तमनार, धर्मजयगढ़, रायगढ़, मैनपाट, बैलाडीला, बचेली, किरंदुल, कांकेर और बीजापुर में ग्रामसभाओं की सैकड़ों आपत्तियों को दरकिनार कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। यह नया संशोधन भी इसी षड्यंत्र की अगली कड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले को बेअसर करने की कोशिश

दीपक बैज ने ध्यान दिलाया कि संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘भूमि’ राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आती है। यह संशोधन 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस ऐतिहासिक फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए लाया गया है, जिसमें राज्यों को खनिज अधिकारों पर टैक्स लगाने की अनुमति दी गई थी। इसके तहत पूर्व में लगाए गए लेकिन वसूल न किए गए करों को अवैध घोषित करना राज्य की वित्तीय स्वायत्तता पर सीधा प्रहार है।

पर्यावरण क्षति की भरपाई पर रोक और JPC मांग की अनदेखी

उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों से स्थानीय पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला कर बेहद जरूरी है, जिस पर अब रोक लग जाएगी। संसद में भारी हंगामे के बीच पारित किए गए इस विधेयक को समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की कांग्रेस की मांग को केंद्र सरकार ने नजरअंदाज कर दिया।


ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM