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संसद भवन का मुरैना कनेक्शन : 64 योगिनी मंदिर जैसा ही डिजाइन,नए के शिलान्यास के साथ हो रही इसकी चर्चा

नई दिल्ली। NATIONAL NEWS : मध्यप्रदेश के प्राचीन और भव्य 64 शिवलिंग वाले गोलाकार चौसठ योगिनी शिव मंदिर के बारे में। इस मंदिर की बड़ी खासियत यह है कि भारतीय संसद की इमारत इसी मंदिर से प्रेरित है। मुरैना जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर मितावली गांव में स्थित यह मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में नए संसद भवन का शिलान्यास किया है। नए भवन के शिलान्यास के साथ एमपी के एक मंदिर की चर्चा खूब रही है। मौजूदा संसद भवन का डिजाइन 64 योगिनी मंदिर से लिया गया था। इसका निर्माण सन 1323 में और संसद भवन का निर्माण 1927 में किया गया था।

मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में चौसठ योगिनी मंदिर स्थित है। यह मंदिर मुरैना जिले में आता है। ग्वालियर शहर से 40 किलोमीटर दूर है। बताया जाता है कि इस मंदिर से मौजूदा संसद भवन का डिजाइन मेल खाता है। कहा जाता है कि अंग्रेज आर्टिटेक्ट ने इस मंदिर का डिजाइन देख कर ही संसद भवन का निर्माण करवाया था। हालांकि इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। लेकिन इसकी चर्चा खूब होती है। साथ ही गौर से देखने पर मौजूदा भवन इस मंदिर के अनुरूप ही दिखता है। नए भवन के शिलान्यास के साथ ही इस मंदिर की चर्चा भी फिर से शुरू हो गई है।

चौसठ योगिनी मंदिर मुरैना जिले के पडावली के पास मितावली गांव में स्थित है। यह क्षेत्र केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का है। मंदिर का निर्माण कच्छप राजा देवपाल ने कराया था। उस समय में मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने का स्थान था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने मंदिर को 1951 में ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया था। अब पुरातत्व विभाग ही इसकी देखभाल करता है।

एकट्टसो महादेव मंदिर के नाम से भी मशहूर

मुरैना जिले में चौसठ योगिनी मंदिर को एकट्टसो महादेव मंदिर भी कहा जाता है। करीब 100 फीट ऊंची एक अलग पहाड़ी के ऊपर यह मंदिर स्थित है। मंदिर के ऊपर से नीचे का नजारा काफी भव्य दिखता है। वहीं, मंदिर के हर कक्ष में शिवलिंग है, इसलिए इसका नामकरण एकट्टसो महादेव मंदिर भी किया गया है।

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क्यों कहते हैं चौसठ योगिनी मंदिर

मौजूदा संसद भवन की तरह ही यह मंदिर गोलाकार है। जानकारी के अनुसार भारत में गोलाकार मंदिरों की संख्या बहुत कम है। यह मंदिर चौसठ योगनियों को समर्पित है। इस मंदिर के अंदर 64 छोटे-छोटे कक्ष हैं। मंदिर की सरंचना इस प्रकार है कि कई भूकंप के झटके झेलने के बाद भी यह सुरक्षित है। गोल आकार और निर्माण शैली की वजह से ही लोग इसकी तुलना मौजूदा संसद भवन से करते हैं।

मौजूदा संसद भवन का कनेक्शन

कहा जाता है कि ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस ने इस मंदिर को आधार मानकर दिल्ली के संसद भवन का निर्माण करवाया था। लेकिन इसकी चर्चा किताबों या सरकारी दस्तावेजों में कहीं नहीं है। मौजूदा संसद भवन का निर्माण 93 साल पहले हुआ था। संसद भवन और चौसठ योगिनी मंदिर में कई समानताएं हैं। मंदिर 101 खंभों पर और संसद भवन 144 खंभों पर टिका हुआ है। वहीं, इस मंदिर में 64 और संसद भवन में 340 कक्ष हैं। संसद भवन की तरह इस मंदिर में भी एक विशाल कक्ष है।


तंत्र विद्या के लिए लोग आते थे यहां

यह मंदिर एक समय में तंत्र विद्या के लिए भी काफी मशहूर रहा है। उस समय इस मंदिर को तांत्रिक यूनिवर्सिटी भी कहा जाता था। यहां तंत्र विद्या के लिए विदेशी भी आते थे। बताया जाता है कि आज भी कुछ तांत्रिक, सिद्दियां प्राप्त करने के लिए यज्ञ करते हैं।

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