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रायगढ़ में चक्रधर समारोह के चौथे दिन बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट एंड लिटरेचर (बादल) आसना के कलाकारों ने बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपराओं और जनजातीय जीवन की झलक मंच पर पेश की

रायगढ़ में चक्रधर समारोह के चौथे दिन बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट एंड लिटरेचर (बादल) आसना के कलाकारों ने बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपराओं और जनजातीय जीवन की झलक मंच पर पेश की। कलाकारों ने लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को साकार किया।

बस्तर की लोक संस्कृति, भाषा-बोली, रीति-रिवाज, परंपराओं और साहित्य के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से ‘बादल’ संस्था का गठन किया गया है। संस्था के कलाकार अलग-अलग प्रतिष्ठित मंचों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दे चुके हैं।

‘झाली आना’, ‘लेजा गीत’ और ‘परब गीत’ की प्रस्तुति

समारोह में कलाकारों ने बस्तर में प्रचलित लोकगीत ‘झाली आना’, ‘लेजा गीत’, ‘परब गीत’ और विवाह परंपरा से जुड़ी लोकधुनें पेश कीं। इसके बाद बस्तर के प्रसिद्ध गौर सिंग नृत्य की प्रस्तुति हुई। कलाकारों ने नृत्य के जरिए बस्तर की जनजातीय परंपरा और संस्कृति की झलक दिखाई।

गौर सिंग नृत्य में दिखी दण्डामी माड़िया जनजाति की परंपरा

गौर माड़िया नृत्य या बाइसन हॉर्न डांस के नाम से प्रसिद्ध गौर सिंग नृत्य बस्तर की दण्डामी माड़िया जनजाति की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुरुष कलाकारों के सिर पर गौर सिंग से बने मुकुट और हाथों में माड़िया ढोल इसकी खास पहचान हैं। महिला कलाकार हाथों में पारंपरिक वाद्ययंत्र लेकर नृत्य करती हैं।

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गौर सिंग नृत्य दल का नेतृत्व गणेश मंडावी ने किया। दल में समीर कुमार पोयाम, मंगलों मंडावी, फगनू राम पोयाम, लक्ष्मण पोड़ीयामी, बकसू मंडावी, मासों मंडावी, मुड़ो राम मंडावी, कायाराम मंडावी, रमेश कुमार मंडावी, बसंत पोड़ीयामी, फूलमती मंडावी, हान्दे वट्टी, सामला मंडावी, शशि, कुमली मंडावी, आरती कश्यप, शांति मंडावी, लक्ष्मी और बुधरी मंडावी शामिल रहे।

धुरवा मंडई लोकनृत्य ने दिखाई जनजातीय परंपरा

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति धुरवा मंडई लोकनृत्य की रही। धुरवा जनजाति से जुड़ा यह लोकनृत्य फसल कटाई के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और आभार प्रकट करने की परंपरा से जुड़ा है। मंडई के अवसर पर क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना के साथ यह नृत्य किया जाता है।

धुरवा मंडई नृत्य दल का नेतृत्व तेजेन्द्र कुमार कश्यप ने किया। दल में धनीराम नाग, सोनू राम, डेविड नाग, फुलचंद, धनीराम बघेल, हरीराम, धर्मेन्द्र, बिट्टो, मनीराम कश्यप, शंकर, दीपक, संतोष, गुंजन नाग, दिव्या बघेल, लक्ष्मी, उमा, बबिता, चितामनी और लता शामिल रहे।

ओपी चौधरी ने बस्तर के कलाकारों को 51 हजार अतिरिक्त देने की घोषणा की

चक्रधर समारोह में वित्त मंत्री और रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी शामिल हुए। उन्होंने दर्शक दीर्घा में बैठकर कलाकारों की प्रस्तुतियां देखीं और कलाकारों का सम्मान किया।

समारोह में जाह्नवी बेहरा की ओडिसी, बेंगलुरु की शिवरंजनी हरीश और बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट्स एंड लिटरेचर के ‘बादल’ दल सहित कई कलाकारों ने प्रस्तुति दी। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बस्तर के कलाकारों के लिए अपनी ओर से 51 हजार रुपए की अतिरिक्त सम्मान राशि देने की घोषणा की।

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