भारत की विकास यात्रा पर्यावरण संरक्षण से गहराई से जुड़ी हुई है: जयशंकर

भारत की विकास यात्रा पर्यावरण संरक्षण से गहराई से जुड़ी हुई है: जयशंकर

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नयी दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जैव विविधता की रक्षा में जनजातीय समुदायों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत की विकास यात्रा पर्यावरण संरक्षण से गहराई से जुड़ी है।

जयशंकर ने बृहस्पतिवार को यहां ‘इंडिया हैबिटेट सेंटर’ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 1973 में शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की भी प्रशंसा की, जनजातीय कला प्रदर्शनी, “साइलेंट कन्वर्सेशन: फ्रॉम द मार्जिन्स टू द सेंटर” (मौन संवाद: हाशिये से केंद्र तक)।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है, यह सफलता का एक शानदार उदाहरण है। जनजातीय समुदाय इसके लिए धन्यवाद के हकदार हैं।‘’

जयशंकर ने कहा कि कला सिर्फ रचनात्मकता नहीं दिखाती, बल्कि एक “गहरा संदेश देती है, जो प्रकृति और मानवता के बीच की खाई को पाटता है… बाघों से लेकर जनजातीय समुदायों तक।”‘’

उनका कहना था कि यह प्रदर्शनी दिखाता है कि लोग प्रकृति के साथ पूरी तरह से एकजुट रह सकते हैं और यह बताता है कि जनजातीय समुदाय ने प्रकृति के साथ सहस्राब्दियों से स्थायी संबंध बनाए रखा है।

जयशंकर ने अपने भाषण में “अंत्योदय” (किसी को पीछे नहीं छोड़ना) का विचार व्यक्त किया। “यह सिर्फ एक नीति नहीं है; यह हमारी सरकार की आत्मा और मार्गदर्शक सिद्धांत है,” उन्होंने कहा।‘’

मंत्री ने कहा, ‘‘हम सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें हाशिए पर पड़े समुदाय, विशेषकर हमारी जनजातीय आबादी के उत्थान पर विशेष ध्यान दिया गया है।’’ हम अपने जनजातीय युवाओं को स्थायी आजीविका के साथ-साथ अवसर भी दे रहे हैं, जो नीतियों के माध्यम से किया जाता है।‘’

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उन्हें याद दिलाया गया कि इन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों का जीवन आसान बनाने में “आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम” सहायक रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘भारत की विकास यात्रा पर्यावरण संरक्षण के साथ बहुत गहराई से जुड़ी हुई है।’’‘’

उन्होंने बताया कि कुछ समुदाय बाघों को पूजते हैं और उन्हें कला में चित्रित किया गया है।

जयशंकर ने कहा कि इस प्रदर्शनी को देखने से मन में एक “धरती माता” का भाव आता है और जनजातीय लोगों और पर्यावरण के बीच एक “भावनात्मक संबंध” है।

जयशंकर ने कहा कि इस प्रदर्शनी को देखने से मन में एक “धरती माता” का भाव आता है और जनजातीय लोगों और पर्यावरण के बीच एक “भावनात्मक संबंध” है।

उन्होंने कहा कि एक विदेश मंत्री के रूप में जनजातीय समुदायों द्वारा निर्मित कलाकृतियों को विदेश में उपहार देना मेरे लिए ‘‘गर्व की बात’’ होगी।

बाद में, उन्होंने शो की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” पर पोस्ट कीं।

“आज नयी दिल्ली में जनजातीय कला प्रदर्शनी “साइलेंट कन्वर्सेशन: फ्रॉम मार्जिन्स टू द सेंटर” का उद्घाटन करते हुए मुझे बहुत खुशी हुई,” उन्होंने लिखा। मैंने पर्यावरण संरक्षण, सततता और प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहने के हमारे मूल्यों को दिखाया। हमारे प्रतिभाशाली जनजातीय कलाकारों का अद्भुत काम सराहनीय है। आपको उनका समर्थन करना चाहिए।‘’

इस प्रदर्शनी को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने संकला फाउंडेशन के साथ मिलकर आयोजित किया था, जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस ने भी सहयोग दिया था।