शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: “मनुस्मृति ने हमें पशुता से उठाकर मानव बनाया”

मनुस्मृति से हमें पशुता से मानवता की ओर ले जाया गया है: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द

वाराणसी/रायपुर। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मनुस्मृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जिस ग्रंथ ने हमें पशुता से ऊपर उठाकर मानव बनाया, उसी के खिलाफ षड्यंत्र चल रहा है।” वे श्रीविद्यामठ (गंगा तट) में आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे।

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उन्होंने कहा कि देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे मनुस्मृति सारे कष्टों का कारण हो, जबकि मनु महाराज ने न तो कभी किसी को ब्राह्मण या शूद्र बनाया, न ही वर्ण व्यवस्था थोपने की बात कही। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा वर्ण-व्यवस्था समाप्त करने की घोषणा के बाद भी समाज आज दो वर्गों में बंटा है — आरक्षित और अनारक्षित।

  • मनुस्मृति की आलोचना एक सुनियोजित षड्यंत्र: शंकराचार्य ने कहा कि जो सनातन धर्म के विरोधी हैं, वे ही मनुस्मृति को गलत ठहराकर हिन्दू समाज को भ्रमित कर रहे हैं।

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  • मनुस्मृति ने केवल कर्तव्यों का निर्धारण किया: मनु महाराज ने वर्ण नहीं बनाए, केवल उनके दायित्व बताए।

  • ब्राह्मण-शूद्र बनना ‘कहने’ से नहीं होता: यह कार्यों और गुणों पर आधारित है।

  • ‘पैर’ को तुच्छ समझना मूर्खता: शूद्र को शरीर के पैर की तरह बताया गया है, लेकिन शरीर पैर के बिना अधूरा है।

  • हर हिन्दू के घर में हो मनुस्मृति: जिस तरह मुस्लिमों के घर में कुरान और ईसाइयों के घर में बाइबिल होती है, उसी तरह हिंदुओं के घर में मनुस्मृति होनी चाहिए।

परम धर्म संसद 1008, एक अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू संगठन है जो भारत सहित 108 देशों में सक्रिय है। यह चारों शंकराचार्यों के मार्गदर्शन में कार्य कर रहा है। इसकी स्थापना 2018 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज द्वारा की गई थी।

यह जानकारी शंकराचार्य जी के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय एवं संगठन मंत्री साईं जलकुमार मसन्द द्वारा प्रदान की गई।