एक दिवसीय “उर्वरक जागरुकता कार्यक्रम एवं कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा” का आयोजन

एक दिवसीय “उर्वरक जागरुकता कार्यक्रम एवं कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा” का आयोजन

कोरिया : एक दिवसीय “उर्वरक जागरुकता कार्यक्रम एवं कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा” का आयोजन

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कोरिया 18 अक्टूबर 2021कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया एवं कृषि विभाग, बी.ई.सी. फर्टिलाईजर बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में कलेक्टर श्याम धावड़े के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत उर्वरकों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांरण (डीबीटी) प्रणाली के पांच वर्ष पूर्ण होने पर उर्वरकों के सतत संतुलित उपयोग हेतु एक दिवसीय “उर्वरक जागरुकता कार्यक्रम एवं कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा” का आयोजन किया गया।

एक दिवसीय “उर्वरक जागरुकता कार्यक्रम एवं कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा” का आयोजन

एक दिवसीय “उर्वरक जागरुकता कार्यक्रम एवं कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा” का आयोजन

सीईओ जिला पंचायत दुदावत ने राज्य शासन एवं भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि एवं उद्यानिकी एवं ग्रामीण पंचायत में संचालित योजनाओं के विषय में कृषकों को जानकारी दी। उन्होंने जिले के कृषकों को मृदा के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए उर्वरकों व जैविक खाद का संतुलित उपयोग करने को कहा व केंचुआ खाद के उत्पादन की सराहना की।
कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विभाग के उपसंचालक पी.एस. दीवान ने कृषकों को उर्वरकों के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांरण (डीबीटी), पीओएस एवं डिजीटल ट्रांजेक्शन द्वारा उर्वरकों की खरीदी के बारे में जानकारी प्रदान दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया के प्रमुख  डॉ. केशव चन्द राजहंस ने कृषकों को एकीकृत समन्वित पोषक प्रबंधन की जानकारी दी व फसलों पर सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक के उपयोग एवं उसके महत्व, नैनो यूरिया एवं उर्वरकों के लागत को कम करने के बारे में विस्तार से बताया और साथ ही साथ टपक सिंचाई पद्धति एवं फर्टिगेशन विषय पर कृषकों को सम्बोधित किया।

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 कृषि वैज्ञानिक विजय कुमार  ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही खाद एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए कहा जिससे कि पौधों को उचित पोषक तत्व मिलने के साथ वातावरण एवं मनुष्यों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पडे़।कार्यक्रम में कृभको मैनेजर श्री मनीष राठौर द्वारा शासकीय अनुदान को कृषकों को डीबीटी माध्यम से सीधे लाभ देने के बारे में विस्तार से चर्चा किया गया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिषंकर ने असंतुलित उर्वरकों के उपयोग से फसलों पर विपरीत प्रभाव, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं फसल पोषण में मिट्टी परीक्षण का महत्व, जैव उर्वरकों द्वारा बीज उपचार, हरी खाद का उपयोग, केंचुआ खाद, नाडेप कम्पोस्ट का उपयोग, मौसम पूर्वानुमान का कृषि कार्यों में महत्व इत्यादि विषयों पर कृषकों से चर्चा की। मौसम वैज्ञानिक पी.आर. बोबडे़ ने कृषि से सम्बंधित विभिन्न एप जैसे- क्रॉप डाक्टर, मेघदुत, दामिनी एवं मौसम एप्लिकेषन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान जिले के सभी वैज्ञानिकगण, कृषि विभाग एवं उर्वरक कम्पनी के अधिकारी, कर्मचारी एवं सभी विकासखण्डों के कृषक उपस्थित थे।