आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगा सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगा सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

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पुनर्वास केंद्र बीजापुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों से उप मुख्यमंत्री ने किया संवाद

रायपुर, 22 मार्च 2025: छत्तीसगढ़ सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर गंभीर है। बीजापुर जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नई दिशा दी जा रही है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बीजापुर के पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। इस अवसर पर उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का समुचित लाभ मिलना चाहिए।

छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले 28 नक्सलियों को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। ये नक्सली तेलंगाना सीमा से लगे पामेड़, पालागुड़ा, मारूड़बाका और भैरमगढ़ जैसे दुर्गम इलाकों से आए हैं। सरकार की पहल के अंतर्गत इन नक्सलियों को राजमिस्त्री, बढ़ई, सिलाई-कढ़ाई और अन्य तकनीकी प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर आत्मनिर्भर बन सकें।

कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमतीन महीनों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आत्मसमर्पित नक्सलियों ने उप मुख्यमंत्री का स्वागत ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ किया। संवाद के दौरान उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। रामलू भंडारी, अर्जुन मड़काम, सोमारू माड़वी और सुखराम हेमला सहित अन्य आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि नक्सल संगठन में उनका जीवन भटका हुआ था। उन्होंने स्वीकार किया कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे और एक गुमराह जीवन व्यतीत कर रहे थे। पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने के बाद उन्हें एक बेहतर जीवन मिला है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पुनर्वास केंद्र का दौरा करते हुए आत्मसमर्पित नक्सलियों की दिनचर्या के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्वास केंद्र में रहने वाले सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड और बैंक खाते जैसी आवश्यक सेवाएँ पुनर्वास केंद्र में ही उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि इन नक्सलियों को शासन की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसी सुविधाएँ दी जाएंगी।

उप मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए प्रार्थना, पूजा-अर्चना, योग और ध्यान जैसी गतिविधियों को शामिल करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को बाहरी दुनिया से परिचित कराने के लिए एक्सपोजर विजिट के तहत रायपुर, जगदलपुर जैसे बड़े शहरों का भ्रमण कराया जाए। इस पहल से उन्हें समाज के विकास और बदलती परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

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उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि इनमें से अधिकतर नक्सली पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए उनके लिए साक्षरता अभियान चलाया जाए ताकि वे बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, उन्हें खेलकूद, मनोरंजन और देशभक्ति पर आधारित फिल्में दिखाने की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया गया।

पुनर्वास नीति का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसी के तहत, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुछ नक्सलियों ने राजमिस्त्री का कार्य सीखने में रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे सिविल कार्यों में लगकर व्यवसाय और आमदनी का स्रोत तलाशेंगे।

उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इन नक्सलियों को विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी परियोजनाओं में रोजगार दिलाने के प्रयास किए जाएं।

इस अवसर पर बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी पी. सुंदरराज, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर संबित मिश्रा, डीएफओ रंगानाथा रामाकृष्णा वाय, सीईओ जिला पंचायत हेमंत रमेश नंदनवार, उप निदेशक इंद्रावती टाइगर रिजर्व संदीप बल्गा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सुरक्षा एजेंसियों की भूमिकासुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज में पुनः स्थापित करने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। इन प्रयासों से उन क्षेत्रों में शांति स्थापित होने की संभावना बढ़ी है, जहाँ पहले नक्सलियों का वर्चस्व था।

छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई नई योजनाएँ प्रस्तावित हैं। इनमें आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने, उन्हें सहकारी समितियों से जोड़ने और कृषि क्षेत्र में रोजगार देने की योजनाएँ शामिल हैं।

हालाँकि, इस प्रक्रिया में कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं, जैसे:

समाज में आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनः स्वीकार करने की मानसिकता को बदलना।

कुछ क्षेत्रों में नक्सल प्रभावित लोगों को पुनर्वास योजना से जोड़ने में हो रही कठिनाई।

पुनर्वास केंद्रों में दी जाने वाली सुविधाओं की लगातार निगरानी और सुधार।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास आत्मसमर्पित नक्सलियों को एक नई जिंदगी देने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कौशल विकास, शिक्षा और स्वरोजगार के माध्यम से इन पूर्व नक्सलियों को एक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान किया जा रहा है।

अगर यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में भी इसे लागू किया जा सकता है। सरकार की इस नीति से न केवल नक्सलवाद को समाप्त करने में मदद मिलेगी, बल्कि इन प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास का नया मार्ग प्रशस्त होगा।