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12 Years of Make in India: PM नरेंद्र मोदी बोले— “बढ़ा निर्माण, बढ़ा निवेश और बढ़ा निर्यात, हर सेक्टर में दिख रहा बदलाव”






Make in India के 12 साल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विनिर्माण, निवेश और निर्यात में ऐतिहासिक क्रांति को किया रेखांकित


राष्ट्रीय आर्थिक समीक्षा | आत्म-निर्भर भारत

‘Make in India’ के 12 ऐतिहासिक वर्ष: आत्मनिर्भरता से वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने तक भारत का अभूतपूर्व सफर

📅 तिथि: 25 सितंबर 2026
📍 स्थान: नई दिल्ली
⏱️ विशेष रिपोर्ट: 12 वर्षों का व्यापक विश्लेषण

भारत सरकार के महत्वाकांक्षी प्रमुख कार्यक्रम ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) ने अपनी यात्रा के सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पहल की ऐतिहासिक उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि इस अभियान ने भारत में विनिर्माण को अभूतपूर्व गति दी है, विदेशी व घरेलू निवेश का नया रिकॉर्ड बनाया है और देश के निर्यात को वैश्विक क्षितिज पर स्थापित किया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह परिवर्तन आज भारतीय अर्थव्यवस्था के हर छोटे-बड़े क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश: परिवर्तन का एक नया युग

25 सितंबर 2014 को शुरू किए गए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के 12 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस पहल के तीन मुख्य स्तंभों—उत्पादन, निवेश और निर्यात—पर प्रकाश डालते हुए अपना संदेश साझा किया।

“भारत में अधिक निर्माण (More made in India)।
भारत में अधिक निवेश (More investment in India)।
भारत से अधिक निर्यात (More exports from India)।
विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रहा एक स्पष्ट परिवर्तन!”

— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने इस पोस्ट के साथ #12YearsOfMakeInIndia हैशटैग साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि कैसे 12 वर्षों के निरंतर प्रयासों ने भारत को केवल उपभोग-आधारित अर्थव्यवस्था से बदलकर एक प्रमुख वैश्विक विनिर्माण शक्ति (Global Manufacturing Hub) के रूप में स्थापित कर दिया है।

“More made in India.
More investment in India.
More exports from India.

A transformation visible across sectors!

#12YearsOfMakeInIndia”

12 वर्षों का सफर: एक दृष्टि में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभाव

जब सितंबर 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ लॉन्च किया गया था, तब इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत को एक वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में बदलना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना, बौद्धिक संपदा की रक्षा करना और सर्वोत्तम बुनियादी ढांचा तैयार करना था। 12 वर्षों की इस यात्रा में इस पहल ने न केवल अपने शुरुआती लक्ष्यों को हासिल किया है, बल्कि कई क्षेत्रों में अनुमान से अधिक सफलता दर्ज की है।

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1. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)

पिछले 12 वर्षों में भारत में रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार और नीतिगत सुधारों के चलते वैश्विक दिग्गजों ने भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं।

2. रिकॉर्ड निर्यात

इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल क्षेत्र के दम पर भारत का कुल वार्षिक निर्यात नए ऐतिहासिक उच्च स्तर को छू रहा है।

3. स्थानीय विनिर्माण क्रांति

मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रक्षा उपकरण और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की अन्य देशों पर निर्भरता काफी हद तक कम हुई है और स्थानीय उत्पादन कई गुना बढ़ा है।

प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई देने वाला अभूतपूर्व बदलाव

1. इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण (Mobile Manufacturing)

‘मेक इन इंडिया’ की सबसे बड़ी और दृश्यमान सफलताओं में से एक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में है। वर्ष 2014 में भारत में केवल 2 मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट थे। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है। एप्पल (Apple), सैमसंग (Samsung) और अन्य वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गजों ने भारत को अपना मुख्य उत्पादन केंद्र बनाया है। आज भारत में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश मोबाइल हैंडसेट स्थानीय स्तर पर निर्मित होते हैं, और भारत बड़ी संख्या में विदेशों को स्मार्टफोन निर्यात कर रहा है।

2. रक्षा विनिर्माण और आत्मनिर्भरता (Defense Sector)

रक्षा क्षेत्र में भारत की छवि पहले केवल एक प्रमुख आयातक देश की थी। लेकिन बीते 12 वर्षों में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

  • भारत में निर्मित लड़ाकू विमान तेजस (Tejas), स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant), और एडवांस्ड आर्टिलरी गन सिस्टम देश की रक्षा विनिर्माण क्षमता के प्रतीक हैं।
  • भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण, हथियार और गोला-बारूद निर्यात कर रहा है। रक्षा निर्यात में पिछले एक दशक में 20 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

3. ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन (Automobile & EVs)

भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल विनिर्माण में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के अंतर्गत भारत न केवल पारंपरिक आईसीई (ICE) वाहनों का प्रमुख निर्माता बना है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), बैटरी तकनीक और ऑटो कंपोनेंट्स के मामले में भी तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है।

4. फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज (Pharmacy of the World)

भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग ने विश्व स्तर पर अपनी गुणवत्ता और लागत-प्रभावशीलता साबित की है। भारत ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है। ‘उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन’ (PLI) योजना के माध्यम से महत्वपूर्ण एActive Pharmaceutical Ingredients (APIs) और मेडिकल डिवाइसेज के स्थानीय निर्माण को भारी बढ़ावा मिला है।

क्षेत्र (Sector) 2014 की स्थिति 2026 की स्थिति (12 वर्षों बाद)
मोबाइल फोन निर्माण 2 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा निर्माता एवं निर्यात केंद्र
रक्षा निर्यात (Defense Exports) नगण्य (मुख्यतः आयातक देश) 80 से अधिक देशों को निर्यात, ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन मुख्यतः आयात पर निर्भर PLI योजनाओं के जरिए घरेलू उत्पादन में बहुगुणित वृद्धि
व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) वैश्विक रैंकिंग में पिछड़ा स्थान व्यापक नीतिगत सुधार, एकल खिड़की प्रणाली (Single Window System)

‘PLI योजना’ (Production Linked Incentive) की गेम-चेंजर भूमिका

‘मेक इन इंडिया’ पहल को 2.0 चरण में नई गति देने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना ने एक उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य किया है। 14 प्रमुख क्षेत्रों (जैसे सेमीकंडक्टर, सौर मॉड्यूल, ऑटोमोबाइल, उन्नत रसायन विज्ञान कोशिकाएं, दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स) के लिए शुरू की गई इस योजना ने लाखों करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित किया है और लाखों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन किया है।

‘Make in India’ की 12 वर्षों की 5 बड़ी सफलताएं:

  • सेमीकंडक्टर क्रांति: भारत में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स और असेंबली इकाइयों की स्थापना के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिली।
  • बुनियादी ढांचे का विकास: पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) के निर्माण से विनिर्माण लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी आई।
  • स्टार्टअप्स और इनोवेशन: एमएसएमई (MSME) और रक्षा/प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स के माध्यम से स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा मिला।
  • निवेशक अनुकूल नीतियां: एफडीआई (FDI) नियमों का उदारीकरण और कई अनुपालनों (Compliances) को समाप्त करना।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका: ‘चीन प्लस वन’ (China Plus One) रणनीति अपनाने वाले वैश्विक कॉरपोरेट्स के लिए भारत पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा।

आगामी दशक: ‘विकसित भारत 2047’ का आधार स्तंभ

‘मेक इन इंडिया’ केवल एक आर्थिक नीति नहीं है, बल्कि यह भारत को आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक राष्ट्रीय विजन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रेखांकित तीन सूत्र—More Made in India, More Investment in India, More Exports from India—आगामी वर्षों के लिए देश के औद्योगिक रोडमैप को तय करते हैं।

आज जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं से जूझ रही है, तब भारत की मजबूत विनिर्माण क्षमताएं देश को एक स्थिर, भरोसेमंद और तीव्र गति से बढ़ती आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करती हैं। 12 वर्षों की यह यात्रा साबित करती है कि भारत अब न केवल अपने लिए निर्माण कर रहा है, बल्कि दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पूरी तरह तैयार है।

© 2026 राष्ट्रीय विकास रिपोर्ट | सर्वाधिकार सुरक्षित | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘Make in India’ के 12 वर्ष पूर्ण होने पर जारी विशेष विश्लेषण


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