सेवा संकल्प अभियान: पीएम श्री नवोदय विद्यालय बलरामपुर में आयुर्वेद दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, 380 विद्यार्थियों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में प्रशासनिक नवाचारों और जनहितकारी अभियानों की श्रृंखला में यह आयोजन नई पीढ़ी की स्वास्थ्य चेतना को जागृत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। आयुष विभाग और आरोग्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बीच पारंपरिक भारतीय स्वास्थ्य परंपराओं, संतुलित आहार-विहार, ऋतुचर्या और प्राकृतिक दिनचर्या से जोड़ना रहा।
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक जीवनशैली का संगम
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों ने विस्तार से समझाया कि आयुर्वेद केवल रोगों की चिकित्सा करने की पद्धति नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवन जीने की एक मुकम्मल कला और विज्ञान है। आज के समय में जब खान-पान में असंतुलन और डिजिटल उपकरणों के बढ़ते प्रभाव के कारण युवाओं में कई प्रकार की शारीरिक व मानसिक समस्याएं देखने को मिल रही हैं, तब आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों की महत्ता और भी बढ़ जाती है।
आयुष विभाग की टीम और आरोग्य भारती के प्रतिनिधियों ने छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार अपनी दैनिक दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करके दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। रसोईघर में मौजूद मसालों और जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों से लेकर मौसमी बदलावों के अनुरूप खान-पान के नियमों पर गहन प्रकाश डाला गया।
प्राचार्य राकेश कुमार पांडे का वक्तव्य: आयुर्वेद की गौरवशाली परंपरा और गौरव
पीएम श्री नवोदय विद्यालय के प्राचार्य राकेश कुमार पांडे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के स्वर्णिम इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और हमारे प्राचीन ऋषियों-महर्षियों ने हजारों वर्ष पूर्व ही शरीर विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र के ऐसे गूढ़ सिद्धांतों की खोज कर ली थी, जो आज भी प्रासंगिक हैं।
प्राचार्य पांडे ने विशेष रूप से प्राचीन महान ग्रंथों और आचार्यों का उल्लेख किया:
- चरक संहिता का महत्व: उन्होंने महर्षि चरक द्वारा रचित ‘चरक संहिता’ के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि इसमें कायचिकित्सा (Internal Medicine) और शरीर की त्रिदोष प्रणाली (वात, पित्त, कफ) का अद्भुत वर्णन है।
- शल्य चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत: उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि महर्षि सुश्रुत को विश्व भर में ‘शल्य चिकित्सा का जनक’ (Father of Surgery) माना जाता है। ‘सुश्रुत संहिता’ में उल्लेखित प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद के ऑपरेशन और विभिन्न शल्य उपकरणों की तकनीकें इस बात का प्रमाण हैं कि प्राचीन भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में संपूर्ण विश्व का नेतृत्व करता था।
“हमारी नई पीढ़ी को अपनी इस महान विरासत पर गर्व होना चाहिए। जब हम अपनी जड़ों से जुड़कर आधुनिक ज्ञान को अपनाएंगे, तभी एक सशक्त और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।”
— राकेश कुमार पांडे, प्राचार्य, पीएम श्री नवोदय विद्यालय
संतुलित आहार-विहार और वैज्ञानिक दिनचर्या पर मार्गदर्शन
जिला आयुष अधिकारी डॉ. अरविंद शर्मा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को किशोरावस्था में शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार-विहार की आवश्यकता पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं है, बल्कि यह शरीर का ईंधन और मन का पोषक है। जंक फूड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचते हुए स्थानीय, ताजा और मौसमी फलों व सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
आरोग्य प्रमुख डॉ. आर.के. सिंह ने सूर्याेदय से पूर्व उठने (ब्रह्म मुहूर्त जागरण), नियमित योग-प्राणायाम और समय पर भोजन करने के वैज्ञानिक आधार को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि मानव शरीर कुदरत की घड़ी (Biological Clock) के अनुसार काम करता है। जब हम प्रकृति के चक्र के विपरीत काम करते हैं, तो शरीर में बीमारियों का प्रवेश होता है।
आरोग्य प्रमुख डॉ. आर.के. सिंह का मुख्य संदेश:
“स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ परिवार बनता है, स्वस्थ परिवार से स्वस्थ गाँव का निर्माण होता है और अंततः यही श्रृंखला एक स्वस्थ और शक्तिशाली राष्ट्र का आधार बनती है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिविर में सीखी गई बातों को न केवल स्वयं अपनाएं बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
स्वास्थ्य परीक्षण शिविर और औषधियों का वितरण
जागरूकता सत्र के पश्चात विद्यालय परिसर में एक विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का संचालन किया गया। इसमें आयुष विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. हसन इकबाल एवं डॉ. बीरबल ने विद्यालय के विद्यार्थियों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया।
शिविर के दौरान चिकित्सकों द्वारा किए गए प्रमुख कार्य:
- सामान्य स्वास्थ्य जाँच: विद्यार्थियों का वजन, हीमोग्लोबिन स्तर, दृष्टि परीक्षण और सामान्य शारीरिक वृद्धि का आकलन किया गया।
- व्यक्तिगत परामर्श: मौसमी बीमारियों, त्वचा संबंधी समस्याओं और पाचन संबंधी शिकायतों से जूझ रहे बच्चों को व्यक्तिगत परामर्श दिया गया।
परीक्षण के उपरांत जिन विद्यार्थियों में पोषण की कमी अथवा सामान्य बीमारियों के लक्षण पाए गए, उन्हें आयुष विभाग की ओर से आवश्यकतानुसार आयुर्वेदिक एवं हर्बल औषधियों का निःशुल्क वितरण किया गया। साथ ही औषधियों के सेवन के तरीकों और परहेज के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
380 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता
इस पूरे आयोजन के दौरान पीएम श्री नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। शिविर में विद्यालय के 380 छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं और आयुष विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने दैनिक जीवन में योग, प्राणायाम और आयुर्वेदिक सिद्धांतों का पालन करने का संकल्प लिया। विद्यालय प्रबंधन ने इस प्रकार के उपयोगी आयोजन के लिए जिला प्रशासन, कलेक्टर और आयुष विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।













