नगर पंचायत विश्रामपुर का राजस्व रिकॉर्ड में नाम नहीं

गोपाल सिंह विद्रोही इस संबंध में जानकारी के अनुसार विश्रामपुर नगर पंचायत का राजस्व(भू अभिलेख ) रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं होने के कारण यहां विकास की गति कछुआ चाल है। शासन द्वारा प्राप्त अधिकतर विकास मद की राशि रिफंड हो जाती है, इसका मुख्य कारण बिश्रामपुर का अपना कोई राजस्व भूभाग नही । ये बता दे कि ग्राम पंचायत बिश्रामपुर का उन्नयन कर 6 मार्च 2003 को नगर पंचायत तत्कालिक मुख्यमंत्री स्व अजीत जोगी अपने शासनकाल में नगर पंचायत के रूप में अस्तित्व में आया था। 12,367 जनसंख्या वाली नगर पंचायत विश्रामपुर का 15 वार्ड है परंतु इसका कोई अपना भूखंड नहीं है। सतपता,गोरखनाथ (सांवा टीकरा) शिवनंदनपुर ,कुंजनगर आदि ग्रामों का थोड़ा थोड़ा भूखंड के हिस्से से निर्मित नगर पंचायत बिश्रामपुर का अब तक राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं किया गया है। न तो इस ग्राम पंचायत के पास अपना कोई नक्शा है और न ही राजस्व में रिकॉर्ड। नगर पंचायत वासीl लंबे समय से इसका राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कर अपना नक्शा काटने की मांग कर रहे हैं परंतु इस मांग को अब तक पूर्ण न होने के कारण विकास कार्य शिथिल है। जो भी नगर पंचायत के लिए शासन द्वारा विकास कार्य की राशि आवंटित होती है ,अधिकतर धनराशि अपना भूमि न होने के कारण रिफंड हो जाती है या जब भी जब भी बड़े निर्माण के कार्य नगर पंचायत करने की कोशिश करती है तो एसईसीएल बिश्रामपुर कंपनी की भूमि बता कर रुकवा देती है । नगरवासियों ने अफसोस जाहिर किया है कि प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल आसपास की ग्रामों सहित जिले के विभिन्न क्षेत्र में पदार्पण करते हैं परंतु बिश्रामपुर की धरती पर आना मुनासिब नहीं समझते । जिससे यहां की रहवासी काफी मायूसी के साथ ये उम्मीद भी करते हैं कि मुख्यमंत्री संवेदनशीलता के साथ नगर पंचायत विश्रामपुर का राजस्व रिकॉर्ड के (राजस्वअभिलेख) में नगर पंचायत बिश्रामपुर को दर्ज कराने एवं अपना नक्शा कटवाने हेतु जिला प्रशासन को निर्देश दे सकते हैं। उल्लेखनीय है कि नगरवासियों ने अधिवक्ता बलराम शर्मा के माध्यम से पूर्व के कलेक्टरों को इस संबंध मे संबंधित ज्ञापन सौंप चुके हैं, परंतु अब तक इस ओर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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