करवा चौथ 2026: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं, सोशल मीडिया पर लिखा- ‘यह पर्व हर दांपत्य जीवन में लाए खुशहाली’
भूपेश बघेल का आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष बधाई संदेश जारी किया। अपने इस संदेश में उन्होंने भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के त्याग, समर्पण और निष्ठा को नमन किया है।
@bhupeshbaghel
यह पावन पर्व हर दांपत्य जीवन में खुशहाली लेकर आए।”
सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा होते ही यह संदेश तेजी से वायरल हो गया। हजारों समर्थकों, महिलाओं और प्रदेशवासियों ने पूर्व मुख्यमंत्री के इस संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया और अपनी शुभकामनाएं साझा कीं।
भारतीय लोक संस्कृति और करवा चौथ का सांस्कृतिक महत्व
करवा चौथ का व्रत भारतीय सनातन परंपरा में दांपत्य जीवन के प्रगाढ़ प्रेम, विश्वास और पारस्परिक समर्पण का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाए जाने वाले इस त्यौहार में सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण कर दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं।
संध्या काल में करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। तत्पश्चात, रात्रि में चंद्रदेव के दर्शन कर, उन्हें अर्घ्य अर्पित करने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री का संदेश इसी पावन परंपरा के मूल्यों को रेखांकित करता है।
करवा चौथ व्रत का मूल संदेश और महत्ता:
- अखंड सौभाग्य की कामना: महिलाएं अपने पति के दीर्घायु और निरोगी जीवन के लिए कठोर निर्जला व्रत धारण करती हैं।
- पारिवारिक सामंजस्य: यह त्यौहार परिवारों में आपसी प्रेम, स्नेह और पारिवारिक एकता के सूत्र को और अधिक मजबूत करता है।
- सांस्कृतिक पहचान: लोक गीतों, १६ श्रृंगार, पूजा-अर्चना और कथा वाचन के माध्यम से यह पर्व भारतीय सांस्कृतिक समृद्धता को जीवित रखता है।
छत्तीसगढ़ में करवा चौथ की धूम: बाजारों से लेकर घरों तक उत्साह
छत्तीसगढ़ राज्य में करवा चौथ को लेकर इस वर्ष अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। राजधानी रायपुर से लेकर सरगुजा संभाग के अंबिकापुर, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरबा, और न्यायधानी बिलासपुर तक के बाजारों में महिलाओं की भारी चहल-पहल दर्ज की गई है। पूजन सामग्री, मिट्टी के करवे, छलनी, मेवे, मिठाइयों और साज-श्रृंगार की दुकानों पर पिछले कई दिनों से ग्राहकों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
प्रदेश के प्रमुख शहरों में पारंपरिक मेहंदी शिविरों और ब्यूटी पार्लरों में भी महिलाओं की भारी भीड़ रही। स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था ने त्यौहार के मद्देनजर बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि व्रती महिलाओं को खरीदारी और आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
लोक कल्याण और महिला सशक्तिकरण से जुड़ता संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों और सांस्कृतिक विचारकों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं द्वारा लोक पर्वों पर दिए जाने वाले बधाई संदेश केवल औपचारिक नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहरों का सम्मान करने का माध्यम बनते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगातार छत्तीसगढ़िया संस्कृति, त्यौहारों और लोक-परंपराओं को प्रोत्साहन देने का कार्य किया है।
अपने कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने तीजा-पोरा, हरेली और अक्ती जैसे पारंपारिक त्यौहारों को व्यापक जन-उत्सव के रूप में स्थापित किया था। करवा चौथ के अवसर पर माताओं और बहनों को दिया गया उनका यह शुभकामना संदेश भी इसी जन-सरोकार और राज्य की महिलाओं के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ में पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय
ज्योतिषाचार्यों और पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, करवा चौथ की पूजा के लिए शाम का समय अत्यंत शुभ माना गया है। प्रदेश के प्रमुख जिलों जैसे रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर में चंद्रोदय का संभावित समय रात्रि 8:00 बजे से 8:30 बजे के मध्य निर्धारित है। महिलाएं चंद्र दर्शन के उपरांत ही अपने व्रत को पूर्ण करेंगी।
प्रदेश खबर की ओर से भी समस्त माताओं और सुहागिन बहनों को करवा चौथ के इस पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह त्यौहार आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और अटूट प्रेम लेकर आए।












