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सीजीएमएससी घोटाले की जांच सीबीआई से कराया जाये – डॉ. राकेश गुप्ता

सीजीएमएससी घोटाले की जांच सीबीआई से कराया जाये – डॉ. राकेश गुप्ता

सीजीएमएससी घोटाले की सीबीआई जांच की मांग, कांग्रेस ने सरकार पर लगाया लीपापोती का आरोप

रायपुर, 22 मार्च 2025। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) में हुए बहुचर्चित रिएजेंट और दवा सप्लाई घोटाले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने इस घोटाले की जांच को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार इस मामले में लीपापोती कर रही है और वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि मीडिया में लगातार खबरें आने के बाद राज्य सरकार दबाव में आई और घोटाले की जांच की घोषणा की। लेकिन यह जांच केवल दिखावे के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला केंद्रीय धन के गबन से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच राज्य सरकार की किसी एजेंसी से नहीं, बल्कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जानी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका संदिग्ध

कांग्रेस ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा कि घोटाले में स्वास्थ्य विभाग के सभी अंग शामिल हैं, और अब इसमें स्वास्थ्य मंत्री की संलिप्तता भी सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने जांच जारी रहने के बावजूद सप्लाई करने वाली कंपनी को भुगतान करने के आदेश दे दिए। इससे साफ होता है कि मंत्री खुद इस घोटाले में संलिप्त थे और उन्होंने सरकारी धन के दुरुपयोग में अपनी भूमिका निभाई।

घोटाले की पृष्ठभूमि

सीजीएमएससी घोटाला स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार का उदाहरण है। आरोप है कि विभाग ने रिएजेंट की कृत्रिम मांग पैदा कर गैरजरूरी खरीदारी की और सरकारी धन को निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया। यह धन केंद्र सरकार द्वारा राज्य के स्वास्थ्य बजट के तहत प्रदान किया गया था।

कांग्रेस का आरोप है कि इस पूरे घोटाले में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी और राज्य सरकार के कुछ मंत्री मिले हुए हैं। विभागीय अधिकारियों ने जरूरत से अधिक रिएजेंट की खरीदारी करवाई, जबकि जमीनी स्तर पर इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कांग्रेस का विरोध

राज्य सरकार ने इस घोटाले की जांच के लिए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन कांग्रेस इस जांच पर भरोसा नहीं जता रही। कांग्रेस का कहना है कि जब खुद राज्य के मंत्री इस घोटाले में लिप्त हैं, तो राज्य की एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

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कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, “यह मामला राज्य सरकार के दायरे से बाहर है क्योंकि इसमें केंद्र सरकार की ओर से दिए गए पैसे का दुरुपयोग हुआ है। ऐसे में केवल सीबीआई ही इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर सकती है। अगर राज्य सरकार वास्तव में दोषियों को सजा दिलाने की इच्छुक है, तो उसे सीबीआई जांच की सिफारिश करनी चाहिए।”

स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफे की मांग

कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि जब तक इस मामले की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती, तब तक स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को इस्तीफा देना चाहिए। सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि अगर मंत्री स्वयं इस्तीफा नहीं देते, तो मुख्यमंत्री को उन्हें तत्काल बर्खास्त करना चाहिए।

“जब तक जांच चल रही है, तब तक मंत्री पद पर उनका बने रहना न्यायसंगत नहीं है। अगर वे पद पर बने रहते हैं, तो जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए उनकी बर्खास्तगी जरूरी है,” शुक्ला ने कहा।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

इस घोटाले को लेकर कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी (आप) और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने भी इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। आप के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला है और राज्य सरकार इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।

भ्रष्टाचार पर सरकार की चुप्पी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोटाला भाजपा सरकार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को जनता के सामने बड़े पैमाने पर उठाने की योजना बनाई है। पार्टी ने इस घोटाले के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन करने की घोषणा भी की है।

सीबीआई जांच की संभावना

हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अभी तक सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ईओडब्ल्यू निष्पक्ष जांच कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

लेकिन कांग्रेस इस दावे को खारिज कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक मामले की जांच किसी स्वतंत्र और केंद्रीय एजेंसी को नहीं सौंपी जाती, तब तक निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

सीजीएमएससी घोटाले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को गर्मा दिया है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है और सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है या नहीं। अगर सरकार ने इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतर सकती है। वहीं, भाजपा सरकार के लिए यह मामला राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है।

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