जच्चा और बच्चा की शासकीय मेडिकल कालेज के चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टॉफ के प्रयासों से बचाई गई जान

जच्चा और बच्चा की शासकीय मेडिकल कालेज के चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टॉफ के प्रयासों से बचाई गई जान

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– स्त्रीरोग एवं निश्चेतना विभाग के अथक प्रयास से 13 दिनों तक आईसीयू में उपचार पश्चात मरीज अब पूर्णत: स्वस्थ

– माँ और बच्चा खतरे से बाहर

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राजनांदगांव। शासकीय मेडिकल कालेज के चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टॉफ के प्रयासों से जच्चा और बच्चा की जान बचाई गई। प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग में प्रसव पीड़ा में ग्राम कांकेतरा निवासी श्रीमती गनिता निषाद को भर्ती किया गया। मरीज की गर्भावस्था 39 सप्ताह 1 दिन थी एवं छह साल पूर्व ऑपरेशन द्वारा जचकी किया गया था। परीक्षण के आधार पर मरीज को बच्चादानी फटने की आशंका के कारण तुरंत ऑपरेशन में लिया गया एवं निश्चेतना विभाग द्वारा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनरल एनेस्थिसिया दिया गया। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि मरीज की बच्चादानी बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी एवं मरीज की स्थिति अत्यधिक रक्तस्त्राव के कारण गंभीर हो रही थी। बच्चे को गर्भ से बाहर निकाला गया, बच्चे की हालत गंभीर थी, जिसे ट्यूब डालकर एनआईसीयू भेजा गया। मरीज की स्थिति को देखते हुए एवं मरीज की जान बचाने के लिए बच्चादानी को बाहर निकालने का निर्णय लिया गया। लगभग 3 घण्टे के ऑपरेशन की प्रक्रिया दौरान मरीज की स्थिति अत्यधिक गंभीर थी। मरीज को कृत्रिम श्वसन यंत्र एवं जीवन रक्षक दवाईयों में रखा गया तथा 4 बॉटल खून चढ़ाया गया। सभी दवाईयों एवं मशीन के साथ मरीज को शल्य चिकित्सा के बाद आईसीयू भेजा गया एवं कड़ी निगरानी में रखा गया। 24 घण्टे के अन्तर्गत मरीज की स्थिति में सुधार आया एवं मरीज मशीन से बाहर आ गई। शिशुरोग विशेषज्ञ के प्रयास द्वारा बच्चा भी खतरे से बाहर है। स्त्रीरोग एवं निश्चेतना विभाग के अथक प्रयास से 13 दिनों तक आईसीयू में उपचार पश्चात मरीज अब पूर्णत: स्वस्थ है एवं खतरे से बाहर है। मरीज एवं बच्चे का उपचार स्त्रीरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मीना आरमो, सह प्राध्यापक डॉ. सिद्धी सैनिक, सहायक प्राध्यापक डॉ. रत्ना रंगारी, सीनियर रेसीडेन्ट डॉ. अम्बालिका ठाकुर, निश्चेतना विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दुर्गा कोसम, सह प्राध्यापक डॉ. स्मृति बंधु, शिशुरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कोसम एवं सभी पीजी, जूनियर डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ के सहयोग से पूर्ण हुआ।