डीएलसीसी बैठक में बैंकों की लापरवाही पर कलेक्टर सख्त, शिक्षा और कृषि ऋण मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश

डीएलसीसी बैठक में बैंकों की लापरवाही पर कलेक्टर सख्त, शिक्षा और कृषि ऋण मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश

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रायपुर, 09 मार्च 2025। जिला स्तरीय समीक्षा समिति एवं परामर्शदात्री समिति (डीएलसीसी) की 192वीं बैठक में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने बैंकों के लापरवाह रवैये पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी बैंक कृषि और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े ऋण प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करें और पात्र हितग्राहियों को जल्द से जल्द ऋण उपलब्ध कराएं। बैठक में कुछ बैंकों के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताते हुए क्षेत्रीय प्रबंधन को चेतावनी पत्र जारी करने और इसकी प्रतिलिपि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भेजने के निर्देश दिए।

डीएलसीसी बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में बैंकिंग गतिविधियों की समीक्षा करना और प्राथमिकता प्राप्त ऋण योजनाओं की प्रगति को परखना था। कलेक्टर ने कहा कि कृषि और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ऋण आवेदनों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। बैंकों को निर्देश दिया गया कि वे औपचारिकताओं को कम से कम रखते हुए शीघ्रता से ऋण वितरण की प्रक्रिया पूरी करें। इससे न केवल किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा बल्कि विद्यार्थियों को भी उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी।

उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के तहत स्वीकृत ऋण मामलों की समीक्षा की और इन योजनाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत ऋण वितरण की प्रगति की भी सराहना की और भविष्य में भी इसी गति से कार्य करने की अपेक्षा जताई।

बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, एनआरएलएम के तहत 100 प्रतिशत, एनयूएलएम के तहत 98 प्रतिशत और पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत 92 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है। वहीं, प्राथमिकता लोन टारगेट के तहत दिसंबर तिमाही तक 87 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की गई है। कलेक्टर ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बैंकों को निर्देशित किया कि वे भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता और गंभीरता के साथ कार्य करें।

बैठक में कई बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित नहीं थे, जिस पर कलेक्टर ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग संस्थानों को सरकारी योजनाओं में सहयोग करना आवश्यक है, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एलडीएम को निर्देश दिया कि अनुपस्थित बैंकों के क्षेत्रीय प्रबंधन को चेतावनी पत्र भेजा जाए और इसकी जानकारी रिजर्व बैंक को भी दी जाए।

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कृषि और शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होते हैं और इन क्षेत्रों में वित्तीय सहायता का सही समय पर मिलना आवश्यक है। किसानों को बीज, खाद, सिंचाई और अन्य आवश्यक संसाधनों के लिए समय पर ऋण की आवश्यकता होती है, वहीं विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बिना देरी के वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इन दोनों ही क्षेत्रों के लिए बैंक त्वरित निर्णय लें और आवेदकों को अनावश्यक प्रक्रियाओं में उलझाने से बचें।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि बैंकों की धीमी प्रक्रिया के कारण कई पात्र आवेदकों को ऋण मिलने में देरी हो रही है। कुछ मामलों में ऋण आवेदन महीनों तक लंबित रहते हैं, जिससे हितग्राहियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कलेक्टर ने कहा कि यदि कोई भी बैंक ऋण वितरण में अनावश्यक देरी करता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बैंकों से कहा कि वे अपने आंतरिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएं और समयबद्ध तरीके से ऋण प्रदान करें।

कलेक्टर ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि बैंकिंग प्रणाली को अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है। हितग्राहियों को ऋण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को समुचित रणनीति अपनाने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे लाभार्थियों से सीधा संवाद करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र व्यक्ति ऋण से वंचित न रहे।

बैठक के अंत में कलेक्टर ने अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि वे अगले तिमाही तक प्राथमिकता वाले ऋण मामलों का 100 प्रतिशत समाधान करें। उन्होंने कहा कि बैंकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक माह समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी और अनुपस्थित रहने वाले बैंकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

डीएलसीसी बैठक में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार लाने और प्राथमिकता प्राप्त ऋण मामलों को तेजी से निपटाने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए कि वे कृषि और शिक्षा क्षेत्र के ऋण प्रकरणों को शीघ्रता से निपटाएं और अनावश्यक औपचारिकताओं को कम करें। बैंकों के निष्क्रिय रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने साफ किया कि यदि भविष्य में कोई बैंक जिम्मेदारी से पीछे हटता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। इस बैठक से स्पष्ट संदेश गया कि सरकार की प्राथमिकता योजनाओं को पूरी गंभीरता के साथ लागू करना ही जिले के विकास की कुंजी है।