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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम: महासमुंद में हृदय रोग जांच शिविर, 45 बच्चों को मिला जीवनदायी उपचार

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम: महासमुंद में हृदय रोग जांच शिविर, 45 बच्चों को मिला जीवनदायी उपचार

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महासमुंद, 12 मार्च 2025। महासमुंद जिले के विकासखंड बसना स्थित अग्रवाल नर्सिंग होम में 07 मार्च को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) एवं रूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) से प्रभावित 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में नारायणा हृदयालय एम.एम.आई. हॉस्पिटल, रायपुर के वरिष्ठ पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. किंजल बक्शी और उनकी विशेषज्ञ टीम ने बच्चों के स्वास्थ्य की गहन जांच की।

शिविर का उद्देश्य और सफलता
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें समुचित चिकित्सा उपलब्ध कराना था। यह शिविर जिले के स्वास्थ्य विभाग और नारायणा हृदयालय एम.एम.आई. हॉस्पिटल रायपुर के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिले के विभिन्न स्कूलों और आंगनबाड़ियों से चिरायु दलों द्वारा पूर्व-चिन्हित संभावित हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को शिविर स्थल लाया गया।

कुल 80 बच्चों की निःशुल्क ईको कार्डियोग्राफी और अन्य आवश्यक जांच की गईं, जिनमें से 45 बच्चों को उन्नत चिकित्सा संस्थानों में निःशुल्क सर्जरी के लिए चिन्हांकित किया गया। इनमें से तीन बच्चों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल नारायणा हृदयालय एम.एम.आई. हॉस्पिटल, रायपुर में भर्ती कराया गया।

शिविर में शामिल विशेषज्ञ एवं उनकी भूमिका
शिविर में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. किंजल बक्शी के नेतृत्व में नारायणा हृदयालय एम.एम.आई. हॉस्पिटल, रायपुर की टीम ने अत्याधुनिक ईको कार्डियोग्राफी मशीन की सहायता से जांच की। यह मशीन दिल की संरचना और उसकी कार्यप्रणाली की सटीक जानकारी प्रदान करती है, जिससे रोग की गंभीरता का सही आकलन किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी. कुदेशिया, जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीलू घृतलहरे और विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण साहू के निर्देशन में जिले के चिरायु दलों के चिकित्सक, फार्मासिस्ट, एएनएम और लैब टेक्नीशियन भी इस शिविर में सक्रिय रूप से शामिल रहे। उनके प्रयासों से बच्चों की जांच प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हुई।

चिरायु दलों की महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गठित चिरायु दलों की भूमिका इस शिविर में अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने स्कूलों और आंगनबाड़ियों का दौरा कर संभावित हृदय रोग से ग्रसित बच्चों की पहचान की और उन्हें शिविर तक पहुंचाने में सहायता की। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से उन बच्चों को समय पर उपचार मिला, जिनकी आर्थिक स्थिति के कारण उनके माता-पिता महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे।

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बच्चों और उनके परिवारों के लिए संजीवनी बना शिविर
इस जांच शिविर में हिस्सा लेने वाले कई बच्चों और उनके माता-पिता के चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी। कई अभिभावकों ने बताया कि वे अपने बच्चों के हृदय रोग से बहुत परेशान थे, लेकिन इस शिविर के माध्यम से उन्हें निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा मिली, जिससे उन्हें एक नई आशा मिली है।

अनीता यादव, जिनके 7 वर्षीय बेटे का ईको कार्डियोग्राफी परीक्षण किया गया, ने कहा, “मेरा बेटा कई महीनों से सांस लेने में दिक्कत और कमजोरी महसूस कर रहा था। हमने कई जगह दिखाया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण बड़ी जांच नहीं करा पाए। इस शिविर में पूरी जांच मुफ्त में हुई और हमें बताया गया कि मेरे बेटे को उन्नत इलाज की जरूरत है। अब वह जल्द ही ऑपरेशन के लिए रायपुर जाएगा। हम बहुत आभारी हैं।”

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और इसकी व्यापकता
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकारों, पोषण संबंधी कमियों, बीमारियों और विकास संबंधी देरी को समय पर पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार सुनिश्चित करना है। इस योजना के अंतर्गत देशभर में स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन किया जाता है, ताकि वंचित वर्ग के बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त हो सकें।

महासमुंद में आयोजित इस शिविर की सफलता से प्रेरित होकर स्वास्थ्य विभाग ने आगे भी ऐसे शिविरों के आयोजन की योजना बनाई है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को लाभ मिल सके।

भविष्य में स्वास्थ्य शिविरों की योजना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत भविष्य में भी इसी तरह के शिविर आयोजित किए जाएंगे। अगला शिविर अप्रैल माह में प्रस्तावित है, जिसमें जिले के अन्य विकासखंडों से बच्चों की जांच की जाएगी। विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचकर उन्हें निःशुल्क उन्नत चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत महासमुंद में आयोजित इस हृदय रोग जांच शिविर ने जरूरतमंद बच्चों को जीवनदायी उपचार प्रदान कर उनके बेहतर भविष्य की राह प्रशस्त की है। इस पहल ने यह साबित कर दिया कि उचित योजना और समर्पित प्रयासों से समाज के वंचित वर्ग को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह शिविर न केवल प्रभावित बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ, बल्कि उनके माता-पिता को भी एक नई उम्मीद दी है कि उनके बच्चे स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकेंगे।

Ashish Sinha

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