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PM Modi Tributes Manmohan Singh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर दी श्रद्धांजलि






प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि


राष्ट्रीय समाचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर दी श्रद्धां​जलि; राष्ट्र सेवा और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को किया याद

प्रकाशन तिथि: 26 सितंबर 2026
स्थान: नई दिल्ली
विशेष रिपोर्ट: प्रदेश खबर नेटवर्क

“पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई वर्ष बिताए और समर्पण भाव से राष्ट्र की सेवा की।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर संदेश)

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. सिंह के लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके द्वारा दिए गए बहुमूल्य योगदान की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि डॉ. मनमोहन सिंह ने अपना अधिकांश जीवन सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पित किया और अत्यंत समर्पण व निष्ठा के साथ देश की प्रगति में अपनी भूमिका निभाई। देश की आर्थिक, प्रशासनिक और राजनीतिक संरचनाओं को सुदृढ़ करने में डॉ. सिंह का योगदान हमेशा भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज रहेगा।

“Tributes to our former Prime Minister Dr. Manmohan Singh Ji on his birth anniversary. He spent many years in public life and served the nation with dedication.”

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश और उसका राजनीतिक-सामाजिक महत्व

भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं और दलों के नेताओं के प्रति यह सम्मानपूर्ण रवैया भारतीय राजनीति की उच्च परंपराओं को प्रदर्शित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया यह संदेश दर्शाता है कि व्यक्तिगत और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महान विद्वानों और राजनेताओं का सम्मान सर्वोच्च है।

डॉ. मनमोहन सिंह, जिन्होंने भारत के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 10 वर्षों (2004 से 2014) तक देश का नेतृत्व किया, भारतीय अर्थशास्त्र के उन विरले विचारकों में गिने जाते हैं जिन्होंने संकट के समय में देश की अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने का ऐतिहासिक कार्य किया। प्रधानमंत्री मोदी का यह ट्वीट केवल एक औपचारिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक प्रख्यात अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता एवं निष्ठा के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

डॉ. मनमोहन सिंह का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत (वर्तमान पाकिस्तान का चकवाल जिला) स्थित ‘गाह’ गांव में जन्मे डॉ. मनमोहन सिंह का प्रारंभिक जीवन अत्यधिक संघर्षपूर्ण रहा। विभाजन के समय उनका परिवार भारत आ गया। विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा को कभी बाधित नहीं होने दिया।

  • पंजाब विश्वविद्यालय: उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की और शीर्ष स्थान हासिल किया।
  • कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय: अर्थशास्त्र में उच्च अध्ययन के लिए वे ब्रिटेन गए, जहाँ उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र त्रिपोस (Economics Tripos) की डिग्री प्रथम श्रेणी में प्राप्त की।
  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय: इसके बाद 1962 में उन्होंने प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (नफिल्ड कॉलेज) से अर्थशास्त्र में अपनी डॉक्टरेट (D.Phil) की उपाधि पूरी की। उनकी डॉक्टरेट की थीसिस भारत की निर्यात नीतियों और आर्थिक विकास पर केंद्रित थी, जिसे बाद में एक मानक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया।

अकादमिक सेवा से सिविल सेवा और आर्थिक नीति-निर्माण तक का सफर

डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने करियर की शुरुआत एक प्रख्यात अर्थशास्त्री और शिक्षक के रूप में की। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय और तत्पश्चात देश के प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) में प्रोफेसर के रूप में कई वर्षों तक अध्यापन कार्य किया और युवाओं का मार्गदर्शन किया।

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1970 के दशक में उनकी असाधारण विद्वता को देखते हुए उन्हें भारत सरकार के प्रशासनिक और आर्थिक ढाँचे में शामिल किया गया। इसके बाद उन्होंने भारत सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होकर आर्थिक नीतियों के निर्धारण में अहम भूमिका निभाई:

1972 – 1976: मुख्य आर्थिक सलाहकार

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के रूप में देश की आर्थिक योजनाओं को आकार दिया।

1982 – 1985: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 15वें गवर्नर के रूप में मौद्रिक नीतियों को सुदृढ़ किया और बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों की नींव रखी।

1985 – 1987: योजना आयोग के उपाध्यक्ष

योजना आयोग (Planning Commission) के उपाध्यक्ष के रूप में देश के विकास के पांच वर्षीय मॉडलों पर रणनीतिक कार्य किया।

1987 – 1990: साउथ कमीशन के महासचिव

जेनेवा में विकासशील देशों के अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘साउथ कमीशन’ के महासचिव के रूप में वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक दूरदर्शिता का परिचय दिया।

1991 के ऐतिहासिक आर्थिक सुधार: भारत के उदारीकरण के प्रणेता

डॉ. मनमोहन सिंह के जीवन का सबसे ऐतिहासिक मोड़ साल 1991 में आया। उस समय भारत गंभीर आर्थिक संकट (Balance of Payments Crisis) का सामना कर रहा था। देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो चुका था और भारत दिवालिया होने के कगार पर था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव ने देश को इस अभूतपूर्व भंवर से निकालने के लिए डॉ. मनमोहन सिंह को देश का वित्त मंत्री नियुक्त किया।

वित्त मंत्री के रूप में डॉ. सिंह ने 1991 के आम बजट में ऐसे कठोर लेकिन क्रांतिकारी फैसले लिए, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था का ढांचा हमेशा के लिए बदल दिया। उन्होंने LPG मॉडल (Liberalization, Privatization, Globalization – उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) को लागू किया।

1991 के प्रमुख आर्थिक सुधार:

  • लाइसेंस राज की समाप्ति: उद्योगों पर लगे अत्यधिक सरकारी नियंत्रण और लालफीताशाही को समाप्त कर निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): भारतीय बाजार को वैश्विक कंपनियों के लिए खोला गया, जिससे देश में विदेशी निवेश की बाढ़ आ गई।
  • बैंकिंग और वित्तीय सुधार: शेयर बाजार (SEBI की स्थापना) और बैंकिंग प्रणाली को आधुनिक एवं पारदर्शी बनाया गया।
  • व्यापार नीति में बदलाव: आयात और निर्यात शुल्क को कम करके भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया।

अपने ऐतिहासिक 1991 के बजट भाषण के अंत में डॉ. सिंह ने विक्टर ह्यूगो का प्रसिद्ध कथन उद्धृत किया था: “दुनिया की कोई भी ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती जिसका समय आ चुका है।” (No power on earth can stop an idea whose time has come)। उन्होंने कहा था कि भारत का एक महान आर्थिक शक्ति के रूप में उभरना ऐसा ही एक विचार है।

2004 से 2014: प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल और ऐतिहासिक उपलब्धियां

2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार बनने पर डॉ. मनमोहन सिंह ने भारत के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वे स्वतंत्र भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री बने। इसके पश्चात 2009 के आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करके वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसे दूसरे प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने 5 वर्ष का कार्यकाल सफलता से पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

उनके 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान देश ने न केवल उच्च आर्थिक विकास दर (GDP Growth Rate) हासिल की, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकारों को पहुँचाने के लिए कई ऐतिहासिक कानून भी बनाए।

प्रमुख जनकल्याणकारी पहलें और कानून:

  • सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act, 2005): सरकार और जनता के बीच पारदर्शिता स्थापित करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का मौलिक अधिकार प्रदान किया गया।
  • मनरेगा (MGNREGA, 2005): ग्रामीण भारत में बेरोजगारी दूर करने और आजीविका की सुरक्षा की गारंटी देने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कार्य योजना लागू की गई।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009): 6 से 14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया गया।
  • खाद्य सुरक्षा कानून (National Food Security Act, 2013): देश की दो-तिहाई आबादी को सब्सिडी वाला अनाज देने की कानूनी गारंटी दी गई।
  • भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता (Indo-US Nuclear Deal): राजनीतिक जोखिम उठाते हुए भी उन्होंने भारत को वैश्विक परमाणु ऊर्जा मानचित्र पर एक जिम्मेदार और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

वैश्विक मंदी 2008 में भारत की स्थिरता

साल 2008 में जब संपूर्ण विश्व लेहमन ब्रदर्स के पतन और अमेरिकी बैंकिंग संकट के कारण गहरी आर्थिक मंदी (Global Financial Crisis) की चपेट में था, तब डॉ. मनमोहन सिंह की दूरदर्शी नीतियों और भारतीय वित्तीय प्रणालियों पर रखी गई मजबूत नींव के कारण भारत इस मंदी से काफी हद तक अछूता रहा। वैश्विक स्तर पर अर्थशास्त्रियों ने इस बात के लिए डॉ. सिंह के नेतृत्व और वित्तीय प्रबंधन की भारी सराहना की।

पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

डॉ. मनमोहन सिंह को उनके जीवनकाल में कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है:

  • पद्म विभूषण (1987): सार्वजनिक सेवा और आर्थिक क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिए भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • एडम स्मिथ पुरस्कार (1956): कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा अर्थशास्त्र में उत्कृष्टता के लिए।
  • फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर: यूरोमनी (1993) और एशियामनी (1993, 1994) द्वारा वर्ष के सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री का सम्मान।
  • जवाहरलाल नेहरू जन्मशती पुरस्कार: इंडियन साइंस कांग्रेस द्वारा (1995)।
  • विभिन्न भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों से मानद उपाधियां (Doctorate of Letters)।

सादगी, सौम्यता और निष्ठा का प्रतीक

डॉ. मनमोहन सिंह को उनके राजनीतिक विरोधी भी एक अत्यंत सौम्य, शांत, विनम्र और ईमानदार व्यक्तित्व के रूप में जानते हैं। भारी से भारी दबाव और राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में भी उन्होंने अपनी शालीनता और संयम को कभी नहीं खोया। सार्वजनिक जीवन में उनकी व्यक्तिगत शुचिता और सादगी हमेशा एक मिसाल रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज दी गई यह श्रद्धांजलि इसी महान सोच और राष्ट्र सेवा की उस अविरल यात्रा को नमन है, जिसने आधुनिक भारत की आधारशिला को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। पूरा देश आज पूर्व प्रधानमंत्री को उनकी जयंती पर याद कर रहा है और उनके स्वास्थ्य तथा दीर्घायु होने की कामना कर रहा है—याद करते हुए उस योगदान को जिसने भारत को 21वीं सदी की विश्व अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनाया।


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