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AIMPLB और वक्फ कानून पर आरिफ मसूद का बड़ा बयान, बोले – नहीं मानेंगे नया कानून

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने वक्फ कानून को लेकर AIMPLB के समर्थन में बड़ा बयान दिया। बोले – यह मुस्लिम समाज का संयुक्त मंच है, और हम यह कानून नहीं मानेंगे।

भोपाल से AIMPLB को लेकर बड़ा बयान: कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद बोले – वक्फ कानून नहीं मानेंगे

भोपाल, मध्य प्रदेश | 10 अप्रैल 2025 |कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने वक्फ संशोधन कानून को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) एक संयुक्त मंच है, जो भारत के तमाम मुस्लिम संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है और सभी फिरकों के लोग इसमें शामिल हैं। उन्होंने दोहराया कि वक्फ बिल का पहले भी विरोध किया गया था और अब जब यह कानून के रूप में सामने आया है, तब भी मुस्लिम समाज इसे मानने के लिए तैयार नहीं है।

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विधायक मसूद के इस बयान ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


क्या कहा आरिफ मसूद ने?

भोपाल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक आरिफ मसूद ने कहा:

“AIMPLB एक साझा मंच है। इसमें सभी मुस्लिम फिरकों के लोग शामिल हैं और यह पूरे भारत के मुस्लिम समाज का मार्गदर्शन करता है। हमने पहले भी वक्फ संशोधन बिल का विरोध किया था, और आज जब यह कानून बन गया है, तब भी हम इसे नहीं मानेंगे।”

उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण धार्मिक स्वतन्त्रता और संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन है।


AIMPLB की भूमिका और संरचना

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) 1973 में स्थापित एक गैर-सरकारी संगठन है, जिसका उद्देश्य भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत कानून) की रक्षा करना है। यह बोर्ड विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों — जैसे सुन्नी, शिया, देवबंदी, बरेलवी, अहले हदीस आदि — का प्रतिनिधित्व करता है।

AIMPLB ने समय-समय पर तीन तलाक, यूसीसी (Uniform Civil Code) और वक्फ संपत्तियों जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियों का विरोध किया है।


वक्फ संशोधन कानून क्या है?

सरकार द्वारा हाल ही में लाया गया वक्फ संशोधन कानून, वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पुनः अधिग्रहण को लेकर कड़े प्रावधान करता है। इसके तहत:

  • राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों को केंद्र सरकार के अधीन लाया गया है।

  • वक्फ संपत्तियों पर सरकारी योजनाओं के लिए अधिग्रहण को वैधता दी गई है।

  • वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के अधिकार वक्फ बोर्ड को दिए गए हैं।

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हालांकि मुस्लिम समुदाय के कई वर्ग इसे धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप और केंद्र द्वारा नियंत्रण की कोशिश मान रहे हैं।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस का रुख

आरिफ मसूद के बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी के मुस्लिम विधायक इस कानून को लेकर नाखुश हैं। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी के अंदर इस विषय पर असंतोष की आवाजें तेज हो रही हैं।

भाजपा का पलटवार

मध्य प्रदेश भाजपा प्रवक्ताओं ने आरिफ मसूद के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि कानून का विरोध केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

“कानून हर नागरिक के हित में है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। AIMPLB जैसी संस्थाएं अब राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रही हैं।”
भाजपा प्रवक्ता, मध्य प्रदेश


कानूनी विशेषज्ञों की राय

संवैधानिक जानकारों का मानना है कि यदि कोई संगठन या समूह केंद्र सरकार द्वारा पारित किसी कानून को न मानने की बात करता है, तो वह संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ जाता है। हालांकि, संवैधानिक विरोध और कोर्ट की शरण में जाने का अधिकार सभी को है।


मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया

देशभर के कई मुस्लिम संगठनों ने वक्फ कानून पर विरोध दर्ज कराया है। AIMPLB पहले ही इस कानून को संवैधानिक चुनौती देने की बात कह चुका है। दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद और भोपाल जैसे शहरों में इस मुद्दे पर प्रदर्शन भी हुए हैं।


भविष्य की राह

आरिफ मसूद के बयान के बाद इस मुद्दे पर AIMPLB की ओर से एक बार फिर देशव्यापी चर्चा हो सकती है। संभावना है कि AIMPLB जल्द ही इस पर एक औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आगे की रणनीति घोषित करे।


आरिफ मसूद का बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि यह देश में धार्मिक अधिकारों और शासन की परिभाषा को लेकर गहराते तनाव की ओर इशारा करता है। जहां एक ओर केंद्र सरकार वक्फ कानून को संपत्ति पारदर्शिता और नियंत्रण के तौर पर देखती है, वहीं मुस्लिम समाज के कुछ हिस्से इसे धार्मिक स्वतन्त्रता पर हमले के रूप में मानते हैं।

Ashish Sinha

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