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सूरजपुर : कोरोना के नियंत्रण में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की महत्वपूर्ण भूमिका!

जिले में 2532 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लगे हैं कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में

*पॉजिटिव व्यक्ति के 48 से 72 घंटे के भीतर संपर्क में आए लोगों का चिन्हांकन, जांच और आइसोलेशन के साथ दवा* *किट भी दिया जा रहा*

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गोपाल सिंह विद्रोही प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़ /वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के रोकथाम, बचाव व फैलाव को रोकने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा निरंतर जन जागरूकता फैलाने कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्री राहुल देव, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग श्री चंद्रवेश सिसोदिया के मार्गदर्शन में कोरोना के चेन को तोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जो हम सभी के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसमें से कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिले में व्यापक स्तर पर संचालित किए जा रहे कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री चंद्रवेश सिसोदिया ने बताया कि जिले भर में संचालित कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में जिला व परियोजना कार्यालय के लगभग 40 कर्मचारी, सभी सीडीपीओ, पर्यवेक्षक 54, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 1938 व सहायिका 500 इस तरह लगभग 2 हजार 532 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिले में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग टीम बनाकर पॉजिटिव पाए गए लोगों के नजदीकी संपर्क में आए व्यक्तियों के स्वास्थ्य की जानकारी ली जा रही है। लक्षण दिखने पर कोरोना जांच भी कराई जा रही है। संपर्क में आए व्यक्तियों को संक्रमण से बचाव के लिए गाईडलाइन के मुताबिक दवा किट दी जा रही है। संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के लिए उन्हें आइसोलेट भी किया जा रहा है। कोरोना जांच के बाद संक्रमित पाए जाने पर होम आइसोलशन या कोविड अस्पताल या कोविड केयर सेंटर में उनके पूर्ण उपचार की व्यवस्था भी की जा रही है।
लगातार बढ़ते संक्रमण दर को रोकने और संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग से बहुत मदद मिल रही है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा अन्य विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। जिले में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग श्री चंद्रवेश सिसोदिया को कांटेक्ट ट्रेसिंग का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जिला स्तर पर निगरानी कर रहे नोडल अधिकारी श्री चंद्रवेश सिसोदिया ने बताया कि प्रदेश में कोरोना महामारी की शुरूआत के साथ ही संक्रमितों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग भी शुरू कर दी गई थी। कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए बचाव के उपायों और इलाज के साथ ही संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का चिन्हांकन तथा उनमें लक्षण दिखने पर या उच्च जोखिम वाले लोगों की तत्काल जांच जरूरी है ताकि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके। उन्होंने बताया कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग टीम द्वारा कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के 48 से 72 घंटे के भीतर संपर्क में आए लोगों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
कोरोना संक्रमण की दर को नियंत्रित करने और संक्रमण की कड़ी तोड़ने मरीज के संपर्क में आए व्यक्तियों का चिन्हांकन कर, प्राथमिकता तय कर सैंपलिंग और आइसोलेशन किया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि चार-पांच कोरोना संक्रमितों के संपर्क में करीब 30 लोग आते हैं। इनमें कुछ लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा और कुछ में कम होता है। संक्रमित के संपर्क में आए ऐसे लोग जिनमें किसी तरह के लक्षण दिख रहे हैं या ज्यादा जोखिम वाले वर्ग जैसे 60 वर्ष से अधिक के व्यक्ति, गुर्दा रोग, कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग इत्यादि से ग्रसित एवं गर्भवती महिलाओं का सैंपल लेकर आइसोलेट करने की कार्यवाही की जाती है। ऐसे कॉन्टैक्ट जिनमें किसी तरह के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं, उन्हें छह दिनों बाद कोरोना जांच के लिए सैंपल देने कहा जाता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री चंद्रवेश सिसोदिया ने बताया कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में समुदाय और पॉजिटिव पाए गए मरीजों का सहयोग बहुत जरूरी है ताकि संपर्क में आए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जा सके और उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके।

Ashish Sinha

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