हिंदू सम्राट महाराणा प्रताप की 485वी जयंती पर क्षत्रिय बंधुओ ने दी श्रद्धांजलि!

महाराणा प्रताप की युद्ध कौशल से अकबर थर्र थर्र कांपता था -इं विनय सिंह

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गोपाल सिंह विद्रोही //प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़//बिश्रामपुर- हिंदू सम्राट महाराणा प्रताप जी की 485 वीं जयंती के अवसर पर क्षत्रिय बंधुओ ने एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

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। जानकारी के अनुसार हिंदू सम्राट राष्ट्र भक्त परम पूज्य वीर महाराणा प्रताप के 485 वीं जयंती पर क्षत्रिय महा सभा के सदस्यों ने एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जिसमें क्षत्रिय बंधुओ ने महाराणा प्रताप जी की छाया चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला ।
क्षत्रिय भवन में आयोजित कार्यक्रम पर समाज के वरिष्ठ इंजीनियर विनय सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप जी का जन्म 1540 में राजस्थान प्रांत के मेवाड़ में एक राजपूताना परिवार में हुआ था, उनके पिता उदय प्रताप सिंह जी द्वितीय एवं माता महारानी जयंती जी के आंगन में हुआ था। महाराणा प्रताप जी एक हिंदू एवं राजपूत सम्राट के रूप में अपनी पहचान बनाई, उनकी गौरव गाथा से भारतीय इतिहास भरा पड़ा है। महाराणा प्रताप जी कि पराक्रम से मुंगल साम्राज्य हिल जाता था ऐसे महापुरुषों को देश एवं हिंदू समाज सदैव कृतज्ञ रहेगा। इस अवसर पर रमाशंकर सिंह ने कहा कि भारतीय इतिहास को तोड़ मरोड़ कर रख दिया है गलत जानकारियां दी है आज हम उसे सुधार कर नहीं गलत तरीके से आज भी हम पढ़ रहे हैं। सही इतिहास को मुगल एवं अंग्रेजों ने तोड़ मरोड़ कर अपनी अपनी गौरव गाथा को बढ़ा चढ़ा कर परोसा है जिसे भारतीय इतिहास नेपथ्य में चला गया। सच्चाई यह है कि महाराणा प्रताप का छाती का कवच 72 किलो के साथ-साथ उनकी दो तलवारे दो भला सभी का मिला कर कुल का वजन म 208 किलो का होता था। महाराणा प्रताप जी कि उच्चाई 7 फीट 5 इंच कि थी जब वे हाथी की चाल चलते थे तो दुश्मन कि सेना में भगदड़ मच जाती थी। ऐसे थे हमारे राणा जी। राजपूत समाज कृतज्ञ है तथा उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए खुद को गौरवान्वित महशूष करता है। क्षत्रिय समाज के गोपाल सिंह विद्रोही ने इस अवसर पर महाराणा प्रताप की गौरव गाथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाराणा प्रताप जब तक जीवित रहे मंगल सेना कि युद्ध में दांत खट्टे करते रहे उन्होंने घास की रोटी खाई जंगल जंगल भटकते रहे परंतु अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की, महाराणा प्रताप जी ने जब बलिदान दी तो उनकी शहीदी पर अकबर ने भी आंसू बहा दी थी। राणा प्रताप की यही खासियत थी कि उनकी कट्टर दुश्मन भी उनके बलिदान पर आंसू बहाए और श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। महाराणा प्रताप भारत के गौरव थे। राणा प्रताप आज के युवाओं के लिए राष्ट्र प्रेम की जागृति लाने के लिए प्रेरणा स्रोत है ।श्रद्धांजलि अर्पण कार्यक्रम में सुनील सिंह, रमेश सिंह, दीपेंद्र सिंह ,सुशील सिंह, प्रेमचंद सिंह , संजय सिंह, रंजन सिंह ,अंकित सिंह चौहान , अवनीश सिंह आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित थे।