
महामाया पहाड़ के वनाच्छादित क्षेत्र में संदिग्ध अल्पसंख्यक वर्ग के लोग जमीनों पर अवैध कब्जा कर घर बना रहे- आलोक दुबे
प्रभा सिंह यादव/ब्यूरो चीफ/सरगुजा// आलोक दुबे पार्षद नगर पालिक निगम अंबिकापुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं अंबिकापुर के विधायक टी.एस . सिंहदेव का बयान आया है कि महामाया पहाड़ अंबिकापुर में अगर रोहिग्या बसे है तो इसकी जांच होनी चाहिए। आलोक दुबे द्वारा कहा कि यह बहुत आश्चर्य का विषय है कि नगर निगम की सामान्य सभा वर्ष 2020 के दिसम्बर महीने में यह मामला बहुत जोरशोर से उठाया था कि कांग्रेस बहुमत के दम पर 17 अल्पसंख्यक लोगों का निवास एवंम जाति प्रमाण पत्र बनाने का मामला सामान्य सभा में आया था । आलोक दुबे ने कहा कि मेरे समेत सभी भाजपा के 20 पार्षदों ने इसका विरोध कर यह आशंका जताई थी कि ये लोग अवैध रूप से अपना निवास एवंम जाति प्रमाण पत्र निगम में कांग्रेस के बहुमत के दम पर बनवाना चाहते हैं । इसलिए इनका विरोध कर हम लोगों ने आशंका जताई थी कि ये रोहिंग्या हो सकते है । इसलिए एक कमेटी बनाकर इसकी जांच की जाये और विरोध भी लिखित में दर्ज कराया था । जो आज भी लंबित है । निगम प्रशासन ने इसकी गंभीरता देखते हुए अभी भी इसको जांच के नाम पर लंबित रखा है । अब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को 8 महीने बाद इसकी चिन्ता हो रही है । यह आश्चर्य की बात हैं । आलोक दुबे ने कहा है कि मैं उनसे मांग करता हूँ कि जनसम्पूर्ण अंबिकापुर शहर की जनता एवंम यहा के युवा जन प्राकृतिक रूप से घने जंगलों से घिरा सम्पूर्ण महामाया पहाड़ में जो शहर को शुद्ध हवा एवं ठंडक प्रदान करता है , युवा संगठन इसको बचाने के लिये एक हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं । तब इसमें योजनाबद्ध तरीके से अवैध अतिक्रमण कर इसके प्राकृतिक स्वरूप को नष्ट किया जा रहा हैं और प्रशासन इसकी जांच शुरू किया हैं । इस पर स्वास्थ्य मंत्री जी कुछ नहीं बोल रहे हैं । यह आश्चर्य का विषय हैं । इसके वनाच्छादित क्षेत्र में संदिग्ध अल्पसंख्यक वर्ग के लोग अपने को झारखण्ड बिहार और बंगाल का बताकर आदिवासियों के वन अधिकार मान्यता पत्र के जमीनों को स्टाम्प में खरीदी बिक्री कर बिना पुलिस को मुसाफिरी की सूचना दिये रिजर्व फारेस्ट की जमीनों पर अवैध कब्जा कर घर बना रहे हैं । इससे आशंका बढ़ी है कि यह बंगलादेश के भागे रोहिंग्या मुसलमान हो सकते हैं । इसलिए सरगुजा समेत पूरे छत्तीसगढ़ के विशेषकर सरगुजा और बस्तर संभाग में एन.आई.ए. एजेंसी से इसकी जांच करायी जाए ।














