
साउथ अफ्रीका की छात्रा की पित्ताशय की सफल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल में
रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल में साउथ अफ्रीका की छात्रा की पित्ताशय की पथरी की सफल लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी सर्जरी। भारतीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता से मरीज को मिली राहत। पढ़ें पूरी खबर।
साउथ अफ्रीका की छात्रा का रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल में पित्ताशय की पथरी की सफल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी
रायपुर, 20 मई 2025 | पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के जनरल सर्जरी विभाग ने राजधानी रायपुर में अध्ययनरत साउथ अफ्रीकी छात्रा का गाल ब्लैडर (पित्ताशय) की पथरी की सफल लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी कर छह माह से जारी पेट दर्द से निजात दिलाई है।
क्रिसेंट (दक्षिण अफ्रीका) की रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा को 6 मई की रात अचानक पेट में तीव्र दर्द, उल्टी और भूख न लगने की शिकायत हुई। जांच में पित्ताशय की पथरी की पुष्टि के बाद छात्रा और उसके परिजनों ने भारत में इलाज कराने का निर्णय लिया। छात्रा के अटेंडर सिबोनेलो सनेलिस जुंगु ने कहा, “भारत के डॉक्टर साउथ अफ्रीका में सफलतापूर्वक इलाज कर रहे हैं, तो हम भी भारत में इलाज करवा सकते हैं। हमें यहाँ के डॉक्टरों पर पूरा भरोसा है।”
जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी एक मिनिमल इनवेसिव सर्जरी है, जिसमें पेट में छोटे चीरे लगाकर पतली कैमरे की मदद से पित्ताशय को निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया से मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी जल्दी होती है।
डॉ. मंजू सिंह ने कहा, “मरीज की हालत गंभीर नहीं थी, लेकिन समय पर सर्जरी जरूरी थी। हमने अस्पताल के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर को सूचित किया, जिन्होंने सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करवाईं। ऑपरेशन सफल रहा और छात्रा अब स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुकी है।”
अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि अस्पताल में हर्निया, एपेंडेक्टोमी, कोलेसिस्टेक्टोमी समेत विभिन्न प्रकार की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी नियमित रूप से होती हैं, जो स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत निशुल्क प्रदान की जाती हैं।
इस सर्जरी टीम में डॉ. मंजू सिंह, डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. मनीष साहू, डॉ. अंजलि जालान, डॉ. आयुषी गोयल, डॉ. पूजा जैन और एनेस्थीसिया टीम के डॉ. प्रतिभा शाह व डॉ. मंजुलता टंडन शामिल थीं।
यह सफल ऑपरेशन छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र में भारतीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता और देश के स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती का परिचायक है।









