ये डायलॉग अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया, लेकिन हिंदी सिनेमा के ऐसे कई यादगार संवादों के पीछे कादर खान की कलम थी। पर्दे पर अपनी अदाकारी और संवादों से कभी हंसाने, कभी रुलाने, तो कभी खलनायक बनकर डराने वाले कादर खान की निजी जिंदगी संघर्षों से भरी थी।
काबुल में जन्मे कादर खान का परिवार अनहोनी के डर से भारत आ गया। बॉम्बे के कमाठीपुरा की तंग गलियों में गरीबी का आलम ये था कि बचपन में उन्हें मस्जिद के बाहर बैठकर भीख मांगनी पड़ी। जिस उम्र में बच्चे खेलते हैं, उस उम्र में कादर खान अपने हुनर को आवाज दे रहे थे। कब्रिस्तान में खड़े होकर फिल्मी डायलॉग बोलते कादर पर एक थिएटरकर्मी की नजर पड़ी और यहीं से उनके रंगमंच तक पहुंचने का रास्ता खुला। आगे चलकर यही हुनर उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित संवाद लेखकों और अभिनेताओं के बीच ले आया।
आज कादर खान की बर्थ एनिवर्सरी पर पढ़िए, संघर्षों से शोहरत तक पहुंचे उस कलाकार की जिंदगी के चुनिंदा किस्से, जिसने पर्दे पर लाखों चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, लेकिन खुद की जिंदगी में कई मुश्किलों का सामना किया-













