
मुख्यमंत्री साय ने शहीद दिवस पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को नमन, बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान
मुख्यमंत्री साय ने शहीद दिवस पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को नमन, बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान
रायपुर, 22 मार्च 2025:छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद दिवस (23 मार्च) की पूर्व संध्या पर नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले ये वीर सपूत हमारे राष्ट्रीय इतिहास के स्वर्णिम अध्याय हैं। उनका बलिदान हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है और हमेशा रहेगा। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से इन महान क्रांतिकारियों के आदर्शों को आत्मसात करने और देशहित को सर्वोपरि मानने की अपील की।
23 मार्च 1931 का दिन भारतीय इतिहास में बलिदान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गया, जब ब्रिटिश हुकूमत ने भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु और सुखदेव थापर को फाँसी पर चढ़ा दिया था। इन तीनों क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया और देशवासियों में स्वतंत्रता की अलख जगाई। उन्होंने अपने साहस और अदम्य इच्छाशक्ति से ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाने का कार्य किया।
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान मात्र एक घटना नहीं थी, बल्कि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक मोड़ था। उनकी शहादत से प्रेरित होकर देशभर में क्रांतिकारी आंदोलनों ने जोर पकड़ा और अंग्रेजी शासन की जड़ें कमजोर होने लगीं। यही कारण है कि हर वर्ष 23 मार्च को भारत में शहीद दिवस मनाकर इन वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
मुख्यमंत्री साय ने अपने संदेश में कहा, “भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान देशवासियों के हृदय में राष्ट्रप्रेम की अखंड ज्योति जलाए रखता है। उन्होंने देश के भविष्य के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्र भारत में सांस ले सकें। उनकी विचारधारा और उनके संघर्ष को स्मरण करते हुए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके सपनों के भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।”
उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी को इन शहीदों के विचारों को अपनाते हुए देश सेवा के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए। “आज हमें सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली गाथाओं को याद करने की ही नहीं, बल्कि उनके दिखाए गए मार्ग पर चलने की भी जरूरत है। हमारे युवा अगर भगत सिंह की सोच और उनके अदम्य साहस से प्रेरणा लें, तो भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।”
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि शहीद भगत सिंह सिर्फ एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि महान विचारक भी थे। उनका मानना था कि स्वतंत्रता सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक बदलाव का आधार होनी चाहिए। उन्होंने न्याय, समानता और बंधुत्व के जिस सिद्धांत की बात की थी, वह आज भी प्रासंगिक है।
राजगुरु और सुखदेव भी इसी विचारधारा के समर्थक थे। वे एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे, जिसमें हर व्यक्ति को समान अवसर मिले और कोई भी अन्याय का शिकार न हो। उनकी इस सोच को आगे बढ़ाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य सरकार युवाओं को देशभक्ति और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों से जोड़ने के लिए कई योजनाएँ चला रही है। इनमें ‘युवा शक्ति अभियान’, ‘स्वदेशी जागरूकता अभियान’ और ‘राष्ट्र निर्माण कार्यशाला’ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन अभियानों के माध्यम से युवाओं को देश के विकास में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने जिस प्रकार अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर कार्य किया, हमें भी उनके विचारों से सीख लेकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए। हमारा प्रयास है कि आने वाली पीढ़ी में भी यह भावना जागृत हो और वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें।”
मुख्यमंत्री ने जनता से अपील करते हुए कहा कि हमें केवल सरकार से उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, बल्कि स्वयं भी समाज सुधार में योगदान देना चाहिए। “हम सबका कर्तव्य है कि हम आपसी भाईचारे और सौहार्द को बनाए रखें, समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करें और एक सशक्त भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।”
उन्होंने कहा कि सरकार शहीदों के बलिदान को यादगार बनाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। राज्य में शहीद स्मारकों का निर्माण और संरक्षण किया जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा ले सके।
मुख्यमंत्री साय ने अपने संदेश के अंत में कहा कि हमें हर हाल में अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए और देश की उन्नति में योगदान देना चाहिए। “शहीदों ने हमें स्वतंत्रता दिलाई, अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस स्वतंत्रता को संजोकर रखें और इसे और मजबूत बनाएं। उनके सपनों के भारत के निर्माण के लिए हमें एकजुट होकर कार्य करना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह दिन सिर्फ श्रद्धांजलि अर्पित करने का ही नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण करने और राष्ट्रनिर्माण के लिए नई ऊर्जा से काम करने का भी है। “हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने देश की अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”
शहीद दिवस के इस मौके पर राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विद्यालयों में निबंध प्रतियोगिताएँ, स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित नाटक, राष्ट्रभक्ति गीत प्रतियोगिताएँ और शहीदों के सम्मान में विशेष सभाएँ शामिल होंगी। मुख्यमंत्री स्वयं इन कार्यक्रमों में भाग लेंगे और युवाओं को संबोधित करेंगे।
इस प्रकार, शहीद दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि देते हुए जनता से उनके आदर्शों को अपनाने और राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने की अपील की।











