
कैबिनेट फेरबदल से पहले कर्नाटक कांग्रेस में भूचाल: दिल्ली में शुरू हुआ पावर गेम
कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट फेरबदल और पावर शेयरिंग को लेकर CM सिद्धारमैया और DCM डीके शिवकुमार के बीच मतभेद गहराए। दिल्ली में दोनों नेताओं की अलग-अलग मुलाकातों से राजनीतिक हलचल तेज, हाईकमान सक्रिय।
कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ी राजनीतिक हलचल: CM–DCM की अलग-अलग दिल्ली यात्राएं, कैबिनेट फेरबदल पर मतभेद तेज
बिहार चुनाव परिणाम के बाद कर्नाटक कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार दोनों दिल्ली में मौजूद रहे, लेकिन दोनों ने अलग-अलग मीटिंगें, अलग-अलग बयान और अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए—जिससे कांग्रेस हाईकमान भी एक्टिव हो गया है।
कैबिनेट फेरबदल को लेकर मतभेद बढ़ा
कर्नाटक में लंबे समय से यह माना जा रहा है कि CM सिद्धारमैया और DCM डीके शिवकुमार के बीच किसी तरह की पावर-शेयरिंग अंडरस्टैंडिंग है। दोनों नेता सार्वजनिक तौर पर इससे इनकार करते हैं, लेकिन अब जो संकेत मिल रहे हैं, वे साफ बताते हैं कि सबकुछ सामान्य नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक—
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सिद्धारमैया दिसंबर सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार/फेरबदल चाहते हैं।
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डीके शिवकुमार इससे पूरी तरह सहज नहीं हैं।
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कुछ नामों को लेकर दोनों नेताओं में असहमति बनी हुई है।
डीके शिवकुमार का शांत लेकिन अर्थपूर्ण रुख
कुछ दिन पहले मंत्री ज़मीर अहमद खान ने बयान दिया था कि “2028 में डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बन सकते हैं”।
इस पर डीके शिवकुमार ने कहा—
“मुख्यमंत्री हैं, रहने दीजिए… हम सब साथ हैं।”
यह बयान भले ही शांत दिखे, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे उनकी टकराव की छवि से बचने की रणनीति माना जा रहा है।
DCM का हैदराबाद दौरा रद्द करना और दिल्ली में राहुल गांधी से अलग से समय मांगना भी संकेत देता है कि मामला गंभीर है। उनके भाई डीके सुरेश भी रविवार को दिल्ली पहुंच चुके हैं।
सिद्धारमैया की रणनीतिक मीटिंग्स और PM से मुलाकात
CM सिद्धारमैया भी लगातार दिल्ली दौरे पर हैं।
15 नवंबर को वे राहुल गांधी से मिले और बाहर आकर कहा—
“बात केवल बिहार चुनाव पर हुई है, कैबिनेट फेरबदल पर चर्चा नहीं हुई।”
लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब मुद्दा इतना गर्म हो, और उसका नाम तक न लिया जाए—तो यह खुद ही बताता है कि मामला सतह के नीचे ज्यादा गंभीर है।
सिद्धारमैया शनिवार देर रात बेंगलुरु लौटे, लेकिन सोमवार को वे फिर दिल्ली जाएंगे।
उनकी प्रधानमंत्री मोदी से अपॉइंटमेंट भी तय है, यानी वे सीधे दिल्ली से अपनी राजनीतिक रणनीति मैनेज कर रहे हैं।
हाईकमान ने लिया कंट्रोल — पावर स्ट्रक्चर का ‘रीसेट’ संभव
कांग्रेस हाईकमान लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
सूत्रों के मुताबिक—
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8 दिसंबर सत्र से पहले कोई कैबिनेट फेरबदल नहीं होगा।
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नेतृत्व या कैबिनेट में संरचनात्मक बदलाव मकर संक्रांति के बाद होने की संभावना है।
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फिलहाल हाईकमान दोनों नेताओं को शांत रखकर पार्टीनुमा संतुलन बनाए रखने में जुटा है।











