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शिशु मृत्यु दर में कमी लाने हेतु गरियाबंद में चिकित्सा अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण

शिशु मृत्यु दर में कमी लाने हेतु गरियाबंद में चिकित्सा अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत शिशु मृत्यु दर कम करने पर दिया गया जोर

गरियाबंद, 28 फरवरी 2025 – राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का प्रमुख उद्देश्य शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करना और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है। भारत में हर साल लाखों शिशु विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं और असामयिक जटिलताओं के कारण काल के गाल में समा जाते हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारें सतत प्रयास कर रही हैं। इसी क्रम में, गरियाबंद जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चाइल्ड डेथ रिव्यू (CDR) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें चिकित्सा अधिकारियों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया।

स्वास्थ्य अधिकारियों का योगदान और प्रशिक्षण का उद्देश्य

इस विशेष प्रशिक्षण का आयोजन कलेक्टर दीपक अग्रवाल के मार्गदर्शन में तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. गार्गी यदु पाल एवं यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह के निर्देशन में किया गया। जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण चिकित्सा सहायक, स्टाफ नर्स, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) एवं ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक इस प्रशिक्षण का हिस्सा बने।

यह प्रशिक्षण जिला पंचायत सभागार में आयोजित किया गया, जहां राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर डॉ. अक्षय तिवारी, डॉ. गीतू हरि, डॉ. सुनील कुमार रेड्डी, डॉ. अंकुश वर्मा एवं श्रीमती अल्का द्विवेदी ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिशु मृत्यु दर में कमी लाने हेतु कारणों की पहचान, उनकी समीक्षा, रिपोर्टिंग और समाधान के लिए कारगर रणनीतियाँ विकसित करना था।

शिशु मृत्यु के कारणों की समीक्षा और रिपोर्टिंग प्रणाली

प्रशिक्षकों ने बताया कि 0 से 59 महीने के आयु वर्ग के सभी बच्चों की मृत्यु की समीक्षा की जानी चाहिए और इसके लिए एक मानकीकृत रिपोर्टिंग प्रपत्र के माध्यम से रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए। मृत्यु घर में हो, स्वास्थ्य केंद्र में हो, या किसी भी अन्य परिस्थिति में हो, उसकी समीक्षा प्रक्रिया समान रूप से लागू होगी।

शिशु मृत्यु की समीक्षा दो स्तरों पर की जाती है—

समुदाय स्तरीय समीक्षा

सुविधा स्तरीय समीक्षा

शिशु मृत्यु की समीक्षा नवजात (0-28 दिन) और शिशु (29 दिन-59 माह) के लिए अलग-अलग की जाती है, जिससे उनके उपचार और बचाव के लिए सही कदम उठाए जा सकें।

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प्रशिक्षकों ने बताया कि शिशु मृत्यु की समीक्षा जल्द से जल्द पूरी करनी चाहिए, ताकि उनके कारणों को समझकर समुचित निवारण किया जा सके। इससे भविष्य में शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियाँ और उनके समाधान पर विशेष चर्चा

प्रशिक्षण के दौरान फील्ड स्तर पर शिशु मृत्यु समीक्षा के दौरान आने वाली समस्याओं और उनके संभावित समाधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टर्स ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि जमीनी स्तर पर काम करने में किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

इस दौरान एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत बच्चों, किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया के कारणों, पहचान और उपचार के संबंध में भी जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों की उपस्थिति और प्रशिक्षण का प्रभाव

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से आए डॉक्टर्स, स्टाफ नर्स और स्वास्थ्य कर्मी शामिल हुए। प्रमुख उपस्थित अधिकारियों में—

डीएचओ डॉ. लक्ष्मीकांत जांगड़े

प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. योगेन्द्र रघुवंशी

एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. शंकर पटेल

डॉ. सृष्टि यदु

शामिल रहे।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर जोर दिया।

शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए भविष्य की रणनीति

सुविधा आधारित नवजात देखभाल इकाइयों को मजबूत बनाना

गर्भवती महिलाओं की बेहतर देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना

समुदाय आधारित जागरूकता अभियान चलाना

प्रसूति और नवजात शिशु की संपूर्ण स्वास्थ्य निगरानी

एनीमिया, कुपोषण और संक्रमण रोकथाम पर विशेष ध्यान देना

समीक्षा और रिपोर्टिंग प्रणाली को प्रभावी बनाना

शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। गरियाबंद में आयोजित यह प्रशिक्षण न केवल जिले के स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता को बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि यह भविष्य में शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस तरह की पहल से यह उम्मीद की जा सकती है कि सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के सहयोग से भारत जल्द ही शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में सफल होगा।

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