नशे का कारोबार करने वाले अब सिर्फ छोटे विक्रेताओं को आगे कर बच नहीं सकेंगे। पुलिस को नशे की खेप पहुंचाने वालों से लेकर इसके पीछे बैठे बड़े तस्करों और उन्हें पैसा देने वालों तक पहुंचना होगा।
इस अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियां कुर्क होंगी और तस्करी में इस्तेमाल वाहनों को भी जब्त कर नीलाम किया जाएगा। इसके लिए पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर अभियान चलेगा। वहीं, 30 जून 2026 तक जब्त किए गए छह महीने से पुराने नशीले पदार्थों को 31 दिसंबर तक नष्ट करना होगा।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को समीक्षा बैठक में अफसरों को साफ कहा कि कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, नशे के पूरे कारोबार को जड़ से खत्म किया जाए।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने मादक पदार्थों की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर मंत्रालय में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में अफसरों को ये निर्देश दिए। उन्होंने जिलों में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों, जब्ती, संपत्ति कुर्की और तस्करी में इस्तेमाल वाहनों के राजसातीकरण की समीक्षा की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल प्रकरण दर्ज करना नहीं, बल्कि नशे के पूरे आपराधिक और आर्थिक नेटवर्क को खत्म करना होना चाहिए।
गृह मंत्री ने गांजा सहित अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों की विस्तृत मैपिंग करने को कहा। हर मामले में मादक पदार्थों के स्रोत, परिवहन मार्ग, सप्लायर, स्थानीय विक्रेताओं और कारोबार को नियंत्रित करने वालों की पहचान की जाएगी।
उन्होंने कहा कि छोटे पैडलरों पर कार्रवाई के साथ उनके पीछे सक्रिय बड़े कारोबारियों तक पहुंचना जरूरी है। नशे के कारोबार से अर्जित धन और संपत्तियों का पता लगाने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित वित्तीय और विधिक विशेषज्ञों की विशेष समिति गठित करने के निर्देश भी दिए।
सूखे नशे और नशीली दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के लिए ड्रग इंस्पेक्टरों के साथ समन्वय कर मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच की जाएगी। स्कूल-कॉलेजों और युवाओं की आवाजाही वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। नशीले कैप्सूल, प्रतिबंधित दवाओं और नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली सिरिंज-नीडल की अवैध बिक्री पर भी कार्रवाई होगी।

















