टीएस सिंहदेव का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: क्रोनी कैपिटलिज्म और संवैधानिक मूल्यों पर बड़े सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बेहद आक्रामक अंदाज में हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने आधिकारिक हैंडल से तीखे तेवर दिखाते हुए उन्होंने सरकार की नीतियों, कार्यप्रणाली और उद्योग जगत के समीकरणों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सिंहदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की राजनीतिक गलियारों में उद्योग घरानों और सत्ता के शीर्ष गलियारों के बीच आपसी रिश्तों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की वास्तविकता को ‘भूत देखने’ या किसी भ्रम का नाम देकर नकारा नहीं जा सकता, बल्कि कड़वी सच्चाई यह है कि आज पूरा भारत सरकार की चुनिंदा मित्रों और पूंजीपतियों के पक्ष में बनाई गई नीतियों (क्रोनी पॉलिसी) के साए में जकड़ा हुआ है।
अपने आक्रामक संबोधन में टीएस सिंहदेव ने कहा कि इस हकीकत से सरकार भी अच्छी तरह वाकिफ है, उसके चुनिंदा करीबी उद्योगपति और व्यवसायी भी इस सच को जानते हैं, और देश का ईमानदार व्यापारिक वर्ग भी इसे भली-भांति महसूस कर रहा है। सिंहदेव के मुताबिक, आज देश का हर नागरिक उस खतरे को साफ-साफ देख पा रहा है, जिसके प्रति लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से देश को आगाह करते आ रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के उन बयानों को पूरी तरह रेखांकित किया जिसमें उन्होंने देश के आर्थिक संसाधनों के चुनिंदा हाथों में केंद्रित होने और पक्षपातपूर्ण नीतियों के खतरों के बारे में बार-बार चेतावनी दी थी। सिंहदेव का मानना है कि आज की तारीख में राहुल गांधी के वे तमाम अंदेशा और भविष्यवाणियां सच साबित हो रही हैं, जिन्हें सत्ता पक्ष द्वारा पहले नजरअंदाज करने या खारिज करने की कोशिश की जाती थी।
टाटा हाउस के विवाद और मंत्री आवास की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
अपने बयान को और अधिक धार देते हुए टीएस सिंहदेव ने एक बहुत ही सनसनीखेज और सीधा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि आखिर टाटा समूह (टाटा हाउस) के भीतर का कोई कॉर्पोरेट विवाद देश के गृह मंत्री के आधिकारिक आवास पर चर्चा का विषय क्यों बना? सिंहदेव ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि इस तरह की उच्च स्तरीय बैठकों में देश की वित्त मंत्री की मौजूदगी भी रही। उन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आखिर कब से मंत्रियों के निजी और सरकारी ड्राइंग रूम कॉरपोरेट बोर्डरूम के आपसी विवादों को सुलझाने या मध्यस्थता करने के ठिकाने बन गए हैं? यह घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि देश की प्रशासनिक और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल किस तरह से निजी और व्यावसायिक घरानों के अंदरूनी मामलों में दखल देने के लिए किया जा रहा है।
सिंहदेव ने आगे आरोप लगाया कि केंद्र की वर्तमान सरकार ने बार-बार यह साबित कर दिया है कि जो लोग या व्यावसायिक संस्थान उनके निर्देशों के आगे झुकने से इनकार करते हैं या उनकी नीतियों पर सवाल उठाते हैं, उनके साथ क्या सलूक किया जाता है। ऐसे लोगों और संस्थानों को रास्ते पर लाने के लिए हरसंभव दबाव बनाया जाता है, उन्हें डराया-धमकाया जाता है और यदि फिर भी वे नहीं मानते हैं तो उनके प्रतिष्ठानों को गिराने या उन्हें सत्ता के स्तर पर नेस्तनाबूद करने के प्रयास किए जाते हैं। कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि यह कोई काल्पनिक षड्यंत्र का सिद्धांत (कॉन्फिडेंसी थ्योरी) नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट और क्रमिक पैटर्न बन चुका है, जिसे देश की जनता बहुत करीब से देख रही है। सरकार के विरोधियों और असंतुष्टों के खिलाफ जांच एजेंसियों और सत्ता की ताकत का दुरुपयोग अब एक खुला रहस्य बन गया है।
रोजगार के मोर्चे पर नाकामी और कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों का पक्ष
रोजगार और आर्थिक विकास के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया कि सरकार हमेशा यह दावा करती आई है कि उसने भारतीय उद्योग जगत को रोजगार सृजन का एक बहुत बड़ा इंजन बनाया है, लेकिन हकीकत में वे नौकरियां आखिर हैं कहाँ? देश का युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है, डिग्रियां लेकर भटक रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने के बजाय सिमटते जा रहे हैं। सिंहदेव ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इस सरकार ने वास्तव में भारतीय उद्योग जगत और मध्यम वर्गीय व्यापार को सशक्त बनाने का कोई काम नहीं किया है, बल्कि इसके उलट उन्होंने देश की आर्थिक कमान कुछ गिने-चुने चुनिंदा चहेते पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दी है, जो पर्दे के पीछे से सरकार के तमाम इशारे और डोरियां खींचते हैं।
उन्होंने देश के आम व्यापारियों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा कि आज नीतियां देशहित में नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा औद्योगिक घरानों के मुनाफे को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं। यही वजह है कि देश का ईमानदार उद्यमी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और छोटे उद्योगों का दायरा लगातार सिकुड़ता जा रहा है। सरकार के इन कदमों से केवल चंद उद्योगपतियों की संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जबकि देश का आम आदमी और मेहनतकश वर्ग महंगाई और बेरोजगारी की दोहरी चक्की में पिसने को मजबूर हो गया है।
संविधान के प्रति आदर और दोहरे मानदंडों पर प्रहार
बयान के अंत में टीएस सिंहदेव ने मोदी सरकार द्वारा संविधान के सम्मान के दावों पर भी करारा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि इस सरकार के पिछले कार्यकाल और वर्तमान तौर-तरीकों ने पहले ही यह भली-भांति साबित कर दिया है कि संविधान के प्रति उनके मन में कितना “आदर” है—या यूं कहें कि इस बात का पूरी तरह अभाव है। सरकार का पूरा का पूरा रिकॉर्ड खुद इस बात की गवाही देता है कि किस प्रकार संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखा गया है।
सिंहदेव ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन लोगों और सत्ताधीशों का रिकॉर्ड खुद संविधान को ताक पर रखने का रहा हो, उनके मुंह से संवैधानिक मूल्यों और नैतिकता के बड़े-बड़े उपदेश या लेक्चर देना कतई शोभा नहीं देता। देश की जनता अब सब कुछ समझ चुकी है और वह इन खोखले दावों तथा जमीनी हकीकत के फर्क को अच्छी तरह पहचानती है। कांग्रेस पार्टी और उसके नेता इस जनविरोधी और क्रोनी कैपिटलिज्म की व्यवस्था के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहेंगे और देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को बचाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।













