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CG UCC Meeting Ambikapur: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता को लेकर 8 अक्टूबर को अंबिकापुर में बैठक, जानें पूरी जानकारी






छत्तीसगढ़ UCC: अंबिकापुर में 8 अक्टूबर को उच्च स्तरीय समिति की संभागीय परिचयात्मक बैठक एवं समूह चर्चा


छत्तीसगढ़ / विशेष समाचार

समान नागरिक संहिता (UCC): अंबिकापुर में 08 अक्टूबर को उच्च स्तरीय समिति की बैठक; सरगुजा संभाग के 5 जिलों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

स्थान: अंबिकापुर, छत्तीसगढ़
प्रकाशन तिथि: 25 सितम्बर 2026
बैठक तिथि: 08 अक्टूबर 2026 (दोपहर 03:00 बजे)
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) का व्यापक और सर्वसमावेशी प्रारूप तैयार करने के उद्देश्य से गठित उच्च स्तरीय समिति आगामी 08 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:00 बजे अंबिकापुर में एक महत्वपूर्ण परिचयात्मक एवं समूह चर्चा बैठक आयोजित करने जा रही है। इस संभाग-स्तरीय बैठक में सरगुजा संभाग के पांच प्रमुख जिलों के सामाजिक, राजनीतिक और अकादमिक प्रतिनिधि शामिल होकर विधेयक के विविध पहलुओं पर अपने सुझाव एवं राय प्रस्तुत करेंगे।

राज्य शासन द्वारा सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह उच्च स्तरीय समिति प्रदेश के विभिन्न अंचलों का दौरा कर जनसंवाद, क्षेत्रीय अध्ययन (फील्ड स्टडी) और सीधे विचार-विमर्श के माध्यम से जनसामान्य की राय संकलित कर रही है। अंबिकापुर में होने वाली इस बैठक का मुख्य केंद्र सरगुजा अंचल की सामाजिक, सांस्कृतिक और जनजातीय पृष्ठभूमि के अनुरूप कानूनों का अध्ययन करना है।

1. अंबिकापुर बैठक का विवरण और सहभागी जिले

अंबिकापुर में आयोजित यह बैठक सरगुजा संभाग के लिए एक मील का पत्थर मानी जा रही है। समिति के सदस्यों की प्रत्यक्ष उपस्थिति में आयोजित इस परिचयात्मक सह समूह चर्चा बैठक में कुल 5 जिलों से हितधारकों को आमंत्रित किया गया है:

1. सरगुजा
2. बलरामपुर-रामानुजगंज
3. मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB)
4. सूरजपुर
5. कोरिया

बैठक में समाज के प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय आमंत्रितों की सूची तैयार की गई है। इसमें शामिल होने वाले प्रमुख वर्ग निम्नलिखित हैं:

  • राजनीतिक दल: मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि।
  • सामाजिक एवं धार्मिक संगठन: विभिन्न समाजों, पंथों और धार्मिक निकायों के पदाधिकारी।
  • शिक्षाविद एवं बुद्धिजीवी: विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, कानूनी विशेषज्ञ, शोधकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता।
  • प्रतिष्ठित नागरिक: क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिक।
  • शासकीय संस्थाएँ: विभिन्न निगमों, मंडलों एवं राज्य स्तरीय आयोगों के प्रतिनिधि।

2. समिति का गठन और इसका कानूनी ढांचा

छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में विवाह, तलाक, संपत्ति उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे दीवानी (सिविल) मामलों में एकरूपता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में इस पांच-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति में कानूनी विशेषज्ञ, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक विचारक शामिल हैं।

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क्र. समिति के सदस्य / पद पृष्ठभूमि / विशेषज्ञता
1 न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई (अध्यक्ष) पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय (उत्तराखंड UCC समिति की पूर्व अध्यक्ष)
2 श्री शत्रुघ्न सिंह (सदस्य) सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी
3 श्री एम. के. राउत (सदस्य) सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी
4 श्री मोहन पवार (सदस्य) वरिष्ठ अधिवक्ता
5 श्रीमती ज्योति रानी सिंह (सदस्य) सेवानिवृत्त प्राचार्य / सामाजिक-शिक्षाविद

3. UCC के प्रमुख विषय और कार्य क्षेत्र

समिति द्वारा तैयार किए जा रहे समान नागरिक संहिता के प्रारूप में मुख्य रूप से व्यक्तिगत सिविल अधिकारों (Personal Laws) से जुड़े छह प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:

UCC के अंतर्गत शामिल 6 मुख्य व्यक्तिगत विषय:

  1. विवाह (Marriage): बाल विवाह पर रोक, अनिवार्य विवाह पंजीकरण और एक समान विवाह आयु सीमा।
  2. तलाक (Divorce): तलाक प्रक्रिया का सरलीकरण, एकतरफा और असंवैधानिक तरीकों पर प्रतिबंध एवं दोनों पक्षों के लिए न्यायसंगत नियम।
  3. भरण-पोषण (Maintenance/Alimony): वैवाहिक विच्छेद की स्थिति में पति/पत्नी और आश्रित बच्चों/माता-पिता के आर्थिक संरक्षण के लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार।
  4. उत्तराधिकार एवं जायदाद (Inheritance & Succession): पैतृक और अर्जित संपत्ति में बेटे और बेटी को समान उत्तराधिकार अधिकार देना।
  5. दत्तक ग्रहण (Adoption): बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया में धर्म निरपेक्ष नियम लागू करना, ताकि हर नागरिक कानूनी रूप से बच्चा गोद ले सके।
  6. लिव-इन संबंध (Live-in Relationships): सहजीवन संबंधों में स्पष्ट जवाबदेही, पंजीकरण प्रक्रिया और महिला व उससे जन्मे बच्चों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा।

4. धार्मिक स्वतंत्रता और जनजातीय परंपराओं का संरक्षण

उच्च स्तरीय समिति ने बैठक के संदर्भ में यह स्पष्ट रूप से दोहराया है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य किसी भी नागरिक या समुदाय के धार्मिक विश्वास, पूजा पद्धति, व्यक्तिगत आस्था या धार्मिक संस्कारों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना नहीं है। संहिता का ध्यान विशुद्ध रूप से नागरिक और सामाजिक कानूनों में समानता लाने पर केंद्रित है।

जनजातीय समुदायों की प्रथाओं पर विशेष अध्ययन

छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है। सरगुजा संभाग में उरांव, कंवर, गोंड, कोरवा और पहाड़ी कोरवा जैसी कई समृद्ध जनजातियाँ निवास करती हैं। समिति ने स्पष्ट किया है कि:

  • आदिवासी समाजों की पारंपरिक रूढ़िगत प्रथाओं (Customary Laws), विवाह पद्धतियों और विशिष्ट सामाजिक परंपराओं पर UCC के संभावित प्रभावों का गहन मूल्यांकन किया जा रहा है।
  • जनजातीय संस्कृति और उनके संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही मसौदा तैयार किया जाएगा।
  • अंबिकापुर बैठक में विशेष रूप से आदिवासी समाज प्रमुखों और क्षेत्र के प्रतिनिधियों से उनकी रीति-रिवाजों के संरक्षण हेतु विस्तृत सुझाव लिए जाएंगे।

5. राज्यव्यापी जनसंवाद प्रक्रिया और ऑनलाइन सुझाव

समिति केवल कागजी अध्ययन तक सीमित न रहकर पूरे राज्य में प्रत्यक्ष संपर्क अभियान चला रही है। बस्तर, रायपुर, बिलासपुर के बाद अब सरगुजा संभाग के अंबिकापुर में यह संभाग-स्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है। जनसंवाद के चार प्रमुख माध्यम अपनाए जा रहे हैं:

  1. संभागीय प्रत्यक्ष बैठकें: क्षेत्रवार नागरिकों और प्रतिनिधियों से सीधा संवाद।
  2. फील्ड स्टडी (क्षेत्रीय अध्ययन): ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर परंपराओं और रीति-रिवाजों का जमीनी विश्लेषण।
  3. ऑफलाइन पत्राचार: लिखित ज्ञापनों के माध्यम से सुझावों की प्राप्ति।
  4. वेब पोर्टल एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म: आम जनता के लिए ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत।

अपने सुझाव ऑनलाइन दर्ज कराएं

छत्तीसगढ़ के नागरिक समान नागरिक संहिता के प्रारूप हेतु अपने विचार और सुझाव सीधे समिति को भेज सकते हैं:

आधिकारिक वेब पोर्टल: ucc.cgstate.gov.in

ईमेल के माध्यम से: ucc-chhattisgarh@cg.gov.in

* सुझाव भेजने की अंतिम तिथि राज्य शासन द्वारा 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

6. भावी रूपरेखा और निष्कर्ष

अंबिकापुर की 08 अक्टूबर की बैठक के पश्चात समिति प्राप्त सभी मौखिक और लिखित सुझावों को संकलित कर उनका विधिक एवं सामाजिक विश्लेषण करेगी। इसके पश्चात समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट और कानून का प्रस्तावित ड्राफ्ट छत्तीसगढ़ सरकार को सौंपेगी।

इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम उद्देश्य राज्य के प्रत्येक नागरिक—चाहे वह किसी भी धर्म, लिंग, जाति या वर्ग का हो—को एक समान संवैधानिक संरक्षण प्रदान करना और महिलाओं व बच्चों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों को सुदृढ़ बनाना है। अंबिकापुर में 8 अक्टूबर को होने वाली यह बैठक सरगुजा अंचल की जन-आकांक्षाओं को प्रस्तावित कानून में शामिल करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।

© 2026 छत्तीसगढ़ समाचार अपडेट | सर्वाधिकार सुरक्षित। यह रिपोर्ट आधिकारिक सूचना एवं प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर संकलित की गई है।


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