
राजस्थान:किशनगढ़–बालावास रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण: लंबी लूप लाइन और DEI सिस्टम से सशक्त रेल संचालन
राजस्थान के किशनगढ़–बालावास स्टेशन पर लंबी लूप लाइन और डिस्ट्रीब्यूटेड इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (DEI) सिस्टम कार्य पूरा। रेलवे संचालन सुरक्षित, सुचारू और यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगा।
किशनगढ़–बालावास स्टेशन – सशक्त रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में बड़ा कदम
किशनगढ़–बालावास, भारतीय रेलवे लगातार अपने नेटवर्क को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लागू कर रहा है। इसी क्रम में किशनगढ़–बालावास रेलवे स्टेशन, राजस्थान का आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। रेलवे मंत्रालय ने हाल ही में इस परियोजना के पूरा होने और इसके महत्व के बारे में जानकारी दी।
किशनगढ़–बालावास स्टेशन राजस्थान के प्रमुख जिलों के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्टिंग पॉइंट है। यह स्टेशन न केवल स्थानीय यात्रियों के लिए सुविधा प्रदान करता है, बल्कि पूरे रेलवे नेटवर्क में ट्रेनों के सुचारू संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रेल मंत्रालय ने बताया कि स्टेशन पर लंबी लूप लाइन और डिस्ट्रीब्यूटेड इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (DEI) सिस्टम के काम को पूरा कर लिया गया है।
- लंबी लूप लाइन:
- यह लाइन ट्रेनों के आवागमन की क्षमता बढ़ाती है।
- लंबी ट्रेनों के लिए प्लेटफॉर्म पर इंतजार करने के समय को कम करती है।
- स्टेशन पर भीड़ और जाम की स्थिति को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
- डिस्ट्रीब्यूटेड इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (DEI) सिस्टम:
- यह आधुनिक तकनीक रेल संचालन में सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करती है।
- ट्रेनों के बीच सिग्नल और स्विचिंग ऑपरेशन को केंद्रीकृत और सुरक्षित बनाती है।
- मानवीय भूल की संभावना कम करने में मदद करती है।
रेल मंत्रालय का कहना है कि इन सुधारों से स्टेशन की रेल यातायात क्षमता में वृद्धि होगी और ट्रेनों का सुरक्षित एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा।
किशनगढ़–बालावास स्टेशन का आधुनिकीकरण केवल तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि यह यात्री अनुभव, सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के लिए भी अहम है।
- यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी:
- लंबी लूप लाइन और DEI सिस्टम के लागू होने से प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का इंतजार कम होगा।
- ट्रेनों की समय पर आगमन और प्रस्थान सुनिश्चित होने से यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा।
- सुरक्षा में सुधार:
- DEI सिस्टम से सिग्नलिंग और स्विचिंग की सुरक्षा बढ़ती है।
- लंबे समय से पुराने और मानवीय नियंत्रण पर निर्भर सिस्टम की जगह आधुनिक तकनीक ने ले ली है।
- रेल संचालन की क्षमता बढ़ेगी:
- लंबी लूप लाइन के माध्यम से अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
- स्टेशन पर ट्रेनों की रफ्तार और आवागमन बेहतर तरीके से प्रबंधित होगा।
- स्थानीय और क्षेत्रीय विकास पर प्रभाव:
- बेहतर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर से यात्रियों और माल परिवहन में सुधार होगा।
- आसपास के छोटे व्यवसाय, होटल और व्यापारिक प्रतिष्ठान इस बदलाव से लाभान्वित होंगे।
रेल मंत्रालय ने किशनगढ़–बालावास स्टेशन के लिए कुछ भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी दी है:
- प्लेटफॉर्म विस्तार और आधुनिक भवन:
स्टेशन भवन का नवीनीकरण और प्लेटफॉर्म का विस्तार किया जाएगा ताकि बढ़ती यात्री संख्या को संभाला जा सके। - सर्कुलेटिंग एरिया और पार्किंग:
स्टेशन परिसर के आसपास वाहनों और पैदल मार्ग को व्यवस्थित करने के लिए सर्कुलेटिंग एरिया और पार्किंग सुविधा का निर्माण होगा। - फुट ओवर ब्रिज (FOB):
प्लेटफॉर्म के बीच सुरक्षित आवाजाही के लिए फुट ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। - स्मार्ट और हरित पहल:
स्टेशन में सोलर पैनल, LED लाइटिंग और ऊर्जा संरक्षण के उपाय लागू किए जाएंगे।
डिजिटल सूचना बोर्ड और स्मार्ट सिक्योरिटी कैमरों के माध्यम से यात्रियों को बेहतर अनुभव और सुरक्षा मिलेगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार किशनगढ़–बालावास स्टेशन का सुधार सशक्त, आधुनिक और सुरक्षित रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण है। मंत्रालय का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में पूरे राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों के रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और स्मार्ट बनें।
रेल मंत्रालय ने इसे ‘सशक्त रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में मजबूत कदम’ बताया है। इसके माध्यम से रेलवे संचालन की दक्षता बढ़ेगी और समय पर ट्रेन संचालन सुनिश्चित होगा।
किशनगढ़–बालावास स्टेशन का आधुनिकीकरण रेल मंत्रालय की यात्रियों के प्रति प्रतिबद्धता और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की रणनीति को दर्शाता है।
- प्लेटफॉर्म की लंबी लूप लाइन और DEI सिस्टम से ट्रेनों का सुरक्षित संचालन संभव होगा।
- यात्रियों के लिए सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ेगी।
- स्टेशन पर बेहतर संचालन और क्षेत्रीय विकास के अवसर बनेंगे।
यह परियोजना राजस्थान के रेलवे नेटवर्क में एक मॉडल स्टेशन के रूप में पहचान बनाएगी। किशनगढ़–बालावास स्टेशन भविष्य में तकनीकी उन्नयन और स्मार्ट स्टेशन पहल का उदाहरण बन सकता है|











