आज का पंचांग: 26 सितंबर 2026, शनिवार | संपूर्ण पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त एवं ग्रह गोचर
तिथि: भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा (रात्रि 10:18 तक, तत्पश्चात आश्विन कृष्ण प्रतिपदा)
दिन: शनिवार
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
शक संवत: 1948 (पराभव)
विशेष पर्व/व्रत: सत्यनारायण व्रत, भाद्रपद पूर्णिमा, पूर्णिमा श्राद्ध
1. आज का पंचांग परिचय (Introduction to Today’s Panchang)
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है— तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। 26 सितंबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है, जो रात्रि 10:18 बजे तक व्याप्त रहेगी। इसके पश्चात आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का शुभारंभ हो जाएगा। आज का दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा, पूर्णिमा व्रत और पितरों के पूर्णिमा श्राद्ध के लिए अति उत्तम माना गया है।
2. सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चंद्र स्थिति (Sun and Moon Timings)
ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और समय-गणना के अनुसार आज सूर्योदय और सूर्यास्त तथा चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय इस प्रकार रहेगा:
| घटना / खगोलीय स्थिति | समय / विवरण |
|---|---|
| सूर्योदय (Sunrise) | प्रातः 06:11 बजे |
| सूर्यास्त (Sunset) | सायं 06:13 बजे |
| चंद्रोदय (Moonrise) | सायं 06:36 बजे |
| चंद्रास्त (Moonset) | प्रातः 06:56 बजे (27 सितंबर) |
| सूर्य राशि | कन्या राशि |
| चंद्र राशि | मीन राशि |
3. पंच-अंग विवरण (Five Limbs of Panchang)
आज के पंचांग के मुख्य पांच अंगों का विस्तृत विवरण नीचे तालिका में प्रस्तुत है:
| अंग | विवरण एवं समयावधि |
|---|---|
| तिथि (Tithi) | भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा (रात्रि 10:18 बजे तक), तत्पश्चात आश्विन कृष्ण प्रतिपदा। |
| वार (Day) | शनिवार (भगवान शनिदेव एवं हनुमान जी की विशेष उपासना का दिन)। |
| नक्षत्र (Nakshatra) | पूर्वा भाद्रपद (प्रातः 11:32 बजे तक), तत्पश्चात उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र। |
| योग (Yoga) | गण्ड योग (दोपहर 01:17 बजे तक), तत्पश्चात वृद्धि योग। |
| करण (Karana) | विष्टि / भद्रा (रात्रि 10:18 बजे तक), तत्पश्चात बव करण। |
4. शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में प्रारंभ किए गए कार्य बिना किसी विघ्न-बाधा के संपन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं:
| शुभ मुहूर्त का नाम | समय सीमा |
|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurta) | दोपहर 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक |
| ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurta) | प्रातः 04:36 बजे से प्रातः 05:24 बजे तक |
| विजय मुहूर्त (Vijaya Muhurta) | दोपहर 02:15 बजे से दोपहर 03:03 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त (Godhuli Muhurta) | सायं 06:13 बजे से सायं 06:37 बजे तक |
| अमृत काल (Amrit Kalam) | प्रातः 07:20 बजे से प्रातः 08:55 बजे तक |
5. अशुभ समय एवं राहुकाल (Inauspicious Timings)
अशुभ समय के दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। इस दौरान धैर्यपूर्वक दैनिक कार्य ही करने चाहिए:
राहुकाल (Rahu Kaal): प्रातः 09:12 बजे से प्रातः 10:42 बजे तक (इस समय में कोई नया कार्य शुरू न करें।)
यमगंड (Yamaganda): दोपहर 01:42 बजे से दोपहर 03:12 बजे तक
गुलिक काल (Gulika Kaal): प्रातः 06:11 बजे से प्रातः 07:41 बजे तक
दुर्मुहूर्त (Dur Muhurtam): प्रातः 06:11 बजे से प्रातः 06:59 बजे तक
6. चौघड़िया मुहूर्त (Daily Choghadiya)
यात्रा, व्यापारिक लेनदेन और सामान्य कार्यों के लिए चौघड़िया का विशेष ध्यान रखा जाता है:
दिन का चौघड़िया (Day Choghadiya):
| चौघड़िया प्रकार | प्रकृति | समय |
|---|---|---|
| शुभ (Shubh) | उत्तम | 06:11 AM – 07:41 AM |
| रोग (Roga) | अशुभ | 07:41 AM – 09:12 AM |
| उद्वेग (Udveg) | अशुभ (राहुकाल) | 09:12 AM – 10:42 AM |
| चर (Chara) | सामान्य | 10:42 AM – 12:12 PM |
| लाभ (Laabh) | उत्तम | 12:12 PM – 01:42 PM |
| अमृत (Amrit) | सर्वोत्तम | 01:42 PM – 03:12 PM |
| काल (Kaal) | अशुभ | 03:12 PM – 04:42 PM |
| शुभ (Shubh) | उत्तम | 04:42 PM – 06:13 PM |
7. आज का पर्व, व्रत एवं धार्मिक महत्व (Festivals and Significance)
आज 26 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास की पूर्णिमा है। हिंदू धर्मग्रंथों में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महात्म्य वर्णित है:
- सत्यनारायण पूजा: पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने और व्रत रखने का विधान है। इस दिन घर में सत्यनारायण स्वामी की कथा कराने से सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- पूर्णिमा श्राद्ध: भाद्रपद पूर्णिमा से ही पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने वाले पितृ पक्ष का अनौपचारिक आरंभ माना जाता है। आज पूर्णिमा तिथि पर दिवंगत हुए पितरों का श्राद्ध व तर्पण किया जाता है।
- शनिवार एवं शनिदेव उपासना: शनिवार के दिन पूर्णिमा का संयोग बनने से आज शनिदेव की पूजा, पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी रहेगा।
8. आज का सरल उपाय (Daily Remedial Measures)
आज शनिवार और पूर्णिमा के पावन संयोग पर सुख और शांति के लिए निम्न उपाय करें:
1. संध्या समय पीपल के वृक्ष के पास तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 परिक्रमा करें।
2. भगवान सत्यनारायण को पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाएं तथा तुलसी दल अर्पित करें।
3. जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द की दाल अथवा वस्त्र का दान करें।













