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रासायनिक खाद से किसान बचें ऑर्गेनिक खाद पुरानी परंपरागत खेती कार्य में करें उपयोग -पार्वती सरौता

रासायनिक खाद से किसान बचें ऑर्गेनिक खाद पुरानी परंपरागत खेती कार्य में करें उपयोग -पार्वती सरौता

ऑर्गेनिक खाद के उपयोग हेतु बच्चों को दी जा रही प्रशिक्षण

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गोपाल सिंह विद्रोही /प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़/जयनगर-प्रशिक्षणहमारा देश एक कृषि प्रधान देश है l इसी के चलते स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए कृषि शिक्षा का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है l रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग से पर्यावरण को जो नुकसान हो रहा है lउसे कम करने के लिए पर्यावरण शिक्षा प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है l विद्यालयों मे स्कूल पोषण वाटिका में छात्रों को सब्जियां, फलदार पौधे, औषधि पौधे तथा पेड़ उगाने की पर्यावरण अनुकूल तकनीक सिखाई जाती है l इसके माध्यम से छात्रों की पोषण आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है l इसी तारतम्य में समग्र शिक्षा जिला सूरजपुर के निर्देशानुसार शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुंज नगर की प्रधान पाठक पार्वती सरुता के मार्गदर्शन में यूथ एवं इको क्लब की एस .आर .जी .व शिक्षिका लक्ष्मी सिंह राठौर द्वारा बच्चों को जीवामृत बनाना सिखाया गया l शिक्षिका ने बताया कि लगभग 150 वर्ष पूर्व कृषि उत्पादन मे रासायनिक खाद का उपयोग शुरू हुआ था l जिससे प्रति एकड़ फसल की उत्पादन काफी बढ़ गई थी l लेकिन अब देखा जा रहा है कि रासायनिक खाद की अत्यधिक उपयोग से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों कीसंख्या काफी कम हो जा रही है l ऐसी जमीन धीरे-धीरे बंजर हो जाती है l इसके समाधान के लिए उपस्थित शिक्षकों व छात्र छात्राओं को शिक्षिका द्वारा जीवामृत् बनाना सिखाया गया l जीवामृत् मिट्टी में सूक्ष्म जीवो की संख्या बढ़ाने के लिए उनके भोजन के स्रोत के रूप में कार्य करता है l इससे मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ जाती है l भूमि उपजाऊ हो जाती है l शिक्षिका ने 10 लीटर जीवामृत् बनाने के लिए आवश्यक सामग्री गोबर 1 किलो , गुड़ 100 ग्राम, गोमूत्र 1 लीटर , पानी 8 लीटर , बेसन 100 ग्राम, थोड़ा सा रसायन मुक्त मिट्टी मिलाकर जीवामृत बनाना सिखाया गया l इस मिश्रण को काफी अच्छे से मिलाकर 7 से 8 दिन रख दिया जाता है l इसका उपयोग जब पौधे बढ़ रहे हो तो हर 10 दिन में पौधों पर छिड़काव करें जिससे पौधों का ग्रोथ बढ़ेगा और उत्पादन में भी वृद्धि होगी।

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