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अब नहीं चलेगी बिल्डरों की मनमानी! छत्तीसगढ़ रेरा के नए नियम से घर खरीदारों को बड़ा फायदा

बिल्डरों की मनमानी पर लगेगी लगाम! छत्तीसगढ़ रेरा के नए नियम से घर खरीदारों को मिलेगी बड़ी राहत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा को लेकर नए कड़े नियम जारी किए हैं। खासकर, कॉलोनियों और फ्लैट्स के मेंटनेंस और हस्तांतरण से जुड़े प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों के तहत, अब बिल्डरों को मनमानी करने की छूट नहीं मिलेगी और उन्हें तय समयसीमा में मेंटनेंस और संपत्ति हस्तांतरण की जिम्मेदारी पूरी करनी होगी।

इस रिपोर्ट में हम रेरा के नए नियमों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे, उनके संभावित प्रभावों पर चर्चा करेंगे और जानेंगे कि यह बदलाव घर खरीदारों के लिए कितने फायदेमंद होंगे।

क्या हैं छत्तीसगढ़ रेरा के नए नियम?

छत्तीसगढ़ रेरा ने नए दिशा-निर्देश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि अब बिल्डरों को परियोजना पूरी होने के बाद भी अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भागने दिया जाएगा। खासतौर पर, मेंटनेंस चार्ज, सुविधाओं का रखरखाव और संपत्ति के स्वामित्व के हस्तांतरण को लेकर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं।

1. मेंटनेंस से जुड़े नए नियम

रेरा के अनुसार, अब बिल्डरों को मेंटनेंस को लेकर निम्नलिखित दिशानिर्देशों का पालन करना होगा:

स्पष्ट मेंटनेंस चार्ज: किसी भी प्रोजेक्ट को लॉन्च करने से पहले बिल्डर को यह स्पष्ट करना होगा कि ग्राहकों से कितने मेंटनेंस चार्ज लिए जाएंगे और यह राशि किन सुविधाओं पर खर्च की जाएगी। इससे बिल्डरों द्वारा मनमाने शुल्क वसूली पर रोक लगेगी।

परियोजना की देखरेख: जब तक हाउसिंग सोसाइटी या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) का गठन नहीं हो जाता, तब तक डेवलपर को परियोजना की साफ-सफाई, सुरक्षा, लिफ्ट मेंटनेंस, बिजली आपूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं की देखरेख करनी होगी।

एस्क्रो खाता की अनिवार्यता: मेंटनेंस शुल्क को लेकर पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, बिल्डरों को ग्राहकों से लिए गए पैसे को एक अलग एस्क्रो खाते में रखना होगा। इस फंड का उपयोग सिर्फ मेंटनेंस से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।

2. संपत्ति हस्तांतरण के नए नियम

अब बिल्डर अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं पाएंगे, क्योंकि रेरा ने संपत्ति हस्तांतरण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

समयबद्ध ट्रांसफर: बिल्डर को परियोजना पूरी होने के छह महीने के भीतर हाउसिंग सोसाइटी या RWA को संपत्ति का स्वामित्व सौंपना अनिवार्य होगा।

अनुपालन न करने पर भारी जुर्माना: यदि बिल्डर तय समयसीमा में संपत्ति का हस्तांतरण नहीं करता, तो उसे जुर्माने का भुगतान करना होगा, जिसकी राशि प्रत्येक दिन के हिसाब से तय की जाएगी।

बकाया भुगतान का निपटारा: ट्रांसफर से पहले बिल्डर को यह सुनिश्चित करना होगा कि बिजली, पानी, सीवेज और प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े सभी लंबित भुगतान पूरी तरह से चुका दिए गए हैं।

क्यों जरूरी था रेरा का यह कदम?

रियल एस्टेट सेक्टर में अक्सर देखा जाता है कि बिल्डर प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद मेंटनेंस की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं, जिससे निवासियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में, हाउसिंग सोसाइटी को समय पर हस्तांतरित नहीं किया जाता, जिससे अपार्टमेंट और कॉलोनी निवासियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।

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छत्तीसगढ़ रेरा के इस कदम से अब निम्नलिखित बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

बिल्डरों द्वारा मनमाने तरीके से मेंटनेंस चार्ज वसूलने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

निवासियों को समय पर स्वामित्व मिलेगा, जिससे वे स्वतंत्र रूप से सोसाइटी का संचालन कर सकेंगे।

प्रोजेक्ट ट्रांसफर में देरी करने वाले बिल्डरों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी, जिससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।

रियल एस्टेट क्षेत्र में उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी और कानूनी विवादों की संख्या में कमी आएगी।

विशेषज्ञों की राय: क्या यह फैसला कारगर साबित होगा?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ रेरा के नए नियम राज्य के हाउसिंग सेक्टर को अधिक संगठित और पारदर्शी बनाएंगे। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों को सख्ती से लागू किया गया तो इससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।

1. ग्राहकों के लिए सकारात्मक बदलाव

रियल एस्टेट सलाहकार अमित वर्मा के अनुसार, “बिल्डर अक्सर मेंटनेंस चार्ज के नाम पर ग्राहकों से भारी रकम वसूलते हैं, लेकिन इन पैसों का सही इस्तेमाल नहीं होता। अब रेरा ने मेंटनेंस के लिए एस्क्रो खाता अनिवार्य कर दिया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और ग्राहकों को उनका पैसा सही जगह इस्तेमाल होता दिखेगा।”

2. बिल्डरों के लिए नई चुनौती

रियल एस्टेट डेवलपर संदीप अग्रवाल मानते हैं कि, “यह नियम उन बिल्डरों के लिए चुनौती पेश करेगा जो अभी तक नियमों की अनदेखी कर मनमानी करते थे। हालांकि, इससे ग्राहकों को राहत मिलेगी और पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में एक अनुशासन कायम होगा।”

3. कानूनी विशेषज्ञों की राय

वकील रोहित शर्मा, जो रियल एस्टेट मामलों के विशेषज्ञ हैं, कहते हैं, “बिल्डरों और ग्राहकों के बीच कानूनी विवादों में ज्यादातर मामले मेंटनेंस चार्ज और संपत्ति हस्तांतरण में देरी से जुड़े होते हैं। अगर रेरा के ये नए नियम प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो कानूनी विवादों में भारी कमी आएगी।”

ग्राहकों को कैसे मिलेगा फायदा?

छत्तीसगढ़ रेरा के नए नियमों से सबसे अधिक लाभ उन ग्राहकों को मिलेगा जो वर्षों से बिल्डरों की मनमानी का शिकार हो रहे थे।

अब बिल्डर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगे और परियोजना की साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं का रखरखाव करेंगे।

समय पर संपत्ति ट्रांसफर होने से निवासी जल्द ही अपनी हाउसिंग सोसाइटी का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकेंगे।

अनावश्यक मेंटनेंस शुल्क वसूलने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी।

ग्राहक अब रेरा के पास शिकायत दर्ज करवा सकते हैं, जिससे उन्हें न्याय मिलने में आसानी होगी।

छत्तीसगढ़ रेरा द्वारा जारी किए गए ये नए नियम राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद करेंगे। अब बिल्डरों को न सिर्फ अपनी परियोजना पूरी करनी होगी, बल्कि उसके रखरखाव और समय पर स्वामित्व हस्तांतरण की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

इन नए नियमों के लागू होने से न केवल उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में अनुशासन और विश्वास भी बढ़ेगा। अब देखना यह होगा कि रेरा इन नियमों को कितनी सख्ती से लागू करता है और बिल्डर कितनी तेजी से खुद को इन बदलावों के अनुरूप ढालते हैं।

Ashish Sinha

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