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बगिया में बच्चों संग मुख्यमंत्री ने मनाई रंगों की होली

बगिया में बच्चों संग मुख्यमंत्री ने मनाई रंगों की होली

रायपुर, 15 मार्च 2025 – छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बगिया के मंझापारा गांव में बच्चों के साथ होली मनाकर प्रदेशवासियों को सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने अपने निज निवास पर बच्चों की टोली का आत्मीय स्वागत किया और उनके संग गुलाल उड़ाकर, ठहाके लगाकर और मिठाइयां बांटकर इस रंगों के पर्व को यादगार बना दिया।

गांव के बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। वे पूरे गांव में होली खेलते हुए मुख्यमंत्री से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। बच्चों ने बताया कि वे अपने “मुख्यमंत्री चाचा” से मिलने बड़े उत्साहित थे और जब वे वहां पहुंचे, तो मुख्यमंत्री ने भी उनके साथ पूरी आत्मीयता से रंग-गुलाल खेला। यह मिलन किसी पारिवारिक उत्सव से कम नहीं था। बच्चों ने मुख्यमंत्री के गालों पर गुलाल लगाया, उनके साथ नाच-गाना किया और हंसी-ठिठोली में खो गए।

बगिया का मंझापारा गांव होली के दिन पूरी तरह से उत्सव के रंग में रंगा हुआ था। सुबह से ही बच्चे और युवा टोली बनाकर होली खेलने निकल पड़े थे। ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते बच्चे अपने-अपने घरों से रंग और गुलाल लेकर निकले और पूरे गांव को उत्सवमय बना दिया। इसी बीच, जब गांववालों को पता चला कि मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने निवास पर आमंत्रित किया है, तो पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।

बच्चों के जत्थे ने पूरे गांव में घूम-घूमकर होली खेली और फिर मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ चले। रास्तेभर वे पारंपरिक होली गीत गाते हुए आगे बढ़े। कोई ढोल बजा रहा था, कोई गुलाल उड़ा रहा था, तो कोई अपने दोस्तों के साथ मिलकर मजाक कर रहा था। गांव के बुजुर्ग और महिलाएं भी इस दृश्य को देखकर आनंदित हो उठे।

जब ये बच्चे मुख्यमंत्री निवास पहुंचे, तो साय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने खुद आगे बढ़कर बच्चों के माथे पर गुलाल लगाया और फिर उनके साथ होली खेलने लगे। उनकी सहजता और आत्मीयता ने बच्चों को बेझिझक उनसे मिलने और घुलने-मिलने का अवसर दिया।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से उनकी पढ़ाई-लिखाई, खेल-कूद और परिवार के बारे में पूछा। उन्होंने बच्चों को मिठाइयां खिलाईं और उनके साथ ठहाके लगाए। बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह देखते ही बनता था। यह एक ऐसा दृश्य था, जिसमें सच्चे अपनत्व और स्नेह के रंग घुले हुए थे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा, “होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि मेल-जोल, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सभी भेदभावों को भुलाकर हम एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटें।”

उन्होंने कहा कि इस तरह के उत्सव हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं और हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं। उन्होंने बच्चों को होली के महत्व के बारे में बताया और कहा कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

बच्चों के साथ इस उत्सव में गांव के बुजुर्ग और अभिभावक भी शामिल थे। गांववालों ने बताया कि मुख्यमंत्री का यह स्नेहिल व्यवहार उन्हें अपनेपन का अहसास कराता है।

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गांव के एक बुजुर्ग रामस्वरूप यादव ने कहा, “हमने पहली बार किसी मुख्यमंत्री को बच्चों के साथ इस तरह घुल-मिलकर होली खेलते देखा है। इससे साफ जाहिर होता है कि वे केवल नेता नहीं, बल्कि जनता के सच्चे सेवक भी हैं।”

वहीं, गांव की एक महिला संगीता कश्यप ने कहा, “मुख्यमंत्री का बच्चों के प्रति यह प्रेम बताता है कि वे केवल विकास की योजनाएं ही नहीं बनाते, बल्कि जनता से जुड़ाव भी रखते हैं।”

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बच्चों को उपहार भी दिए। उन्होंने बच्चों को नई किताबें, रंग-बिरंगी पेंसिलें और खेलकूद का सामान भेंट किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का उज्ज्वल भविष्य ही प्रदेश की असली संपत्ति है और सरकार उनके संपूर्ण विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मंझापारा गांव में एक नया पुस्तकालय और खेल मैदान बनाया जाएगा, जिससे बच्चों को पढ़ाई और खेल दोनों में बेहतर अवसर मिल सकें। उनकी इस घोषणा पर गांव के लोगों ने तालियों से स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को भी होली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस पर्व को आपसी सौहार्द और शांति के साथ मनाएं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति हमेशा से मेल-जोल और भाईचारे की रही है, और होली इस संस्कृति को और मजबूत करने का एक अवसर है।

प्रदेशभर में भी होली का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और अन्य शहरों में लोगों ने रंगों और गुलाल से होली खेली। बाजारों में चहल-पहल रही, मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ उमड़ी और घर-घर पकवान बने।

मुख्यमंत्री का यह कदम उनकी जनता से आत्मीयता को दर्शाता है। वे केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि खुद भी आम लोगों के साथ घुलते-मिलते हैं। इससे उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ जाती है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह जनता से सीधा संवाद और आत्मीयता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वे केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि धरातल पर उतरकर जनता के बीच रहते हैं।

बगिया के मंझापारा गांव में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और बच्चों के बीच हुआ यह होली मिलन केवल रंगों का नहीं, बल्कि अपनत्व, स्नेह और खुशियों के अनगिनत रंगों से भरा हुआ था।

इस होली के अवसर पर न केवल बच्चों ने मुख्यमंत्री से मिलकर खुशी मनाई, बल्कि पूरे गांव ने इसे अपने जीवन का एक यादगार पल बना लिया। मुख्यमंत्री की आत्मीयता और सहजता ने इस होली को और भी खास बना दिया।

छत्तीसगढ़ की जनता के लिए यह सिर्फ एक त्योहार नहीं था, बल्कि एक ऐसा अवसर था, जिसने समाज में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की भावना को और मजबूत किया। इस तरह के उत्सव न केवल हमारी परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि हमें अपने समाज और संस्कृति से जोड़े भी रखते हैं।

इस होली मिलन ने यह साबित कर दिया कि जब नेता और जनता के बीच की दूरियां खत्म हो जाती हैं, तो प्रशासन भी अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनता है। मुख्यमंत्री साय की इस आत्मीयता ने छत्तीसगढ़ की होली को और भी रंगीन और यादगार बना दिया।

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