कर्नाटक में कांग्रेस नेताओं ने शेट्टार से मुलाकात कर एकजुटता जताई

कर्नाटक में कांग्रेस नेताओं ने शेट्टार से मुलाकात कर एकजुटता जताई

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उमेश प्रधान /न्यूज रिपोर्टर/ भाजपा से कांग्रेस में आए कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार भले ही विधानसभा चुनाव हार गए हों, लेकिन कांग्रेस अपनी जीत में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें बड़ी भूमिका देने की तैयारी में है।
पार्टी आलाकमान के निर्देशानुसार वरिष्ठ नेताओं- पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने मंगलवार को शेट्टार से उनके आवास पर मिले और समर्थन देने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

शेट्टार ने मीडिया को बताया कि यह सौहार्दपूर्ण मुलाकात रही। उन्होंने कहा, मैंने 15 निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस के लिए प्रचार किया था।

उन्होंने कहा कि लिंगायत समुदाय को अपमानित करने के कारण भाजपा सत्ता से बाहर हो गई है। शेट्टार ने कहा, भाजपा को यह बताना चाहिए कि उन्होंने (बी.एस.) येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए क्यों कहा? येदियुरप्पा की आंखों में आंसू थे। मुझे टिकट न देकर अपमानित किया गया। इन सबका नतीजा भाजपा की हार के रूप में सामने आया।

शेट्टार हुबली-धारवाड़ सेंट्रल सीट से भाजपा उम्मीदवार महेश तेंगिनाकयी से हार गए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शेट्टार को हराने की येदियुरप्पा को दी थी, क्योंकि वह भाजपा से कांग्रेस में चले गए।

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येदियुरप्पा हुबली में तैनात थे और शेट्टार की हार सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से बैठकें करते थे। उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि वह खून से लथपथ होकर शेट्टार को हरा देंगे। हालांकि कांग्रेस ने शेट्टार को स्टार प्रचारक बनाया था।

शेट्टार ने उत्तर कर्नाटक का दौरा किया था और बताया कि भाजपा ने उन्हें कैसे अपमानित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लिंगायत नेतृत्व को खत्म करना चाहती है। नुकसान हो चुका था और भाजपा का लिंगायत वोट बैंक बंटकर कांग्रेस की तरफ चला गया था।

लिंगायत वोटों को विभाजित रखने और इसका एक बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए कांग्रेस ने अब अपने मिशन को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। सूत्रों का कहना है कि चूंकि भाजपा शेट्टार को राजनीतिक रूप से खत्म करना चाहती है, इसलिए कांग्रेस चाहती है कि शेट्टार को बड़ी भूमिका देकर उनका महत्व कायम रखा जाए। इससे शेट्टार के हौसले बुलंद हो गए हैं और उन्होंने भाजपा पर नए हमले शुरू कर दिए हैं।

उन्होंने प्रह्लाद जोशी और निर्मला सीतारमण को महत्वपूर्ण पद देने और अन्य समुदायों को कम महत्वपूर्ण विभाग आवंटित करने के भाजपा नेतृत्व के विवेक पर भी सवाल उठाया था।