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पंचायती चुनाव नजदीक आते ही ग्रामीण नेता आंदोलन करना शुरू की

एसडीम जगन्नाथ वर्मा के समझाईस पर आंदोलन स्थगित कोयला उत्पादन शुरू

गोपाल सिंह विद्रोही //प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़//बिश्रामपुर //सूरजपुर// एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के भूमिगत गायत्री खदान में बीते 4 सितंबर से भूमि के बदले नौकरी ,मुआवजा कि मांग को ले कर ग्रामीणों ने खदान के गेट में तालाबंदी कर दी जिससे कंपनी को खदान में चार पालियों से कोयला का उत्पादन नहीं हो सका जिससे प्रबंधन को काफी नुकसान उठाना पड़ा। आज आंदोलन के दूसरे दिन ग्राम पंचायत मानी, गेतरा, जोबका, केतका आदि पंचायत के सरपंच ग्रामीणों को आगे कर गायत्री खदान के गेट में ताला बंद कर कोयला का उत्पादन बंद कर दिया। ग्रामीणों ने भूमि के बदले नौकरी और मुआवजा की मांग कर रहे थे ।आंदोलन के आज दूसरे दिन एसडीएम सूरजपुर जगन्नाथ वर्मा, सह क्षेत्र प्रबंधक, खान प्रबंधक, सर्व अधिकारी एवं ग्रामीणों की संयुक्त बैठक हुई जिसमें एसडीएम जगन्नाथ वर्मा ने स्पष्ट कहा कि जिन ग्रामीणों को जमीन एसईसीएल अधिग्रहण की है उनकी नौकरी मिलेगी परंतु जायज भूमि स्वामियों को ही जायज भूमि पर नौकरी दी जाएगी ।नाजायज मांगो से ग्रामीण परहेज करें। एसडीम श्री वर्मा ने कहा कि सभी भू स्वामी अपना दस्तावेज लेकर आगामी 19 सितंबर की बैठक में उपस्थित हो ताकि उनकी कागजों की जांच हो सके तब तक अपना आंदोलन समाप्त करें । ग्रामीणों ने एसडीएम के आश्वासन पर अपना आंदोलन समाप्त किया ।बताया जाता है कि गेतरा ग्राम पंचायत की सरपंच गिरधारी को छोड़कर मानी , जोबगा , केतका के ग्रामीण कल 4 सितम्बर को ही आंदलन स्थल से वापस चल दिए थे केवल गेतरा सरपंच गिरधारी सिंह ही अपने ग्राम के ग्रामीणों के साथ आंदोलन पर आज भी बैठ रहा। इस संबंध में इन ग्राम पंचायत का एक बड़ा वर्ग का आंदोलनकारी पर आरोप है कि यह मौसमी आंदोलनकारी है जब-जब ग्राम पंचायत की चुनाव की तिथियां आती हैं तब तब इनका आंदोलन तेज हो जाता है। 4 वर्षों तक यह सब बैठे रहते हैं अब ग्राम पंचायत चुनाव की तिथि दिसंबर में होना है तो ग्रामीणों को गुमराह कर खदानों को बंद करने का नीति अपना कर ग्रामीणों को भ्रमित करने के सिवाय कुछ भी नहीं है। इन ग्रामीणों ने बताया कि एसईसीएल प्रबंधन संबंधित भूमि स्वामियों को नौकरी देते हुए आ रही है परंतु जो ग्रामीण भूमि स्वामी आवश्यक दस्तावेज नहीं प्रस्तुत किए हैं उन्हीं का प्रकरण विचाराधीन है जबकि प्रबंधन बार-बार भू स्वामियों से दस्तावेज की मांग कर रही है परंतु भू स्वामी सही दस्तावेज प्रबंधन को उपलब्ध नहीं कर पा रहे हैं इसी कारण से उनके नौकरी देने में विलंब हो रहा है ।आज की बैठक में इसी विषय पर चर्चा हुई और एसडीएम नहीं स्पष्ट शब्दो में कहा कि आप सब अपना जमीन से संबंधित कागजात 19 सितंबर को होने वाली बैठक में लेकर पहुंचे ।सही दस्तावेज होने पर नौकरी एवं मुआवजा एसईसीएल प्रबंधन देगी। बहरहाल गायत्री खदान में आंदोलनरत ग्रामीणों ने एसडीएम की समझाइए पर अपना आंदोलन वापस लिया। तथा गायत्री खदान में जारी हड़ताल समाप्त कर मुख्य द्वार का गेट खोल दिया तब जा कर उत्पादन एवं डिस्पैच प्रारम्भ हुआ परंतु चार पालियों में कोयला का उत्पादन एवं डिस्पैच न होने के कारण प्रबंधन को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। इस दौरान एसईसीएल विश्रामपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी अमरेंद्र नारायण सिंह अपने दलबल के साथ मुस्तैद रहे।

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