भिंड जिले में एक ऐसा अनोखा देवी मंदिर है, जहां करीब 1500 साल पुरानी मान्यता आज भी लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बनी हुई है। यहां माता की मूल प्रतिमा एक कुंड के भीतर विराजमान है, लेकिन मान्यता है कि आज तक किसी ने उनके चेहरे के दर्शन नहीं किए। श्रद्धालु प्रतिमा की पीठ की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की आस लेकर माता के दरबार में माथा टेकते हैं। कोई यहां जवारे चढ़ाता है, तो कोई पालना चढ़ाकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगता है।
दरअसल, हम बात कर रहे हैं भिंड जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर पहूज नदी के किनारे बीहड़ों के बीच स्थित मिहोनी वाली माता मंदिर की।
मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को करीब से जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुँची। ग्रामीणों, मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं से चर्चा की तो सभी ने एक ही बात कही—कुंड में विराजमान माता की प्रतिमा का चेहरा आज तक किसी ने नहीं देखा और यहाँ सदियों से केवल प्रतिमा की पीठ की ही पूजा होती आ रही है।













